Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi – क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं? (Is Matter Around Us Pure?) के इस पोस्ट में हम आपको NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित, सरल, स्पष्ट और परीक्षा-उपयोगी संपूर्ण नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं।
यह नोट्स विशेष रूप से CBSE, Bihar Board, UP Board तथा अन्य राज्य बोर्डों के हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि वे इस अध्याय के प्रत्येक टॉपिक को आसानी से समझ सकें और बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें।
इस अध्याय में हमने शुद्ध पदार्थ, अशुद्ध पदार्थ, मिश्रण, समांगी एवं विषमांगी मिश्रण, विलयन, निलंबन, कोलाइड, टिंडल प्रभाव, तत्व, यौगिक, धातु, अधातु, उपधातु तथा मिश्रण एवं यौगिक के बीच अंतर को विस्तारपूर्वक और आसान भाषा में समझाया है।
साथ ही, इस अध्याय में विभिन्न पृथक्करण विधियों जैसे — अपकेंद्रण, वर्णलेखन, आसवन, प्रभाजी आसवन, क्रिस्टलीकरण तथा पृथक्करण कीप आदि को भी उदाहरणों एवं प्रयोगात्मक उपयोगों के साथ विस्तार से बताया गया है।
हर विषय को परिभाषाओं, मुख्य बिंदुओं, सारणी (Table), सूत्रों तथा आसान व्याख्या के माध्यम से इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि विद्यार्थी इसे आसानी से समझ और याद कर सकें।
इन नोट्स में भौतिक परिवर्तन एवं रासायनिक परिवर्तन, विलयन की सांद्रता, द्रव्यमान प्रतिशत, आयतन प्रतिशत तथा घुलनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी परीक्षा के अनुसार विशेष रूप से शामिल किया गया है।
अगर आप Class 9th Chemistry Chapter 2 – क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं? को बिल्कुल आसान भाषा में समझना चाहते हैं और अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो यह फ्री हिंदी नोट्स और PDF डाउनलोड आपके लिए अत्यंत उपयोगी है।
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Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi

| Title | Details |
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 9th |
| Subject | Science (Chemistry) |
| Chapter No. | Chapter 2 |
| Chapter Name | Is Matter Around Us Pure? (क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं?) |
| Category | Class 9th Science Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
शुद्ध पदार्थ (Pure Substance)
वैसा पदार्थ जो केवल एक ही प्रकार के कणों (Particles) से मिलकर बना होता है, उसे शुद्ध पदार्थ कहते हैं। शुद्ध पदार्थ के सभी भागों का संघटन तथा गुण समान होते हैं। इसमें किसी अन्य पदार्थ की मिलावट नहीं होती है।
उदाहरण :- हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, लोहा, सल्फर, सोना आदि।
शुद्ध पदार्थ का गलनांक एवं क्वथनांक निश्चित होता है तथा इसे सामान्य भौतिक विधियों द्वारा अलग नहीं किया जा सकता।
Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
अशुद्ध पदार्थ (Impure Substance)
वैसे पदार्थ जो दो या दो से अधिक प्रकार के कणों से मिलकर बने होते हैं, उन्हें अशुद्ध पदार्थ कहते हैं। अशुद्ध पदार्थों में विभिन्न पदार्थ आपस में मिले रहते हैं, इसलिए इनके सभी भागों का संघटन समान नहीं होता है।
उदाहरण :- नल का जल, दूध, हवा, मिट्टी आदि।
अशुद्ध पदार्थों के गुण स्थान के अनुसार बदल सकते हैं क्योंकि इनमें एक से अधिक पदार्थ उपस्थित रहते हैं।
मिश्रण (Mixture)
वैसा पदार्थ जो दो या दो से अधिक तत्वों अथवा यौगिकों के किसी भी अनुपात में मिलकर बनता है, उसे मिश्रण कहते हैं। मिश्रण में उपस्थित पदार्थ अपने-अपने मूल गुणों को बनाए रखते हैं तथा उन्हें भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है।
हवा एक अच्छा उदाहरण है, क्योंकि इसमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा जलवाष्प आदि गैसें मिली रहती हैं।
अन्य उदाहरण :- नमक और जल का मिश्रण, दूध, मिट्टी आदि।
Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
बारूद किन-किन पदार्थों का मिश्रण है?
बारूद मुख्य रूप से तीन पदार्थों के मिश्रण से बनता है —
- सल्फर (Sulphur)
- पोटैशियम नाइट्रेट (Potassium Nitrate)
- कोयला (Charcoal)
मिश्रण के प्रकार
मिश्रण मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं — समांगी मिश्रण तथा विषमांगी मिश्रण।
समांगी मिश्रण (Homogeneous Mixture)
वह मिश्रण जिसके संपूर्ण भाग में अवयवी पदार्थों का संघटन समान होता है, उसे समांगी मिश्रण कहते हैं। इसमें सभी अवयव पूरी तरह आपस में मिल जाते हैं, इसलिए उन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। यह देखने में एकसमान प्रतीत होता है।
उदाहरण :- जल एवं चीनी का मिश्रण, नमक का घोल, हवा आदि।
Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
विषमांगी मिश्रण (Heterogeneous Mixture)
वह मिश्रण जिसके संपूर्ण भाग में पदार्थों का संघटन एक समान नहीं होता है, उसे विषमांगी मिश्रण कहते हैं। इसमें अवयव पूर्ण रूप से नहीं मिलते, इसलिए उन्हें अलग-अलग देखा जा सकता है।
उदाहरण :- जल और बालू का मिश्रण, तेल और पानी, मिट्टी आदि।
समांगी एवं विषमांगी मिश्रण में अंतर
| समांगी मिश्रण | विषमांगी मिश्रण |
| इसके संपूर्ण भाग में अवयवी पदार्थों का संघटन समान होता है। | इसके संपूर्ण भाग में अवयवी पदार्थों का संघटन समान नहीं होता है। |
| इसमें उपस्थित अवयवों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। | इसमें उपस्थित अवयवों को अलग-अलग देखा जा सकता है। |
| यह देखने में एकसमान दिखाई देता है। | यह देखने में असमान दिखाई देता है। |
| उदाहरण — चीनी एवं जल का मिश्रण | उदाहरण — जल और बालू का मिश्रण |
विलयन (Solution)
दो या दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण को विलयन कहते हैं। विलयन में सभी पदार्थ आपस में पूरी तरह मिल जाते हैं, इसलिए इसके विभिन्न भागों का संघटन समान होता है।
उदाहरण :- नमक और जल, चीनी और जल, नींबू जल आदि।
विलयन मुख्य रूप से दो भागों से मिलकर बना होता है — विलेय तथा विलायक।
Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
विलेय (Solute)
विलयन में जिस पदार्थ की मात्रा कम होती है तथा जो घुलता है, उसे विलेय कहते हैं।
उदाहरण :- नमक-जल के विलयन में नमक विलेय है।
विलायक (Solvent)
विलयन में जिस पदार्थ की मात्रा अधिक होती है तथा जिसमें दूसरा पदार्थ घुलता है, उसे विलायक कहते हैं।
उदाहरण :- नमक-जल के विलयन में जल विलायक है।
जलीय विलयन (Aqueous Solution)
जिस विलयन में जल विलायक के रूप में उपस्थित रहता है, उसे जलीय विलयन कहते हैं।
उदाहरण :- चीनी और जल का विलयन, नमक और जल का विलयन आदि।
Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
अजलीय विलयन (Non-Aqueous Solution)
जिस विलयन में जल उपस्थित नहीं रहता है, उसे अजलीय विलयन कहते हैं।
उदाहरण :- पेट्रोल में ग्रीस का मिश्रण, अल्कोहल एवं आयोडीन का विलयन आदि।
विलयन के गुण (Properties of Solution)
विलयन के कुछ महत्वपूर्ण गुण निम्नलिखित हैं —
- विलयन एक समांगी मिश्रण होता है।
- विलयन के कण अत्यंत छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें आँखों से नहीं देखा जा सकता।
- विलयन में प्रकाश का मार्ग दिखाई नहीं देता है, क्योंकि इसके कण प्रकाश को नहीं फैलाते हैं।
- विलयन के कण छन्ना पत्र (Filter Paper) से आसानी से पार हो जाते हैं।
- विलयन स्थायी होता है तथा इसके कण नीचे नहीं बैठते हैं।
संतृप्त विलयन (Saturated Solution)
वैसा विलयन जिसके विलायक में किसी निश्चित ताप पर और अधिक विलेय घुलाने की क्षमता नहीं रहती है, उसे संतृप्त विलयन कहते हैं।
अर्थात जब विलायक पूरी तरह विलेय को घोल चुका होता है, तब प्राप्त विलयन संतृप्त विलयन कहलाता है।
Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
घुलनशीलता (Solubility)
किसी निश्चित ताप पर संतृप्त विलयन में उपस्थित विलेय पदार्थ की अधिकतम मात्रा को उसकी घुलनशीलता कहते हैं।
घुलनशीलता का सूत्र
घुलनशीलता=विलेय का द्रव्यमान / विलायक का द्रव्यमान
इसका सामान्यतः कोई मात्रक नहीं होता है।
असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution)
वैसा विलयन जिसमें किसी निश्चित ताप पर और अधिक विलेय घुल सकता है, उसे असंतृप्त विलयन कहते हैं।
अर्थात इस प्रकार के विलयन में विलायक की घोलने की क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं होती है।
Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
तनु विलयन एवं सांद्र विलयन
जिस विलयन में विलेय की मात्रा कम होती है, उसे तनु विलयन (Dilute Solution) कहते हैं।
वहीं जिस विलयन में विलेय की मात्रा अधिक होती है, उसे सांद्र विलयन (Concentrated Solution) कहते हैं।
विलयन की सांद्रता (Concentration of Solution)
किसी विलयन की निश्चित मात्रा में घुले हुए विलेय की मात्रा को उस विलयन की सांद्रता कहते हैं।
सांद्रता का सूत्र
विलयन की सांद्रता=विलेय की मात्रा / विलयन की मात्रा
विलयन का द्रव्यमान प्रतिशत (Mass Percentage)
किसी विलयन के 100 ग्राम में उपस्थित विलेय के द्रव्यमान को उस विलयन का द्रव्यमान प्रतिशत कहते हैं।
द्रव्यमान प्रतिशत का सूत्र
द्रव्यमान प्रतिशत=विलेय का द्रव्यमान / विलयन का द्रव्यमान×100
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विलयन का आयतन प्रतिशत (Volume Percentage)
किसी विलयन के 100 मिलीलीटर आयतन में उपस्थित विलेय द्रव के आयतन को उस विलयन का आयतन प्रतिशत कहते हैं।
आयतन प्रतिशत का सूत्र
आयतन प्रतिशत=विलेय का आयतन / विलयन का आयतन×100
निलंबन (Suspension)
ऐसा विषमांगी मिश्रण जिसमें ठोस के कण बिना घुले द्रव में फैले रहते हैं, उसे निलंबन कहते हैं।
इस प्रकार के मिश्रण में कण बड़े होते हैं तथा कुछ समय बाद नीचे बैठ जाते हैं।
उदाहरण :- चॉक का चूर्ण एवं जल का मिश्रण, गेहूँ का आटा और जल का मिश्रण आदि।
निलंबन के गुण
- यह एक विषमांगी मिश्रण होता है।
- इसके कणों का आकार अपेक्षाकृत बड़ा होता है।
- इसके कणों को आँखों से देखा जा सकता है।
- इसके कण प्रकाश की किरणों को फैला देते हैं, जिससे प्रकाश का मार्ग दिखाई देता है।
- कुछ समय बाद इसके कण नीचे बैठ जाते हैं।
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कोलाइड (Colloid)
वैसा मिश्रण जिसमें किसी माध्यम में अत्यंत छोटे-छोटे कण तैरते या लटके रहते हैं, उसे कोलाइड कहते हैं।
कोलाइड के कण इतने छोटे होते हैं कि वे आसानी से नीचे नहीं बैठते, लेकिन प्रकाश की किरणों को फैला देते हैं।
उदाहरण :- दूध एक कोलाइड है, जिसमें वसा के छोटे-छोटे कण जल में तैरते रहते हैं।
टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect)
जब प्रकाश किसी कोलाइड मिश्रण से होकर गुजरता है, तब कोलाइड के कणों द्वारा प्रकाश का सभी दिशाओं में प्रकीर्णन (Scattering) होता है। इस घटना को टिंडल प्रभाव कहते हैं।
इस प्रभाव को सर्वप्रथम टिंडल नामक वैज्ञानिक ने प्रदर्शित किया था, इसलिए इसका नाम टिंडल प्रभाव रखा गया।
टिंडल प्रभाव के कारण कोलाइड में प्रकाश का मार्ग स्पष्ट दिखाई देता है।
उदाहरण :- धुंध में वाहन की हेडलाइट का मार्ग दिखाई देना, अंधेरे कमरे में सूर्य की किरणों का दिखाई देना आदि।
परिक्षेपण (Dispersion)
जब किसी पदार्थ के कणों को किसी दूसरे पदार्थ के कणों के चारों ओर फैला या बिखरा दिया जाता है, तब इस प्रक्रिया को परिक्षेपण कहते हैं।
कोलाइड में एक पदार्थ के सूक्ष्म कण दूसरे माध्यम में फैले रहते हैं, इसलिए कोलाइड को परिक्षेपित तंत्र भी कहा जाता है।
Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
कोलाइड के गुण (Properties of Colloid)
कोलाइड के कुछ महत्वपूर्ण गुण निम्नलिखित हैं —
- यह देखने में समांगी प्रतीत होता है, लेकिन वास्तव में यह विषमांगी मिश्रण होता है।
- इसके कणों का व्यास लगभग 1 नैनोमीटर से 1000 नैनोमीटर के बीच होता है।
- इसके कण आँखों से दिखाई नहीं देते हैं।
- इसके कण प्रकाश की किरणों को फैलाते हैं, जिसके कारण टिंडल प्रभाव दिखाई देता है।
- इसके कण आसानी से नीचे नहीं बैठते हैं, इसलिए कोलाइड अपेक्षाकृत स्थायी होता है।
पृथक्करण (Separation)
मिश्रण के विभिन्न अवयवों को अलग करने की प्रक्रिया को पृथक्करण कहते हैं।
पदार्थों के गुणों में अंतर के आधार पर विभिन्न पृथक्करण विधियों का उपयोग किया जाता है।
पृथक्करण के उपयोग
- तेल तथा जल जैसे अमिश्रणीय द्रवों को अलग करने में
- पिघले हुए लोहे एवं धातु मल (Slag) को अलग करने में
- ईथर और जल के मिश्रण को पृथक करने में
पृथक्करण कीप (Separating Funnel)
यह एक विशेष प्रकार की कीप होती है, जिसके नीचे एक स्टॉपकॉक (नलिका) लगा रहता है। इसका उपयोग दो अमिश्रणीय द्रवों को अलग करने के लिए किया जाता है।
इसमें भारी द्रव नीचे बैठ जाता है तथा हल्का द्रव ऊपर रहता है। स्टॉपकॉक खोलकर नीचे वाले द्रव को अलग कर लिया जाता है।
अपकेंद्रण (Centrifugation)
किसी मिश्रण को तेज गति से घुमाकर उसके भारी एवं हल्के कणों को अलग करने की प्रक्रिया को अपकेंद्रण कहते हैं।
इस विधि में भारी कण नीचे बैठ जाते हैं जबकि हल्के कण ऊपर रह जाते हैं।
अपकेंद्रण के उपयोग
- दूध से क्रीम निकालने में
- कपड़ा धोने की मशीन में
- गीले कपड़ों से जल निकालने में
- प्रयोगशाला में रक्त एवं मूत्र की जाँच में
- दही से मक्खन निकालने में
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वर्णलेखन (Chromatography)
जिस विधि द्वारा विभिन्न रंगों या पदार्थों का पृथक्करण किया जाता है, उसे वर्णलेखन कहते हैं।
इस विधि में पदार्थों की घुलनशीलता एवं अवशोषण क्षमता के आधार पर उन्हें अलग किया जाता है।
वर्णलेखन के उपयोग
- डाई में उपस्थित रंगों को अलग करने में
- प्राकृतिक रंगों से वर्णक (Pigment) को पृथक करने में
- रक्त से नशीले पदार्थों की पहचान करने में
आसवन विधि (Distillation)
दो घुलनशील द्रवों के मिश्रण को उनके क्वथनांकों के अंतर के आधार पर अलग करने की विधि को आसवन विधि कहते हैं।
इस विधि में मिश्रण को गर्म किया जाता है। कम क्वथनांक वाला द्रव पहले वाष्प में बदलता है और बाद में उसे ठंडा करके पुनः द्रव में परिवर्तित कर लिया जाता है।
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प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation)
जब दो या दो से अधिक घुलनशील द्रवों के क्वथनांकों में बहुत कम अंतर होता है, तब उन्हें अलग करने के लिए प्रभाजी आसवन विधि का उपयोग किया जाता है।
सामान्यतः यह विधि तब उपयोगी होती है जब क्वथनांकों के बीच लगभग 25 K या उससे कम का अंतर हो।
प्रभाजी आसवन के उपयोग
- पेट्रोलियम पदार्थों के पृथक्करण में
- वायु से विभिन्न गैसों को अलग करने में
- एसीटोन, अल्कोहल एवं जल के मिश्रण को अलग करने में
क्रिस्टलीकरण (Crystallization)
अशुद्ध ठोस पदार्थ के सांद्र घोल को गर्म करके तथा फिर धीरे-धीरे ठंडा करके शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करने की प्रक्रिया को क्रिस्टलीकरण कहते हैं।
इस विधि का उपयोग ठोस पदार्थों को शुद्ध करने के लिए किया जाता है।
उदाहरण :- समुद्री जल से प्राप्त नमक को शुद्ध करना।
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भौतिक परिवर्तन (Physical Change)
वैसा परिवर्तन जिसमें पदार्थ की केवल भौतिक अवस्था, आकार या आकृति में परिवर्तन होता है तथा परिवर्तन को उल्टा करने पर पदार्थ पुनः अपनी मूल अवस्था में आ जाता है, उसे भौतिक परिवर्तन कहते हैं।
इस परिवर्तन में कोई नया पदार्थ नहीं बनता है।
उदाहरण :-
- बर्फ का पिघलना
- मोम का पिघलना
- बादलों का बरसना
- बल्ब का जलना
रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change)
वैसा परिवर्तन जिसमें पदार्थ के भौतिक एवं रासायनिक गुण स्थायी रूप से बदल जाते हैं तथा परिवर्तन को उल्टा करने पर मूल पदार्थ पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता, उसे रासायनिक परिवर्तन कहते हैं।
इस परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है तथा यह सामान्यतः स्थायी होता है।
उदाहरण :-
- कागज का जलना
- बीज से पौधा बनना
- भोजन का पचना
- लोहे में जंग लगना
- पौधों की वृद्धि
भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन में अंतर
भौतिक परिवर्तन –
- इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता है
- यह एक अस्थाई परिवर्तन है
- यह उत्क्रमणीय प्रक्रिया होता है
- इसमें पदार्थ परिवर्तित नहीं होता है
रासायनिक परिर्वतन –
- इसमें हमेशा नया पदार्थ बनता है
- यह एक स्थाई परिवर्तन है
- यह अनुत्क्रमणीय होता है
- इसमें पदार्थ परिवर्तित होते हैं
Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
तत्व (Element)
वह शुद्ध पदार्थ जिसे किसी भी भौतिक या रासायनिक विधि द्वारा दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता, उसे तत्व कहते हैं।
तत्व केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना होता है। प्रत्येक तत्व के परमाणुओं के गुण समान होते हैं।
उदाहरण :- हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, लोहा, सोना, चाँदी आदि।
धातु (Metal)
वैसा तत्व जो ऊष्मा एवं विद्युत का सुचालक होता है तथा सामान्यतः ठोस, चमकीला, आघातवर्धनीय एवं तन्य होता है, उसे धातु कहते हैं।
धातुएँ प्रायः कठोर होती हैं तथा इनका गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होता है।
उदाहरण :- सोना, चाँदी, लोहा, ताँबा आदि।
धातु के गुण
- धातुएँ सामान्यतः चमकीली होती हैं।
- यह विद्युत एवं ऊष्मा की अच्छी सुचालक होती हैं।
- अधिकांश धातुएँ कठोर होती हैं।
- धातुएँ आघातवर्धनीय (पीटकर चादर बनाने योग्य) होती हैं।
- धातुएँ तन्य (तार बनाने योग्य) होती हैं।
- इनके गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः उच्च होते हैं।
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अधातु (Non-Metal)
वैसा तत्व जो विद्युत एवं ऊष्मा का कुचालक होता है तथा आघातवर्धनीय एवं तन्य नहीं होता है, उसे अधातु कहते हैं।
अधातुएँ ठोस, द्रव अथवा गैस तीनों अवस्थाओं में पाई जा सकती हैं।
उदाहरण :- हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, आयोडीन, सल्फर आदि।
अधातु के गुण
- अधातुएँ सामान्यतः विद्युत एवं ऊष्मा की कुचालक होती हैं।
- इनमें धातुओं जैसी चमक नहीं होती है।
- यह आघातवर्धनीय एवं तन्य नहीं होती हैं।
- इनके गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः कम होते हैं।
- अधातुएँ विभिन्न रंगों में पाई जाती हैं।
उपधातु (Metalloid)
वैसा तत्व जिसमें धातु एवं अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं, उसे उपधातु कहते हैं।
उपधातुओं में कुछ गुण धातुओं जैसे तथा कुछ गुण अधातुओं जैसे होते हैं।
उदाहरण :- बोरॉन, सिलिकॉन, जर्मेनियम आदि।
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धातु तथा अधातु में अंतर
| धातु | अधातु |
| धातुएँ चमकदार होती हैं। | अधातुएँ सामान्यतः चमकदार नहीं होती हैं। |
| धातुएँ आघातवर्धनीय एवं तन्य होती हैं। | अधातुएँ आघातवर्धनीय एवं तन्य नहीं होती हैं। |
| यह विद्युत एवं ऊष्मा की सुचालक होती हैं। | यह विद्युत एवं ऊष्मा की कुचालक होती हैं। |
| अधिकांश धातुएँ ठोस अवस्था में पाई जाती हैं। | अधातुएँ ठोस, द्रव एवं गैस तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं। |
| इनके गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होते हैं। | इनके गलनांक एवं क्वथनांक अपेक्षाकृत निम्न होते हैं। |
यौगिक (Compound)
जब दो या दो से अधिक तत्व एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयोग करके नया पदार्थ बनाते हैं, तब उसे यौगिक कहते हैं।
यौगिक के गुण उसके अवयव तत्वों से भिन्न होते हैं।
उदाहरण :- जल एक यौगिक है, जो हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन के निश्चित अनुपात में संयोग से बनता है।
Class 9 Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
तत्व एवं यौगिक में अंतर
| तत्व | यौगिक |
| तत्व केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से बना होता है। | यौगिक दो या दो से अधिक तत्वों से मिलकर बना होता है। |
| तत्व का सूक्ष्मतम कण परमाणु होता है। | यौगिक का सूक्ष्मतम कण अणु होता है। |
| तत्व को सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता। | यौगिक को रासायनिक विधियों द्वारा उसके तत्वों में विभाजित किया जा सकता है। |
| तत्व का अपना विशिष्ट गुण होता है। | यौगिक के गुण उसके तत्वों से भिन्न होते हैं। |
| उदाहरण — लोहा, ऑक्सीजन | उदाहरण — जल, कार्बन डाइऑक्साइड |
मिश्रण तथा यौगिक में अंतर
| मिश्रण | यौगिक |
| मिश्रण का बनना भौतिक परिवर्तन है। | यौगिक का बनना रासायनिक परिवर्तन है। |
| मिश्रण समांगी या विषमांगी दोनों हो सकता है। | यौगिक हमेशा समांगी होता है। |
| मिश्रण का कोई निश्चित सूत्र नहीं होता है। | यौगिक का निश्चित रासायनिक सूत्र होता है। |
| मिश्रण में अवयव किसी भी अनुपात में मिल सकते हैं। | यौगिक में तत्व निश्चित अनुपात में मिलते हैं। |
| मिश्रण के अवयवों को सरल भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है। | यौगिक के अवयवों को केवल रासायनिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है। |
| मिश्रण बनने में उष्मा परिवर्तन आवश्यक नहीं होता। | यौगिक बनने में सामान्यतः उष्मा परिवर्तन होता है। |
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निष्कर्ष (Conclusion)
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