Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi : मानव स्वास्थ्य एवं रोग (Human Health and Diseases) के इस पोस्ट में हम आपको NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित, सरल, स्पष्ट और बोर्ड परीक्षा के लिए उपयोगी नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। ये नोट्स विशेष रूप से CBSE, UP Board, Bihar Board, JAC, RBSE और अन्य हिंदी माध्यम के छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं, ताकि वे इस अध्याय को आसानी से समझ सकें और परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त कर सकें।
इस अध्याय में स्वास्थ्य की परिभाषा, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक स्वास्थ्य, संतुलित आहार, बीमारी के प्रकार, संक्रामक और असंक्रामक रोग, अल्पता रोग, अंगों की कुसंक्रियता से होने वाली बीमारियाँ, एलर्जी, रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव (वायरस, जीवाणु, कवक, प्रोटोजोआ, कृमि) को विस्तार से समझाया गया है। साथ ही प्रतिजैविक (Antibiotics), टीकाकरण (Vaccination), रोगों के फैलने के माध्यम, संक्रामक रोगों के उपचार के नियम और शिशु मृत्यु दर (IMR) जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी बोर्ड पैटर्न के अनुसार कवर किया गया है।
इन नोट्स को बुलेट पॉइंट्स, सरल भाषा और परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण बिंदुओं के साथ इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह तेजी से रिवीजन और short/long answer preparation दोनों के लिए उपयोगी साबित हों।
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Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi Overview

| Board | Bihar School Examination Board (BSEB) |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 9th |
| Subject | Science (Biology) |
| Chapter No. | Chapter 4 |
| Chapter Name | मानव स्वास्थ्य एवं रोग (Human Health and Diseases) |
| Category | Class 9th Science Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
स्वास्थ्य (Health)
किसी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ रहने की समग्र अवस्था को स्वास्थ्य कहा जाता है। अर्थात केवल रोगों का न होना ही स्वास्थ्य नहीं है, बल्कि व्यक्ति का हर दृष्टि से संतुलित और सामान्य जीवन जी पाना भी स्वास्थ्य का ही भाग है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक शर्तें
स्वस्थ रहने के लिए निम्नलिखित बातों का होना आवश्यक है –
1. संतुलित आहार
ऐसा भोजन जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण और जल उचित मात्रा में उपस्थित हों, संतुलित आहार कहलाता है। संतुलित आहार शरीर की वृद्धि, ऊर्जा, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
2. व्यक्तिगत एवं घरेलू स्वच्छता
नियमित स्नान, साफ कपड़े पहनना, हाथ धोना, घर-आसपास की सफाई रखना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
3. स्वच्छ भोजन, जल एवं वायु
दूषित भोजन, गंदा पानी और प्रदूषित हवा अनेक रोगों का कारण बनते हैं, इसलिए इनका स्वच्छ होना आवश्यक है।
4. पर्याप्त आराम, व्यायाम एवं अच्छी आदतें
नियमित व्यायाम, समय पर नींद, नशे से दूरी और सकारात्मक जीवनशैली अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखती है।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
व्यक्तिगत एवं सामुदायिक स्वास्थ्य
व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सामुदायिक स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं। यदि समुदाय अस्वस्थ होगा, तो उसमें रहने वाले व्यक्ति भी स्वस्थ नहीं रह सकते।
सामुदायिक स्वास्थ्य निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है –
- स्वच्छ और सुरक्षित भोजन की उपलब्धता
- कूड़े-कचरे और गंदे जल के उचित निष्पादन की व्यवस्था
- हरे-भरे खुले स्थान और स्वच्छ पर्यावरण
- शुद्ध वायु
- चिकित्सा सुविधाएँ, अस्पताल और टीकाकरण व्यवस्था
बीमारी (Diseases)

शरीर की वह अवस्था जिसमें व्यक्ति अपने सामान्य कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर पाता है, बीमारी कहलाती है। बीमारी के कारण शरीर की कार्यक्षमता कम हो जाती है और स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
बीमारियों के प्रकार
बीमारियों को मुख्य रूप से निम्नलिखित वर्गों में बाँटा गया है –
1. अल्पकालिक रोग
वे रोग जो कम समय के लिए होते हैं और शीघ्र ठीक हो जाते हैं, अल्पकालिक रोग कहलाते हैं। उदाहरण: सर्दी, खाँसी, बुखार, दस्त आदि।
2. दीर्घकालिक रोग
वे रोग जो लंबे समय तक या जीवन भर बने रहते हैं, दीर्घकालिक रोग कहलाते हैं। उदाहरण: टी.बी., मधुमेह, दमा, एक्जिमा, गठिया आदि।
3. संक्रामक रोग
वे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में वायु, जल, भोजन, रक्त, संपर्क या रोग-वाहकों द्वारा फैलते हैं, संक्रामक रोग कहलाते हैं। उदाहरण: मलेरिया, हैजा, टाइफाइड, टी.बी., खसरा, हेपेटाइटिस, एड्स, रेबीज आदि।
4. अल्पता रोग (Deficiency Diseases)
वे रोग जो संतुलित आहार के अभाव में किसी पोषक तत्व की कमी से होते हैं, अल्पता रोग कहलाते हैं।
| पोषक तत्व की कमी | रोग |
| प्रोटीन | क्वाशिओरकर, मेरास्मस |
| विटामिन A | रतौंधी |
| विटामिन B | बेरी-बेरी |
| विटामिन C | स्कर्वी |
| विटामिन D | रिकेट्स |
| आयोडीन | घेंघा |
| आयरन | एनीमिया |
5. अंगों की कार्य-विकृति से होने वाले रोग
वे रोग जो शरीर के किसी अंग के ठीक प्रकार से कार्य न करने के कारण उत्पन्न होते हैं। उदाहरण: मधुमेह, घेंघा, अतिकायता, बौनापन आदि।
प्रतिक्रिया बीमारी (Allergy)

शरीर की वह अवस्था जिसमें व्यक्ति किसी विशेष पदार्थ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है, प्रतिक्रिया बीमारी या एलर्जी कहलाती है। उदाहरण: दमा (धूल-कण, परागकण आदि से)।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
संक्रामक रोग उत्पन्न करने वाले कारक
वे सूक्ष्मजीव जो रोगों का संक्रमण एक जीव से दूसरे जीव में फैलाते हैं, संक्रामक कारक कहलाते हैं।
प्रमुख संक्रामक कारक –
1. विषाणु (Virus): खाँसी, जुकाम, चेचक, एड्स, इन्फ्लुएंजा, डेंगू, हेपेटाइटिस आदि।
2. जीवाणु (Bacteria): टाइफाइड, हैजा, टी.बी., एन्थ्रैक्स, मुहांसे आदि।
3. कवक (Fungi): त्वचा रोग जैसे दाद, एक्जिमा, डर्मेटाइटिस, एस्परजिलोसिस, भोजन विषाक्तता।
4. प्रोटोजोआ (Protozoa): मलेरिया, अमीबिक पेचिश, कालाजार, निद्रारोग।
प्रतिजैविक (Antibiotics)
वे रासायनिक पदार्थ जो कुछ सूक्ष्मजीवों द्वारा अन्य सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने के लिए बनाए जाते हैं, प्रतिजैविक कहलाते हैं। ये केवल जीवाणुजनित रोगों में प्रभावी होते हैं, विषाणुजनित रोगों में नहीं।
उदाहरण: पेनिसिलिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन, टेट्रासाइक्लिन, टेरामाइसिन।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
संक्रामक रोगों के फैलने में सहायक कारक
संक्रामक रोग निम्न माध्यमों से फैलते हैं –
- दूषित वायु
- दूषित जल
- संक्रमित भोजन
- रक्त का आदान-प्रदान
- लैंगिक संपर्क
- रोग-वाहक (मच्छर, मक्खी आदि)
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
अंगों तथा ऊतकों का संक्रमण
जब कोई सूक्ष्मजीव (जीवाणु, विषाणु, प्रोटोजोआ आदि) हमारे शरीर में प्रवेश करता है, तो उसका प्रभाव केवल उसी स्थान तक सीमित नहीं रहता जहाँ से वह शरीर में घुसा होता है।
अक्सर यह सूक्ष्मजीव रक्त या लसीका (Lymph) के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों और ऊतकों तक पहुँच जाता है और वहाँ संक्रमण फैलाता है।
उदाहरण: मलेरिया का परजीवी प्लाज्मोडियम मादा एनोफिलीज़ मच्छर के काटने से शरीर में प्रवेश करता है। प्रारंभ में यह रक्त में जाता है, लेकिन बाद में यकृत (लिवर) में पहुँचकर वहाँ वृद्धि करता है और फिर लाल रक्त कणिकाओं को प्रभावित करता है। इस प्रकार एक ही रोग शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
संक्रामक रोगों के सामान्य प्रभाव
जब कोई व्यक्ति संक्रामक रोग से पीड़ित होता है, तो उसके शरीर में निम्नलिखित सामान्य प्रभाव दिखाई देते हैं –
- सबसे पहले शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है।
- संक्रमण के कारण शरीर में नई कोशिकाओं का निर्माण तेज हो जाता है, जिससे शोथ (Inflammation) उत्पन्न होता है।
- शोथ के कारण शरीर में सूजन, दर्द, लालिमा और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
- यदि संक्रामक सूक्ष्मजीवों की संख्या तेजी से बढ़ती है, तो रोग की तीव्रता और गंभीरता भी बढ़ जाती है।
- लंबे समय तक संक्रमण रहने पर शरीर की कार्यक्षमता घटने लगती है और कमजोरी महसूस होती है।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
संक्रामक रोगों के उपचार के नियम
संक्रामक रोगों का उपचार मुख्यतः दो मूल सिद्धांतों पर आधारित होता है –
1. रोग के प्रभाव को कम करना
इसमें रोग के लक्षणों जैसे बुखार, दर्द, सूजन और कमजोरी को नियंत्रित किया जाता है, ताकि रोगी को आराम मिल सके।
2. रोग के कारण को समाप्त करना
इसमें रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट किया जाता है। इसके लिए प्रतिजैविक, प्रतिविषाणु दवाएँ, टीकाकरण और उचित चिकित्सा पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
स्वास्थ्य और विकास
मनुष्य के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आधुनिक विज्ञान ने चिकित्सा की उन्नत तकनीकों का विकास किया है।
इन तकनीकों के कारण आज कई गंभीर रोगों का सफल उपचार संभव हो पाया है।
उदाहरण:
- प्लास्टिक सर्जरी
- वृक्क (किडनी) प्रतिरोपण
- आँख की कॉर्निया का प्रतिरोपण
- कृत्रिम अंगों का विकास
- पेसमेकर तकनीक द्वारा हृदय उपचार
हालाँकि ये सभी सुविधाएँ अत्यंत उपयोगी हैं, लेकिन अभी भी ये आम जनमानस की पहुँच से दूर हैं।
देश के विकास के लिए नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार अत्यंत आवश्यक है, लेकिन इसके मार्ग में दो प्रमुख बाधाएँ हैं –
- तेजी से बढ़ती जनसंख्या
- विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न प्रदूषण (वायु, जल, ध्वनि, मृदा प्रदूषण)
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
शिशु मृत्यु दर (IMR – Infant Mortality Rate)

किसी एक वर्ष में जीवित जन्म लेने वाले 1 वर्ष से कम आयु के प्रति 1000 शिशुओं में से मरने वाले शिशुओं की संख्या को शिशु मृत्यु दर कहा जाता है।
शिशु मृत्यु दर किसी देश की स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण स्तर और सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण संकेतक होती है। कम शिशु मृत्यु दर बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था और विकास को दर्शाती है।
संक्रामक बीमारी (Infectious Diseases)
वे रोग जो किसी बीमार व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में विभिन्न माध्यमों द्वारा फैल जाते हैं,
संक्रामक बीमारी कहलाते हैं।
उदाहरण: मलेरिया, टी.बी., टाइफाइड, एड्स, डेंगू, कालाजार, फाइलेरिया, डायरिया, हैजा, रेबीज आदि।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
अल्पता बीमारी (Deficiency Diseases)
वे रोग जो शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी के कारण उत्पन्न होते हैं, अल्पता बीमारी कहलाते हैं।
उदाहरण: घेंघा, एनीमिया आदि।
अंगों की कुसंक्रियता से होने वाली बीमारी
जब शरीर का कोई अंग क्षतिग्रस्त हो जाए या ठीक प्रकार से कार्य न करे, तो उससे उत्पन्न रोग को अंगों की कुसंक्रियता से होने वाली बीमारी कहा जाता है।
उदाहरण: मधुमेह (डायबिटीज)।
प्रतिजैविक का प्रभाव मनुष्य पर क्यों नहीं पड़ता है?
मनुष्य की कोशिकाओं में कोशिका भित्ति (Cell Wall) नहीं पाई जाती। प्रतिजैविक का प्रभाव उन सूक्ष्मजीवों पर पड़ता है जिनमें कोशिका भित्ति होती है। इसी कारण प्रतिजैविक मनुष्य की कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुँचाते।
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संक्रामक रोग
वे रोग जो सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पन्न होते हैं और स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पहुँचकर संक्रमण फैलाते हैं, संक्रामक रोग कहलाते हैं।
संक्रामक रोगों के उपाय
संक्रामक रोगों का उपचार मुख्यतः दो बातों पर आधारित होता है –
- रोग के प्रभाव को कम करना।
- रोग उत्पन्न करने वाले कारण को समाप्त करना।
संक्रमित होने के नुकसान
- संक्रमित होने पर शरीर कमजोर हो जाता है और कार्यक्षमता घट जाती है।
- ऐसे रोगों के उपचार में अधिक समय लग सकता है।
- संक्रमित व्यक्ति अन्य लोगों के लिए संक्रमण का स्रोत बन सकता है।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
असंक्रामक रोग
वे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते, असंक्रामक रोग कहलाते हैं।
उदाहरण: उच्च रक्तचाप, मोटापा आदि।
वायरस से होने वाले सामान्य रोग
खाँसी, जुकाम, इन्फ्लुएंजा, डेंगू बुखार, एड्स आदि वायरस द्वारा उत्पन्न रोग हैं।
जीवाणुओं से होने वाले रोग
टाइफाइड बुखार, हैजा, क्षयरोग (टी.बी.), एंथ्रेक्स, मुहांसे जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न रोग हैं।
हेलिकोबैक्टर पाइलोरी से संबंधित खोज
बैरी मार्शल और रोबिन वॉरेन ने हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नामक जीवाणु के विरुद्ध प्रतिजैविक विकसित किया, जो अमाशयिक व्रण (पेट के अल्सर) का प्रमुख कारण होता है।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
कवकों (Fungi) से होने वाले रोग
विभिन्न प्रकार के त्वचा रोग जैसे – डर्मेटाइटिस, दाद तथा भोजन विषाक्तता कवकों द्वारा उत्पन्न रोग हैं।
प्रोटोजोआ से होने वाले रोग
प्रोटोजोआ द्वारा उत्पन्न प्रमुख रोग –
- मलेरिया – प्लाज्मोडियम द्वारा
- पेचिश – एंटअमीबा द्वारा
- कालाजार – लेश्मानिया द्वारा
- निद्रा रोग – ट्रिपैनोसोमा द्वारा
कृमियों से होने वाले रोग
गोल कृमि (एस्केरिस), हुकवर्म, पिनवर्म, फीताकृमि तथा फील पाँव उत्पन्न करने वाले कृमि कृमिजन्य रोगों के कारक हैं।
प्रतिजैविक (Antibiotics)
वे रासायनिक पदार्थ जो कुछ सूक्ष्मजीवों द्वारा निर्मित किए जाते हैं और जिनकी क्रिया से अन्य सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, प्रतिजैविक कहलाते हैं।
उदाहरण: पेनिसिलिन, टेट्रासाइक्लिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन।
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
टीकाकरण (Vaccination)
टीकाकरण वह प्रक्रिया है जिसमें जीवित या मृत रोगकारक सूक्ष्मजीवों से बने पदार्थ शरीर में प्रवेश कराए जाते हैं, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ जाती है।
Full Forms
AIDS: Acquired ImmunoDeficiency Syndrome
HIV: Human Immuno Virus
STD: Sexually Transmitted Diseases
Class 9 Biology Chapter 4 Notes in Hindi
निष्कर्ष (Conclusion)
यदि आपको कक्षा 9वीं जीवविज्ञान – अध्याय: मानव स्वास्थ्य एवं रोग (Human Health and Diseases) के ये नोट्स सरल, स्पष्ट और परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी लगे हों, तो ऐसे ही भरोसेमंद और आसान भाषा में तैयार किए गए विज्ञान नोट्स के लिए हमारी वेबसाइट StudyNumberOne.co.in पर अवश्य विज़िट करें और उसे फॉलो करें।
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