Class 10th Chemistry Chapter 3 Notes in Hindi | धातु तथा अधातु (Metals and Non-Metals) Free PDF Notes Download

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By Neeraj Kumar
Published On: June 17, 2026
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Class 10th Chemistry Chapter 3 Notes in Hindi – धातु तथा अधातु (Metals and Non-Metals) के इस पोस्ट में हम आपको NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित, सरल, स्पष्ट और परीक्षा-उपयोगी संपूर्ण नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं।

यह नोट्स विशेष रूप से CBSE, Bihar Board, UP Board तथा अन्य राज्य बोर्डों के हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि वे इस अध्याय के प्रत्येक सिद्धांत को आसानी से समझ सकें और बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर सकें।

इस अध्याय में धातुओं तथा अधातुओं के Physical Properties और Chemical Properties को विस्तार से समझाया गया है। साथ ही Malleability, Ductility, Metallic Lustre, Conductivity, Reactivity Series, Amphoteric Oxides, Corrosion, Rust, Galvanization, Alloys, Metallurgy तथा अयस्कों से धातुओं के निष्कर्षण जैसी सभी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

प्रत्येक विषय को परिभाषा, उदाहरण, रासायनिक समीकरण, मुख्य बिंदुओं तथा बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी बिना किसी कठिनाई के पूरे अध्याय को याद कर सकें।

यदि आप Class 10th Chemistry Chapter 3 – धातु तथा अधातु (Metals and Non-Metals) को आसान भाषा में समझना चाहते हैं और बोर्ड परीक्षा की बेहतर तैयारी करना चाहते हैं, तो यह Free Hindi Notes आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

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Table of Contents

Class 10th Chemistry Chapter 3 Notes in Hindi

Class 10th Chemistry Chapter 3 Notes in Hindi
Class 10th Chemistry Chapter 3 Notes in Hindi

तत्व (Element)

पदार्थ का वह शुद्ध रूप जिसे किसी भी भौतिक अथवा रासायनिक विधि द्वारा दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता, उसे तत्व (Element) कहते हैं। प्रत्येक तत्व केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना होता है और उसके सभी परमाणुओं के रासायनिक गुण समान होते हैं।

उदाहरण: हाइड्रोजन (H), ऑक्सीजन (O), लोहा (Fe), मैग्नीशियम (Mg), ताँबा (Cu) आदि।

वर्तमान समय में 118 तत्व ज्ञात हैं। इनमें से अधिकांश तत्व प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं, जबकि कुछ तत्व वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोगशालाओं में कृत्रिम रूप से बनाए गए हैं। आवर्त सारणी में अधिकांश तत्व धातु (Metals) हैं, कुछ अधातु (Non-Metals) तथा कुछ उपधातु (Metalloids) हैं। सामान्यतः धातुएँ आवर्त सारणी के बाईं ओर, अधातुएँ दाईं ओर तथा अक्रिय गैसें सबसे दाहिनी ओर स्थित होती हैं।

तत्वों का वर्गीकरण

1. धातु (Metals)

वे तत्व जो सामान्यतः ऊष्मा तथा विद्युत के अच्छे चालक होते हैं, धातु कहलाते हैं। इनमें धातुई चमक, तन्यता तथा अघातवर्ध्यता जैसे विशेष गुण पाए जाते हैं। अधिकांश धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस अवस्था में होती हैं और इनका उपयोग मशीनों, वाहनों, विद्युत उपकरणों तथा निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

उदाहरण: लोहा (Fe), एल्युमिनियम (Al), ताँबा (Cu), सोना (Au), चाँदी (Ag) आदि।

2. अधातु (Non-Metals)

वे तत्व जिनमें धातुओं जैसे गुण नहीं पाए जाते, अधातु कहलाते हैं। अधिकांश अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं। इनमें तन्यता तथा अघातवर्ध्यता नहीं होती और सामान्यतः ये भंगुर होती हैं।

उदाहरण: कार्बन (C), सल्फर (S), फॉस्फोरस (P), ब्रोमीन (Br), ऑक्सीजन (O) आदि।

3. उपधातु (Metalloids)

वे तत्व जिनमें धातुओं तथा अधातुओं दोनों के गुण पाए जाते हैं, उपधातु कहलाते हैं। ये कुछ परिस्थितियों में धातु की तरह तथा कुछ परिस्थितियों में अधातु की तरह व्यवहार करते हैं।

उदाहरण: बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge), आर्सेनिक (As), एंटीमनी (Sb) तथा टेल्यूरियम (Te)।

धातु और अधातु के भौतिक गुणों में अंतर

गुणधर्मधातु (Metals)अधातु (Non-Metals)
चमकसामान्यतः चमकदारसामान्यतः चमकहीन
अवस्थाअधिकांश ठोसठोस, द्रव या गैस
अघातवर्ध्यताहथौड़े से पीटकर चादर बनाई जा सकती हैभंगुर होती हैं
तन्यतातार के रूप में खींची जा सकती हैंतन्य नहीं होतीं
चालकताऊष्मा एवं विद्युत की अच्छी चालकसामान्यतः कुचालक
गलनांक एवं क्वथनांकसामान्यतः अधिकसामान्यतः कम

अपवाद (Exceptions)

  • Graphite एक अधातु है, फिर भी यह विद्युत का अच्छा चालक होता है।
  • Iodine एक अधातु है, फिर भी इसकी सतह पर धातुओं जैसी चमक दिखाई देती है।
  • Mercury एकमात्र धातु है जो सामान्य ताप पर द्रव अवस्था में पाई जाती है।
  • Bromine एकमात्र अधातु है जो सामान्य ताप पर द्रव अवस्था में पाई जाती है।

अघातवर्ध्यता (Malleability)

धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें हथौड़े से पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है, अघातवर्ध्यता (Malleability) कहलाता है।

सोना (Au) और चाँदी (Ag) सबसे अधिक अघातवर्ध्य धातुएँ मानी जाती हैं। सोने की अत्यंत पतली चादर बनाई जा सकती है, जिसका उपयोग आभूषणों और सजावटी कार्यों में किया जाता है। एल्युमिनियम की पतली पन्नियाँ भोजन, दवाइयों तथा चॉकलेट की पैकिंग में उपयोग की जाती हैं, जबकि चाँदी की वर्क मिठाइयों को सजाने में प्रयोग की जाती है।

तन्यता (Ductility)

धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें खींचकर पतले और लंबे तारों के रूप में बदला जा सकता है, तन्यता (Ductility) कहलाता है। यह धातुओं का एक महत्वपूर्ण भौतिक गुण है, जिसके कारण उनका उपयोग विद्युत तार, केबल, मशीनों और विभिन्न औद्योगिक उपकरणों के निर्माण में किया जाता है।

सोना (Au) सबसे अधिक तन्य धातु माना जाता है। केवल 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किलोमीटर लंबा पतला तार बनाया जा सकता है। चाँदी (Ag) भी अत्यधिक तन्य धातु है।

विद्युत तार बनाने के लिए मुख्य रूप से ताँबा (Cu) और एल्युमिनियम (Al) का उपयोग किया जाता है, क्योंकि ये अच्छे विद्युत चालक होने के साथ-साथ पर्याप्त तन्य भी होते हैं। सुरक्षा के लिए इन तारों पर PVC (Polyvinyl Chloride) या रबर की परत चढ़ाई जाती है, जिससे विद्युत धारा बाहर न निकल सके।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • सबसे अधिक तन्य धातु – सोना (Gold)
  • ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक – चाँदी (Silver)
  • विद्युत का सबसे अच्छा चालक – चाँदी (Silver)
  • सबसे हल्की धातु – लिथियम (Lithium)
  • सबसे भारी धातु – ऑस्मियम (Osmium)

धातुई चमक (Metallic Lustre)

धातुओं की सतह पर दिखाई देने वाली विशेष चमक को धातुई चमक (Metallic Lustre) कहा जाता है। यह चमक धातुओं की प्रकाश को परावर्तित करने की क्षमता के कारण उत्पन्न होती है। इसी गुण के कारण सोना, चाँदी और प्लैटिनम जैसी धातुओं का उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है।

धातुओं की चमक लंबे समय तक बनी रहती है, लेकिन कुछ धातुएँ वायु और नमी के संपर्क में आने पर अपनी चमक खो देती हैं। उदाहरण के लिए, लोहे पर जंग लग जाती है तथा ताँबे पर हरे रंग की परत बन जाती है।

धातुई ध्वनि (Metallic Sound)

जब किसी धातु पर हथौड़े से प्रहार किया जाता है, तो उससे एक विशेष प्रकार की स्पष्ट ध्वनि उत्पन्न होती है। इस गुण को धातुई ध्वनि (Sonorous Property) कहा जाता है।

इसी कारण मंदिरों की घंटियाँ, स्कूल की घंटियाँ तथा अनेक संगीत वाद्य यंत्र पीतल, काँसा या अन्य धातुओं से बनाए जाते हैं, क्योंकि इनसे स्पष्ट एवं मधुर ध्वनि प्राप्त होती है।

गलनांक एवं क्वथनांक (Melting and Boiling Point)

अधिकांश धातुओं का गलनांक (Melting Point) तथा क्वथनांक (Boiling Point) अधिक होता है। इसलिए उन्हें सामान्य तापमान पर ठोस अवस्था में पाया जाता है।

कुछ धातुएँ अपवाद भी हैं।

  • Gallium (Ga) तथा Cesium (Cs) का गलनांक बहुत कम होता है, इसलिए इन्हें हथेली पर रखने पर ये शरीर की ऊष्मा से पिघलने लगते हैं।
  • Mercury (Hg) सामान्य ताप पर द्रव अवस्था में पाई जाने वाली एकमात्र धातु है।

धातु और अधातु के रासायनिक गुणों में अंतर

धातु (Metals)

धातुएँ सामान्यतः Electropositive प्रकृति की होती हैं। ये अपने बाहरी इलेक्ट्रॉनों का त्याग करके धनायन (Cation) बनाती हैं। धातुएँ ऑक्सीजन, जल तथा अम्लों के साथ अभिक्रिया करके विभिन्न प्रकार के यौगिक बनाती हैं।

ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया

धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके सामान्यतः धातु ऑक्साइड बनाती हैं।

उदाहरण

2Mg + O₂ → 2MgO

कुछ धातु ऑक्साइड जल में घुलकर क्षार (Base) बनाते हैं।

उदाहरण

Na₂O + H₂O → 2NaOH

धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण तथा हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं।

उदाहरण

Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑

अधातु (Non-Metals)

अधातुएँ सामान्यतः Electronegative प्रकृति की होती हैं। ये इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (Anion) बनाती हैं।

अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके सामान्यतः अम्लीय ऑक्साइड बनाती हैं।

उदाहरण

C + O₂ → CO₂

इनके ऑक्साइड जल में घुलकर अम्लीय विलयन बना सकते हैं।

उदाहरण

CO₂ + H₂O → H₂CO₃

अधिकांश अधातुएँ जल के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं तथा तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न नहीं करतीं।

जल के साथ अभिक्रिया (Reaction with Water)

सभी धातुएँ जल के साथ समान प्रकार से अभिक्रिया नहीं करतीं। कुछ धातुएँ ठंडे जल के साथ अत्यधिक तीव्र अभिक्रिया करती हैं, कुछ केवल गर्म जल या भाप (Steam) के साथ अभिक्रिया करती हैं, जबकि कुछ धातुएँ जल के साथ बिल्कुल भी अभिक्रिया नहीं करतीं। धातु की क्रियाशीलता जितनी अधिक होती है, जल के साथ उसकी अभिक्रिया भी उतनी ही तीव्र होती है।

ठंडे जल के साथ अभिक्रिया

सोडियम (Na), पोटैशियम (K) तथा कैल्सियम (Ca) जैसी अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ ठंडे जल के साथ तुरंत अभिक्रिया करती हैं। इस अभिक्रिया में धातु हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनती है। सोडियम और पोटैशियम की अभिक्रिया इतनी तीव्र होती है कि उत्पन्न ऊष्मा के कारण हाइड्रोजन गैस में आग भी लग सकती है।

रासायनिक समीकरण

2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑

गर्म जल के साथ अभिक्रिया

मैग्नीशियम (Mg) ठंडे जल के साथ बहुत धीमी अभिक्रिया करता है, लेकिन गर्म जल के साथ इसकी अभिक्रिया अपेक्षाकृत तेज हो जाती है।

भाप (Steam) के साथ अभिक्रिया

मैग्नीशियम (Mg), जिंक (Zn) तथा आयरन (Fe) जैसी धातुएँ भाप के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।

रासायनिक समीकरण

Mg + H₂O (Steam) → MgO + H₂↑

Zn + H₂O (Steam) → ZnO + H₂↑

3Fe + 4H₂O (Steam) → Fe₃O₄ + 4H₂↑

जल के साथ अभिक्रिया नहीं करने वाली धातुएँ

ताँबा (Cu), चाँदी (Ag), सोना (Au) तथा प्लैटिनम (Pt) जैसी धातुएँ सामान्य परिस्थितियों में जल के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं।

उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides)

वे धातु ऑक्साइड जो अम्ल (Acid) तथा क्षार (Base) दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides) कहलाते हैं।

मुख्य उभयधर्मी ऑक्साइड हैं—

  • जिंक ऑक्साइड (ZnO)
  • एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃)

अम्ल के साथ अभिक्रिया

ZnO + 2HCl → ZnCl₂ + H₂O

क्षार के साथ अभिक्रिया

ZnO + 2NaOH → Na₂ZnO₂ + H₂O

एल्युमिनियम ऑक्साइड की अभिक्रिया

Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O

उभयधर्मी ऑक्साइडों का यह गुण उन्हें सामान्य धातु ऑक्साइडों से अलग बनाता है।

एनोडीकरण (Anodization)

एल्युमिनियम की सतह पर कृत्रिम रूप से मोटी ऑक्साइड की परत बनाने की प्रक्रिया को एनोडीकरण (Anodization) कहते हैं।

इस प्रक्रिया में एल्युमिनियम को विद्युत अपघटन की सहायता से ऑक्सीकृत किया जाता है, जिससे उसकी सतह पर एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) की मजबूत परत बन जाती है। यह परत एल्युमिनियम को संक्षारण (Corrosion) से बचाती है तथा उसकी मजबूती और चमक दोनों बढ़ा देती है।

इसी कारण रसोई के अनेक बर्तन, दरवाजों के फ्रेम तथा सजावटी एल्युमिनियम उत्पाद एनोडीकृत किए जाते हैं।

सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series)

धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम (Descending Order of Reactivity) में व्यवस्थित करने वाली सूची को सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) कहते हैं। इस श्रेणी की सहायता से यह आसानी से ज्ञात किया जा सकता है कि कौन-सी धातु अधिक क्रियाशील है और कौन-सी कम।

सक्रियता श्रेणी

K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au

अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ

  • पोटैशियम (K)
  • सोडियम (Na)
  • कैल्सियम (Ca)

ये धातुएँ ठंडे जल के साथ भी तीव्र अभिक्रिया करती हैं।

मध्यम क्रियाशील धातुएँ

  • मैग्नीशियम (Mg)
  • एल्युमिनियम (Al)
  • जिंक (Zn)
  • आयरन (Fe)

ये धातुएँ सामान्यतः भाप (Steam) या तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करती हैं।

कम क्रियाशील धातुएँ

  • कॉपर (Cu)
  • मरकरी (Hg)
  • सिल्वर (Ag)
  • गोल्ड (Au)
  • प्लैटिनम (Pt)

ये धातुएँ सामान्य परिस्थितियों में जल तथा तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं।

सोडियम को केरोसिन में डुबोकर क्यों रखा जाता है?

सोडियम (Na) अत्यंत क्रियाशील धातु है। यह वायु में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नमी के संपर्क में आते ही तुरंत अभिक्रिया करने लगता है। कई बार यह अभिक्रिया इतनी तीव्र होती है कि आग भी लग सकती है।

सोडियम केरोसिन तेल के साथ अभिक्रिया नहीं करता। इसलिए इसे वायु तथा नमी के संपर्क से बचाने के लिए हमेशा केरोसिन तेल में डुबोकर सुरक्षित रखा जाता है।

आयनिक यौगिकों का गलनांक अधिक क्यों होता है?

आयनिक यौगिक धनायनों (Cations) और ऋणायनों (Anions) से मिलकर बने होते हैं। इन आयनों के बीच बहुत अधिक वैद्युत आकर्षण बल (Electrostatic Force of Attraction) होता है।

इन मजबूत आकर्षण बलों को तोड़ने के लिए अधिक ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। यही कारण है कि आयनिक यौगिकों का Melting Point तथा Boiling Point सामान्यतः बहुत अधिक होता है।

धातुओं की प्राकृतिक अवस्थाएँ

प्राकृतिक रूप से धातुएँ मुख्यतः दो अवस्थाओं में पाई जाती हैं— मुक्त अवस्था (Free State) तथा संयुक्त अवस्था (Combined State)। किसी धातु की क्रियाशीलता के आधार पर यह निर्धारित होता है कि वह प्रकृति में किस अवस्था में मिलेगी।

1. मुक्त अवस्था (Free State)

जो धातुएँ सामान्य ताप पर वायु, जल या अन्य पदार्थों के साथ आसानी से अभिक्रिया नहीं करतीं, वे प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं। इन धातुओं की क्रियाशीलता बहुत कम होती है, इसलिए ये बिना किसी यौगिक के भी प्राकृतिक रूप से मिल जाती हैं।

उदाहरण

  • सोना (Au)
  • चाँदी (Ag)
  • प्लैटिनम (Pt)

2. संयुक्त अवस्था (Combined State)

अधिक क्रियाशील धातुएँ प्रकृति में स्वतंत्र रूप से नहीं मिलतीं। ये ऑक्सीजन, सल्फर, कार्बन या अन्य तत्वों के साथ मिलकर विभिन्न यौगिकों के रूप में पाई जाती हैं। इन्हें प्राप्त करने के लिए पहले इनके अयस्कों से धातु का निष्कर्षण किया जाता है।

उदाहरण

  • सोडियम (Na)
  • पोटैशियम (K)
  • कैल्सियम (Ca)
  • मैग्नीशियम (Mg)
  • एल्युमिनियम (Al)

जंग (Rust)

जब लोहे (Fe) को लंबे समय तक नम वायु (Moist Air) के संपर्क में रखा जाता है, तो उसकी सतह पर लाल-भूरे रंग की एक परत बन जाती है। इस परत को जंग (Rust) कहते हैं।

जंग वास्तव में हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃·xH₂O) होती है। जंग लगने से लोहे की मजबूती कम हो जाती है और धीरे-धीरे वह नष्ट होने लगता है।

संक्षारण (Corrosion)

जब कोई धातु वायु, नमी या अन्य रासायनिक पदार्थों के संपर्क में आकर धीरे-धीरे अपनी मूल अवस्था खो देती है और उसकी सतह पर अवांछित यौगिक बनने लगते हैं, तो इस प्रक्रिया को संक्षारण (Corrosion) कहते हैं।

लोहे में जंग लगना, ताँबे पर हरे रंग की परत बनना तथा चाँदी का काला पड़ जाना संक्षारण के सामान्य उदाहरण हैं।

संक्षारण के कारण धातुओं की चमक, मजबूती तथा उपयोगिता धीरे-धीरे कम हो जाती है, जिससे आर्थिक हानि भी होती है।

संक्षारण के लिए आवश्यक शर्तें

संक्षारण होने के लिए सामान्यतः निम्नलिखित परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं—

  • वायु (ऑक्सीजन) की उपस्थिति।
  • जल या नमी की उपस्थिति।
  • धातु का क्रियाशील होना।

यदि इनमें से किसी एक कारक को भी हटा दिया जाए, तो संक्षारण की गति काफी कम हो जाती है।

जंग से बचाव के उपाय

धातुओं को संक्षारण से बचाने के लिए अनेक विधियाँ अपनाई जाती हैं। इनका उद्देश्य धातु की सतह को वायु तथा नमी के सीधे संपर्क से बचाना होता है।

मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं—

  • धातु की सतह पर पेंट करना।
  • तेल या ग्रीस की परत लगाना।
  • Galvanization (जस्तीकरण) करना।
  • Chromium Plating करना।
  • मिश्रधातु (Alloy) बनाना।

इन सभी विधियों में धातु की सतह पर एक सुरक्षात्मक परत बन जाती है, जिससे धातु लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।

जस्तीकरण (Galvanization)

लोहे की सतह पर जिंक (Zn) की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को जस्तीकरण (Galvanization) कहते हैं।

जिंक की यह परत लोहे को वायु तथा नमी के संपर्क में आने से बचाती है। परिणामस्वरूप लोहे पर जंग नहीं लगती और उसकी आयु कई गुना बढ़ जाती है।

जस्तीकरण का उपयोग लोहे की पानी की टंकियों, पाइपों, छत की चादरों, बिजली के खंभों तथा अनेक निर्माण कार्यों में किया जाता है।

गैल्वेनिकृत लोहा (Galvanized Iron)

जिस लोहे पर जिंक की पतली सुरक्षात्मक परत चढ़ा दी जाती है, उसे गैल्वेनिकृत लोहा (Galvanized Iron) कहते हैं।

इस प्रकार का लोहा सामान्य लोहे की तुलना में अधिक टिकाऊ होता है तथा उस पर जंग लगने की संभावना बहुत कम रहती है।

मिश्रधातु (Alloy)

दो या दो से अधिक धातुओं अथवा एक धातु और एक अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु (Alloy) कहते हैं।

मिश्रधातुएँ बनाने का उद्देश्य धातुओं की मजबूती, कठोरता, चमक, संक्षारण प्रतिरोध तथा उपयोगिता बढ़ाना होता है। अधिकांश औद्योगिक उपकरणों में शुद्ध धातुओं की अपेक्षा मिश्रधातुओं का ही उपयोग किया जाता है।

उदाहरण

  • पीतल (Brass) = ताँबा (Cu) + जस्ता (Zn)
  • काँसा (Bronze) = ताँबा (Cu) + टिन (Sn)
  • सोल्डर (Solder) = सीसा (Pb) + टिन (Sn)
  • स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) = लोहा (Fe) + क्रोमियम (Cr) + निकेल (Ni)

अमलगम (Amalgam)

जिस मिश्रधातु में पारा (Mercury) एक प्रमुख घटक के रूप में उपस्थित होता है, उसे अमलगम (Amalgam) कहते हैं।

अमलगम का उपयोग दंत चिकित्सा (Dental Filling) तथा कुछ विशेष रासायनिक प्रक्रियाओं में किया जाता है।

खनिज (Mineral)

भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले वे पदार्थ जिनमें धातुएँ या उनके यौगिक उपस्थित होते हैं, खनिज (Mineral) कहलाते हैं। सभी खनिजों से धातु प्राप्त करना आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं होता, क्योंकि उनमें धातु की मात्रा पर्याप्त नहीं होती।

उदाहरण

  • बॉक्साइट (Bauxite)
  • हेमेटाइट (Hematite)
  • मैग्नेटाइट (Magnetite)
  • सिनेबार (Cinnabar)
  • कैलेमाइन (Calamine)

अयस्क (Ore)

वे खनिज जिनसे धातु को सरलता से तथा कम खर्च में प्राप्त किया जा सके, अयस्क (Ore) कहलाते हैं।

अर्थात प्रत्येक अयस्क एक खनिज होता है, लेकिन प्रत्येक खनिज अयस्क नहीं होता।

अयस्कों के प्रकार

1. ऑक्साइड अयस्क (Oxide Ores)

इन अयस्कों में धातु ऑक्सीजन के साथ संयुक्त अवस्था में रहती है।

उदाहरण

  • हेमेटाइट (Fe₂O₃)
  • मैग्नेटाइट (Fe₃O₄)
  • बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O)

2. सल्फाइड अयस्क (Sulphide Ores)

इन अयस्कों में धातु सल्फर के साथ संयुक्त रहती है।

उदाहरण

  • कॉपर ग्लांस (Cu₂S)
  • जिंक ब्लेंड (ZnS)
  • सिनेबार (HgS)

3. कार्बोनेट अयस्क (Carbonate Ores)

इन अयस्कों में धातु कार्बोनेट के रूप में उपस्थित रहती है।

उदाहरण

  • कैलेमाइन (ZnCO₃)
  • चुना पत्थर (CaCO₃)

4. हैलाइड अयस्क (Halide Ores)

इन अयस्कों में धातु हैलोजन तत्वों के साथ संयुक्त रहती है।

उदाहरण

  • रॉक साल्ट (NaCl)
  • फ्लोस्पार (CaF₂)

खनिज और अयस्क में अंतर

आधारखनिज (Mineral)अयस्क (Ore)
परिभाषाप्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले धातु या उनके यौगिकवे खनिज जिनसे धातु आसानी और कम खर्च में प्राप्त की जा सके
धातु की मात्राकम या अधिक हो सकती हैपर्याप्त मात्रा में होती है
उपयोगसभी खनिज धातु प्राप्त करने के लिए उपयोगी नहीं होतेसभी अयस्क धातु निष्कर्षण के लिए उपयोगी होते हैं
आर्थिक दृष्टिधातु निकालना हमेशा लाभदायक नहीं होताधातु निकालना आर्थिक रूप से लाभदायक होता है

धातुकर्म (Metallurgy)

अयस्कों से शुद्ध धातु प्राप्त करने की संपूर्ण प्रक्रिया को धातुकर्म (Metallurgy) कहते हैं।

धातुकर्म में मुख्यतः निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं—

  • अयस्क का सांद्रण (Concentration)
  • अयस्क का ऑक्साइड में परिवर्तन
  • धातु का निष्कर्षण (Extraction)
  • धातु का शोधन (Refining)

गैंग (Gangue)

अयस्क में धातु के अतिरिक्त उपस्थित अवांछित अशुद्धियों, जैसे मिट्टी, बालू, पत्थर तथा अन्य खनिजों को गैंग (Gangue) कहा जाता है।

धातु प्राप्त करने से पहले इन अशुद्धियों को अलग करना आवश्यक होता है।

सांद्रण (Concentration)

अयस्क से गैंग या अन्य अशुद्धियों को अलग करने की प्रक्रिया को सांद्रण (Concentration) कहते हैं।

अयस्क की प्रकृति के अनुसार विभिन्न विधियों द्वारा सांद्रण किया जाता है, जैसे—

  • गुरुत्व पृथक्करण विधि (Gravity Separation)
  • चुंबकीय पृथक्करण विधि (Magnetic Separation)
  • फ्रोथ फ्लोटेशन विधि (Froth Floatation)

भर्जन (Roasting)

जब सल्फाइड अयस्कों को वायु की पर्याप्त मात्रा में उनके गलनांक से कम ताप पर गर्म किया जाता है, जिससे वे ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाएँ, तो इस प्रक्रिया को भर्जन (Roasting) कहते हैं।

यह विधि मुख्यतः Sulphide Ores के लिए प्रयोग की जाती है।

निस्तापन (Calcination)

जब कार्बोनेट अथवा जलयोजित अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति या सीमित वायु में गर्म किया जाता है, जिससे वे ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाएँ, तो इस प्रक्रिया को निस्तापन (Calcination) कहते हैं।

यह विधि मुख्यतः Carbonate Ores के लिए प्रयोग की जाती है।

भर्जन और निस्तापन में अंतर

आधारभर्जन (Roasting)निस्तापन (Calcination)
वायुपर्याप्त वायु की उपस्थिति मेंवायु की अनुपस्थिति या सीमित वायु में
अयस्कसल्फाइड अयस्ककार्बोनेट अयस्क
परिवर्तनऑक्सीकरण द्वारा ऑक्साइड बनता हैCO₂ या जल निकलकर ऑक्साइड बनता है

गालक (Flux)

वह पदार्थ जो अयस्क में उपस्थित गैंग (Gangue) के साथ अभिक्रिया करके एक आसानी से अलग होने वाला पदार्थ बनाता है, गालक (Flux) कहलाता है।

गालक + गैंग → स्लैग (Slag)

स्लैग हल्का होता है, इसलिए इसे आसानी से अलग किया जा सकता है।

प्रगलन (Smelting)

धातु ऑक्साइड को कोक (Coke) या अन्य अवकरणकारी पदार्थों के साथ उच्च ताप पर गर्म करके धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को प्रगलन (Smelting) कहते हैं।

यह प्रक्रिया सामान्यतः Blast Furnace या अन्य विशेष भट्टियों में की जाती है।

प्रमुख धातुएँ एवं उनके अयस्क

धातुप्रमुख अयस्क
लोहा (Fe)हेमेटाइट (Fe₂O₃), मैग्नेटाइट (Fe₃O₄)
ताँबा (Cu)कॉपर ग्लांस (Cu₂S), कॉपर पाइराइट्स (CuFeS₂)
जस्ता (Zn)जिंक ब्लेंड (ZnS), कैलेमाइन (ZnCO₃)
एल्युमिनियम (Al)बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O)
पारा (Hg)सिनेबार (HgS)
मैंगनीज (Mn)पाइरोलुसाइट (MnO₂)

ताँबा (Copper) का अयस्क एवं निष्कर्षण

ताँबा (Cu) एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु है जिसका उपयोग विद्युत तार, मोटर, मशीनों तथा विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में किया जाता है।

प्रमुख अयस्क

  • कॉपर ग्लांस (Cu₂S)
  • कॉपर पाइराइट्स (CuFeS₂)

कॉपर ग्लांस (Cu₂S) से ताँबा प्राप्त करने के लिए पहले उसका Roasting किया जाता है, जिससे वह आंशिक रूप से कॉपर ऑक्साइड (Cu₂O) में परिवर्तित हो जाता है।

रासायनिक अभिक्रिया

2Cu₂S + 3O₂ → 2Cu₂O + 2SO₂

इसके बाद शेष कॉपर सल्फाइड तथा कॉपर ऑक्साइड आपस में अभिक्रिया करके शुद्ध ताँबा प्रदान करते हैं।

रासायनिक अभिक्रिया

2Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂

लोहा (Iron) का अयस्क एवं निष्कर्षण

लोहा (Fe) सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली धातुओं में से एक है। इसका उपयोग भवन निर्माण, मशीनों, वाहनों, रेल की पटरियों तथा अनेक औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।

प्रमुख अयस्क

  • हेमेटाइट (Fe₂O₃)
  • मैग्नेटाइट (Fe₃O₄)

लोहे का निष्कर्षण मुख्यतः Blast Furnace में किया जाता है। सबसे पहले अयस्क का सांद्रण किया जाता है। इसके बाद उसे कोक (Coke) तथा चूना पत्थर (Limestone) के साथ उच्च ताप पर गर्म किया जाता है। कार्बन, आयरन ऑक्साइड का अपचयन करके शुद्ध लोहा प्राप्त करता है।

जस्ता (Zinc) का अयस्क एवं निष्कर्षण

जस्ता (Zn) का उपयोग लोहे को जंग से बचाने, मिश्रधातु बनाने तथा बैटरियों के निर्माण में किया जाता है।

प्रमुख अयस्क

  • जिंक ब्लेंड (ZnS)
  • कैलेमाइन (ZnCO₃)

जिंक ब्लेंड (ZnS) को पहले Roasting द्वारा जिंक ऑक्साइड (ZnO) में बदला जाता है।

कैलेमाइन (ZnCO₃) को Calcination द्वारा जिंक ऑक्साइड (ZnO) में परिवर्तित किया जाता है।

इसके बाद जिंक ऑक्साइड का कार्बन द्वारा अपचयन करके जस्ता धातु प्राप्त की जाती है।

एल्युमिनियम (Aluminium) का अयस्क एवं निष्कर्षण

एल्युमिनियम (Al) एक हल्की, मजबूत तथा संक्षारण-रोधी धातु है। इसका उपयोग हवाई जहाज, विद्युत तार, रसोई के बर्तन तथा अनेक औद्योगिक उपकरणों के निर्माण में किया जाता है।

प्रमुख अयस्क

  • बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O)

बॉक्साइट से एल्युमिनियम प्राप्त करने के लिए पहले शुद्ध एल्युमिना (Al₂O₃) तैयार किया जाता है। इसके बाद Hall-Heroult Process द्वारा विद्युत अपघटन (Electrolysis) करके शुद्ध एल्युमिनियम धातु प्राप्त की जाती है।

यह विधि एल्युमिनियम के औद्योगिक उत्पादन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

आशा है कि Class 10th Chemistry Chapter 3 Notes in Hindi – धातु तथा अधातु (Metals and Non-Metals) के ये नोट्स आपकी परीक्षा की तैयारी में उपयोगी सिद्ध होंगे। इन नोट्स में अध्याय के सभी महत्वपूर्ण विषयों को NCERT के अनुसार सरल भाषा, सही तथ्यों तथा परीक्षा-उपयोगी शैली में प्रस्तुत किया गया है, जिससे आप प्रत्येक अवधारणा को आसानी से समझ सकें।

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