Class 10th Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi | अम्ल, क्षारक एवं लवण (Acid, Base and Salt) Free PDF Notes Download

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By Neeraj Kumar
Published On: June 17, 2026
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Class 10th Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi – अम्ल, क्षारक एवं लवण (Acid, Base And Salt) के इस अध्याय में हम NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित सरल, स्पष्ट तथा बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण नोट्स पढ़ेंगे। इन नोट्स को इस प्रकार तैयार किया गया है कि CBSE, Bihar Board, UP Board तथा अन्य राज्य बोर्डों के हिंदी माध्यम के विद्यार्थी प्रत्येक विषय को आसानी से समझ सकें और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें।

इस अध्याय में Acid, Base तथा Salt से संबंधित सभी महत्वपूर्ण विषयों का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा। साथ ही Indicators, pH Scale, Neutralization Reaction, Acid Rain, Chlor-Alkali Process, Bleaching Powder, Baking Soda, Washing Soda, Plaster Of Paris तथा अन्य महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिकों को भी सरल भाषा में समझाया गया है।

सभी विषयों को परिभाषा, रासायनिक समीकरण, उदाहरण तथा मुख्य बिंदुओं के माध्यम से इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि विद्यार्थी इन्हें आसानी से समझ सकें और परीक्षा के समय बिना किसी कठिनाई के याद रख सकें।

यदि आप Class 10th Chemistry Chapter 2 – Acid, Base And Salt को बिल्कुल आसान भाषा में समझना चाहते हैं, तो ये नोट्स आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

Table of Contents

Class 10th Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi

Class 10th Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi
Class 10th Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi

अम्ल (Acid)

जो पदार्थ जल में घुलने पर Hydrogen Ion (H⁺) उत्पन्न करते हैं, उन्हें अम्ल (Acid) कहा जाता है। अम्लों में हाइड्रोजन उपस्थित होता है और जलीय विलयन में यही हाइड्रोजन आयन उनके अम्लीय गुणों के लिए उत्तरदायी होता है।

उदाहरण

HCl → H⁺ + Cl⁻

जब Hydrochloric Acid (HCl) जल में घुलता है, तब यह Hydrogen Ion (H⁺) तथा Chloride Ion (Cl⁻) में टूट जाता है।

प्राकृतिक जीवन में भी अनेक अम्ल पाए जाते हैं। जैसे नींबू में Citric Acid, सिरके में Acetic Acid, दही में Lactic Acid तथा इमली में Tartaric Acid पाया जाता है। यही कारण है कि इन पदार्थों का स्वाद खट्टा होता है।

अम्ल के गुण (Properties Of Acids)

अम्लों की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  • इनका स्वाद सामान्यतः खट्टा होता है।
  • यह नीले Litmus Paper को लाल रंग में परिवर्तित कर देते हैं।
  • अधिकांश अम्ल धातुओं के साथ अभिक्रिया करके Hydrogen Gas उत्पन्न करते हैं।
  • ये अनेक धातुओं तथा यौगिकों के साथ रासायनिक अभिक्रिया करते हैं।
  • अम्ल, क्षार के गुणों को समाप्त करके लवण तथा जल का निर्माण करते हैं।
  • प्रबल अम्ल जैसे HCl, H₂SO₄ तथा HNO₃ संक्षारक (Corrosive) होते हैं, इसलिए इन्हें सावधानीपूर्वक प्रयोग किया जाता है।

क्षारक (Base)

जो पदार्थ जल में घुलने पर Hydroxide Ion (OH⁻) उत्पन्न करते हैं, उन्हें क्षारक (Base) कहा जाता है। क्षारकों का जलीय विलयन सामान्यतः क्षारीय प्रकृति का होता है।

उदाहरण

NaOH → Na⁺ + OH⁻

जब Sodium Hydroxide (NaOH) जल में घुलता है, तब यह Sodium Ion (Na⁺) तथा Hydroxide Ion (OH⁻) प्रदान करता है।

सभी क्षार पानी में नहीं घुलते, लेकिन जो क्षार पानी में घुलकर क्षारीय विलयन बनाते हैं, उन्हें Alkali कहा जाता है। उदाहरण के लिए Sodium Hydroxide (NaOH), Potassium Hydroxide (KOH) तथा Calcium Hydroxide [Ca(OH)₂] प्रमुख Alkali हैं।

क्षारक के गुण (Properties Of Bases)

क्षारकों में निम्नलिखित प्रमुख गुण पाए जाते हैं—

  • इनका स्वाद कड़वा या तीखा होता है।
  • यह लाल Litmus Paper को नीला कर देते हैं।
  • स्पर्श करने पर इनका विलयन साबुन जैसा चिकना या फिसलनदार महसूस होता है।
  • ये अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं।
  • इनका जलीय विलयन Hydroxide Ion (OH⁻) प्रदान करता है।

विभिन्न पदार्थों में पाए जाने वाले अम्ल

दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली अनेक वस्तुओं में प्राकृतिक रूप से अलग-अलग प्रकार के अम्ल पाए जाते हैं। परीक्षा में इनसे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें याद रखना आवश्यक है।

पदार्थउपस्थित अम्ल
नींबू एवं संतराCitric Acid
सेव (सेब)Malic Acid
इमलीTartaric Acid
सिरकाAcetic Acid
दहीLactic Acid
टमाटरOxalic Acid
अमाशय रसHydrochloric Acid (HCl)
चायTannic Acid
विटामिन CAscorbic Acid
लाल चींटीMethanoic (Formic) Acid
मूत्रUric Acid
हरे अंगूरTartaric Acid

सूचक (Indicator)

ऐसे पदार्थ जो किसी विलयन के अम्लीय, क्षारीय अथवा उदासीन होने की पहचान अपने रंग, गंध या अन्य परिवर्तन के माध्यम से कराते हैं, उन्हें सूचक (Indicator) कहा जाता है। रसायन विज्ञान में सूचकों का विशेष महत्व है क्योंकि इनके माध्यम से यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि कोई विलयन Acidic है या Basic

उदाहरण के लिए, यदि किसी अज्ञात विलयन में Litmus डालने पर उसका रंग बदल जाता है, तो हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि वह विलयन अम्लीय है या क्षारीय।

सूचक के प्रकार (Types Of Indicators)

रसायन विज्ञान में मुख्य रूप से तीन प्रकार के सूचक प्रयोग किए जाते हैं—

1. प्राकृतिक सूचक (Natural Indicators)

जो सूचक प्राकृतिक स्रोतों अर्थात पौधों एवं जीवों से प्राप्त होते हैं, उन्हें Natural Indicators कहा जाता है।

सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक सूचक Litmus है, जो लाइकेन नामक पौधे से प्राप्त किया जाता है।

उदाहरण

Litmus

  • अम्ल में लाल रंग का हो जाता है।
  • क्षार में नीला रंग का हो जाता है।

Turmeric (हल्दी)

  • अम्लीय विलयन में पीली रहती है।
  • क्षारीय विलयन में लाल-भूरी हो जाती है।

2. कृत्रिम सूचक (Artificial Indicators)

जो सूचक प्रयोगशालाओं में रासायनिक विधियों द्वारा तैयार किए जाते हैं, उन्हें Artificial Indicators कहा जाता है।

ये सूचक अम्ल एवं क्षार की पहचान अधिक स्पष्ट रूप से करते हैं और प्रयोगशालाओं में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।

Methyl Orange

  • अम्लीय विलयन में लाल रंग दिखाता है।
  • क्षारीय विलयन में पीला रंग दिखाता है।

Phenolphthalein

  • अम्लीय विलयन में रंगहीन रहता है।
  • क्षारीय विलयन में गुलाबी रंग प्रदर्शित करता है।

3. गंधीय सूचक (Olfactory Indicators)

वे सूचक जिनकी गंध अम्लीय अथवा क्षारीय माध्यम में बदल जाती है, उन्हें Olfactory Indicators कहा जाता है।

उदाहरण

प्याज का रस

  • अम्लीय विलयन में इसकी तीक्ष्ण गंध बनी रहती है।
  • क्षारीय विलयन में इसकी गंध समाप्त हो जाती है।

Vanilla Essence तथा Clove Oil भी गंधीय सूचकों के उदाहरण हैं।

लिटमस (Litmus)

Litmus एक बैंगनी रंग का प्राकृतिक रंजक है जो Lichen नामक जीव से प्राप्त किया जाता है। यह सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला सूचक है और विद्यालयी प्रयोगशालाओं में अम्ल एवं क्षार की पहचान के लिए प्रयोग किया जाता है।

जब Litmus किसी अम्लीय विलयन के संपर्क में आता है, तो इसका रंग लाल हो जाता है। वहीं क्षारीय विलयन के संपर्क में आने पर यह नीला रंग प्रदर्शित करता है।

इसी गुण के कारण Litmus Paper को अम्ल एवं क्षार की पहचान का सबसे सरल माध्यम माना जाता है।

अम्ल के प्रकार (Types Of Acids)

संरचना के आधार पर अम्लों को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जाता है—

ऑक्सी अम्ल (Oxy Acids)

वे अम्ल जिनके अणुओं में हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन दोनों उपस्थित होते हैं, उन्हें Oxy Acids कहा जाता है।

उदाहरण

  • Nitric Acid (HNO₃)
  • Nitrous Acid (HNO₂)
  • Sulphuric Acid (H₂SO₄)

इन अम्लों में ऑक्सीजन उपस्थित रहती है, इसलिए इन्हें ऑक्सी अम्ल कहा जाता है।

Sulphuric Acid (H₂SO₄) को सामान्यतः “King Of Acids” अर्थात अम्लों का राजा कहा जाता है क्योंकि उद्योगों में इसका उपयोग सबसे अधिक किया जाता है।

हाइड्रा अम्ल (Hydra Acids)

वे अम्ल जिनमें ऑक्सीजन उपस्थित नहीं होती तथा जो मुख्य रूप से हाइड्रोजन और किसी अन्य तत्व से मिलकर बने होते हैं, उन्हें Hydra Acids कहा जाता है।

उदाहरण

  • Hydrochloric Acid (HCl)
  • Hydrobromic Acid (HBr)
  • Hydroiodic Acid (HI)

अम्ल की शक्तियाँ (Strength Of Acids)

सभी अम्ल समान शक्ति के नहीं होते। कुछ अम्ल जल में पूर्ण रूप से आयनित हो जाते हैं जबकि कुछ केवल आंशिक रूप से आयनित होते हैं। इसी आधार पर इन्हें दो वर्गों में बाँटा जाता है।

प्रबल अम्ल (Strong Acids)

वे अम्ल जो जल में घुलकर लगभग पूर्ण रूप से आयनित हो जाते हैं और अधिक मात्रा में Hydrogen Ion (H⁺) प्रदान करते हैं, Strong Acids कहलाते हैं।

उदाहरण

  • Hydrochloric Acid (HCl)
  • Nitric Acid (HNO₃)
  • Sulphuric Acid (H₂SO₄)

इन अम्लों की क्रियाशीलता अधिक होती है तथा ये अत्यधिक संक्षारक भी हो सकते हैं।

दुर्बल अम्ल (Weak Acids)

वे अम्ल जो जल में घुलकर केवल आंशिक रूप से आयनित होते हैं, Weak Acids कहलाते हैं।

उदाहरण

  • Acetic Acid (CH₃COOH)
  • Carbonic Acid (H₂CO₃)
  • Citric Acid

इन अम्लों की अम्लीय शक्ति अपेक्षाकृत कम होती है।

सांद्र अम्ल (Concentrated Acid)

जिस अम्ल में अम्ल की मात्रा अधिक तथा जल की मात्रा कम होती है, उसे Concentrated Acid कहा जाता है।

तनु अम्ल (Dilute Acid)

जिस अम्ल में जल की मात्रा अधिक तथा अम्ल की मात्रा कम होती है, उसे Dilute Acid कहा जाता है।

ध्यान दें कि Strong Acid और Concentrated Acid दोनों अलग-अलग अवधारणाएँ हैं। कोई अम्ल प्रबल भी हो सकता है और तनु भी, तथा कोई दुर्बल अम्ल सांद्र भी हो सकता है।

अम्ल के रासायनिक गुण (Chemical Properties Of Acids)

अम्ल कई प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाएँ करते हैं। बोर्ड परीक्षाओं में इन अभिक्रियाओं से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

अम्ल तथा धातु की अभिक्रिया

जब अम्ल किसी धातु के साथ अभिक्रिया करता है, तो लवण तथा Hydrogen Gas का निर्माण होता है।

सामान्य समीकरण

Acid + Metal → Salt + Hydrogen Gas

उदाहरण

Zn + H₂SO₄ → ZnSO₄ + H₂↑

इस अभिक्रिया में जिंक तथा सल्फ्यूरिक अम्ल की अभिक्रिया से जिंक सल्फेट तथा हाइड्रोजन गैस बनती है।

अम्ल तथा धातु कार्बोनेट की अभिक्रिया

जब अम्ल किसी Metal Carbonate के साथ अभिक्रिया करता है, तो लवण, जल तथा Carbon Dioxide Gas बनती है।

सामान्य समीकरण

Acid + Metal Carbonate → Salt + Water + Carbon Dioxide

उदाहरण

CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂↑

अम्ल तथा धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट की अभिक्रिया

जब अम्ल किसी Metal Hydrogen Carbonate के साथ अभिक्रिया करता है, तब भी लवण, जल तथा Carbon Dioxide Gas प्राप्त होती है।

उदाहरण

NaHCO₃ + HCl → NaCl + H₂O + CO₂↑

अम्ल के उपयोग (Uses Of Acids)

अम्ल केवल प्रयोगशालाओं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन, उद्योगों तथा चिकित्सा के क्षेत्र में भी इनका व्यापक उपयोग होता है। कुछ अम्ल प्राकृतिक रूप से फलों और खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं, जबकि कुछ का निर्माण उद्योगों में किया जाता है।

अम्लों के प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं—

  • भोजन के पाचन में Hydrochloric Acid (HCl) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • अचार, जैली, मुरब्बा तथा विभिन्न खाद्य पदार्थों के निर्माण में कई प्राकृतिक अम्लों का उपयोग किया जाता है।
  • सोना, चाँदी तथा अन्य धातुओं के आभूषणों और बर्तनों की सफाई में कुछ अम्ल प्रयोग किए जाते हैं।
  • उर्वरक, रंग, औषधियाँ तथा अन्य रासायनिक पदार्थों के निर्माण में विभिन्न अम्लों का उपयोग होता है।
  • प्रयोगशालाओं में अनेक रासायनिक परीक्षणों के लिए भी अम्ल आवश्यक होते हैं।

क्षारक के उपयोग (Uses Of Bases)

क्षारकों का उपयोग भी दैनिक जीवन तथा उद्योगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। अनेक ऐसे कार्य हैं जिनमें क्षारकों के बिना उत्पादन संभव नहीं है।

क्षारकों के प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं—

  • मकानों की सफेदी (पुताई) में Calcium Hydroxide का उपयोग किया जाता है।
  • कठोर जल को मृदु बनाने में क्षारकों का प्रयोग किया जाता है।
  • जल को शुद्ध करने तथा कुछ हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में इनका उपयोग होता है।
  • अम्लीय मिट्टी की अम्लता को कम करने के लिए क्षारकों का प्रयोग किया जाता है।
  • साबुन, डिटर्जेंट, कागज़ तथा अनेक रासायनिक उद्योगों में इनका व्यापक उपयोग होता है।

pH स्केल (pH Scale)

pH Scale एक ऐसा वैज्ञानिक पैमाना है जिसके द्वारा किसी विलयन की अम्लीयता (Acidity) या क्षारीयता (Basicity) ज्ञात की जाती है। pH का अर्थ Power Of Hydrogen होता है।

इस स्केल का मान 0 से 14 के बीच होता है।

इसका निर्माण सन् 1909 में डेनमार्क के वैज्ञानिक S. P. L. Sorensen ने किया था।

pH Scale के आधार पर किसी भी विलयन को तीन भागों में बाँटा जाता है—

  • pH = 7 → उदासीन (Neutral) विलयन
  • pH < 7 → अम्लीय (Acidic) विलयन
  • pH > 7 → क्षारीय (Basic) विलयन

अर्थात किसी विलयन का pH जितना कम होगा, उसकी अम्लीयता उतनी अधिक होगी और pH जितना अधिक होगा, उसकी क्षारीयता उतनी अधिक होगी।

विभिन्न पदार्थों का pH मान (pH Value Of Common Substances)

बोर्ड परीक्षा में कई बार सामान्य पदार्थों के pH Value से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। कुछ महत्वपूर्ण मान नीचे दिए गए हैं—

विलयनpH Value
Hydrochloric Acid0.0
अम्ल पित्त1–2
नींबू का रस2.2–2.4
सिरका2.5–3.5
शराब2.8–3.8
अंगूर का रस3.5
टमाटर का रस4–4.4
मानव मूत्र5.5–7.5
अम्लीय वर्षा5–5.6
लार6.5–6.9
दूध6.5
शुद्ध जल7
मानव रक्त7.35–7.45
आँसू7.4
चूने का जल11

अम्लीय वर्षा (Acid Rain)

जब वर्षा के जल का pH Value 5.6 से कम हो जाता है, तब उसे Acid Rain कहा जाता है।

यह मुख्य रूप से वायु में उपस्थित Sulphur Dioxide (SO₂) तथा Nitrogen Oxides (NOₓ) के कारण होती है। ये गैसें वातावरण में जलवाष्प के साथ मिलकर अम्ल बनाती हैं और वर्षा के साथ पृथ्वी पर गिरती हैं।

अम्लीय वर्षा के कारण भवनों, ऐतिहासिक स्मारकों, पौधों, मिट्टी तथा जल स्रोतों को काफी नुकसान पहुँचता है। इसलिए वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।

pH का महत्व (Importance Of pH)

pH का महत्व केवल रसायन विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य तथा पर्यावरण दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

  • मानव शरीर का सामान्य pH Range लगभग 7.0 से 7.8 के बीच रहता है।
  • पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी का pH लगभग 7 से 7.6 होना उपयुक्त माना जाता है।
  • हमारे अमाशय में उपस्थित Hydrochloric Acid (HCl) भोजन के पाचन में सहायता करता है।
  • यदि शरीर का pH सामान्य सीमा से अधिक बदल जाए, तो अनेक स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

तनुकरण (Dilution)

जब किसी सांद्र अम्ल या सांद्र क्षार में जल मिलाया जाता है, तब उसके आयनों की सांद्रता प्रति इकाई आयतन में कम हो जाती है। इस प्रक्रिया को Dilution (तनुकरण) कहते हैं।

तनुकरण करते समय हमेशा यह बात याद रखनी चाहिए कि सांद्र अम्ल को धीरे-धीरे जल में मिलाया जाता है, न कि जल को अम्ल में। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि यह प्रक्रिया अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करती है। यदि जल को सीधे सांद्र अम्ल में डाल दिया जाए, तो छींटे पड़ सकते हैं और दुर्घटना होने की संभावना रहती है।

लवण (Salt)

जब कोई Acid तथा Base आपस में अभिक्रिया करते हैं, तब बनने वाले उदासीन पदार्थ को Salt (लवण) कहा जाता है।

सामान्य समीकरण

Acid + Base → Salt + Water

उदाहरण

HCl + NaOH → NaCl + H₂O

इस अभिक्रिया में Hydrochloric Acid तथा Sodium Hydroxide की अभिक्रिया से Sodium Chloride (NaCl) अर्थात साधारण नमक तथा जल का निर्माण होता है।

यह अभिक्रिया Neutralization Reaction का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है।

लवणों का वर्गीकरण (Classification Of Salts)

रसायन विज्ञान में लवणों को उनके निर्माण तथा रासायनिक गुणों के आधार पर विभिन्न भागों में बाँटा जाता है। Class 10 के इस अध्याय में मुख्य रूप से तीन प्रकार के लवणों का अध्ययन किया जाता है।

1. सामान्य लवण (Normal Salt)

वे लवण जिनमें अम्ल का कोई भी प्रतिस्थापनशील Hydrogen Ion (H⁺) शेष नहीं रहता, उन्हें सामान्य लवण (Normal Salt) कहा जाता है।

ये पूर्ण उदासीनीकरण (Complete Neutralization) के परिणामस्वरूप बनते हैं।

उदाहरण

  • NaCl (Sodium Chloride)
  • KCl (Potassium Chloride)

2. अम्लीय लवण (Acidic Salt)

जब किसी बहु-क्षारीय अम्ल के सभी Hydrogen Ion धातु द्वारा प्रतिस्थापित नहीं होते और कुछ हाइड्रोजन परमाणु शेष रह जाते हैं, तब बनने वाले लवण को अम्लीय लवण (Acidic Salt) कहते हैं।

उदाहरण

NaHSO₄ (Sodium Hydrogen Sulphate)

3. क्षारीय लवण (Basic Salt)

जब किसी क्षार के सभी Hydroxide Group (OH⁻) अम्ल द्वारा प्रतिस्थापित नहीं होते, तब बनने वाले लवण को क्षारीय लवण (Basic Salt) कहते हैं।

उदाहरण

Pb(OH)NO₃ (Basic Lead Nitrate)

लवण के परिवार (Families Of Salts)

लवण आयनिक (Ionic) यौगिक होते हैं जो धनायन (Cation) तथा ऋणायन (Anion) से मिलकर बने होते हैं। जिन लवणों में समान धनायन या समान ऋणायन पाया जाता है, उन्हें एक ही परिवार का सदस्य माना जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से कुछ प्रमुख लवण परिवार निम्नलिखित हैं—

सल्फेट परिवार (Sulphate Family)

  • Potassium Sulphate (K₂SO₄)
  • Ammonium Sulphate ((NH₄)₂SO₄)

सोडियम परिवार (Sodium Family)

  • Sodium Acetate (CH₃COONa)
  • Sodium Nitrate (NaNO₃)

पोटैशियम परिवार (Potassium Family)

  • Potassium Sulphate (K₂SO₄)
  • Potassium Sulphide (K₂S)

अमोनियम परिवार (Ammonium Family)

  • Ammonium Sulphate ((NH₄)₂SO₄)
  • Ammonium Chloride (NH₄Cl)

क्लोराइड परिवार (Chloride Family)

  • Calcium Chloride (CaCl₂)
  • Ammonium Chloride (NH₄Cl)

अमाशय रस (Gastric Juice)

हमारे पेट में उपस्थित Hydrochloric Acid (HCl) को Gastric Juice कहा जाता है। यह भोजन के पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Hydrochloric Acid भोजन में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है तथा भोजन को पचाने वाले एंजाइमों को सक्रिय करने में सहायता करता है। यदि यह अम्ल अधिक मात्रा में बनने लगे, तो अम्लता (Acidity) की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-Alkali Process)

जब Sodium Chloride (NaCl) के जलीय विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तब उसका विद्युत अपघटन (Electrolysis) होता है। इस प्रक्रिया में तीन महत्वपूर्ण पदार्थ प्राप्त होते हैं—

  • Sodium Hydroxide (NaOH)
  • Chlorine Gas (Cl₂)
  • Hydrogen Gas (H₂)

इसी प्रक्रिया को Chlor-Alkali Process कहा जाता है।

यह उद्योगों में अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है क्योंकि इससे प्राप्त तीनों पदार्थों का व्यापक औद्योगिक उपयोग होता है।

क्लोरीन के उपयोग (Uses Of Chlorine)

Chlorine Gas का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाता है।

  • पेयजल को रोगाणुरहित (Disinfect) बनाने में।
  • Bleaching Powder के निर्माण में।
  • Hydrochloric Acid (HCl) के निर्माण में।
  • कागज़ तथा कपड़ों की ब्लीचिंग (Bleaching) में।

हाइड्रोजन के उपयोग (Uses Of Hydrogen)

Hydrogen Gas उद्योगों तथा वैज्ञानिक कार्यों में अत्यंत महत्वपूर्ण गैस है।

इसके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं—

  • रॉकेट ईंधन (Rocket Fuel) के रूप में।
  • Ammonia (NH₃) के निर्माण में।
  • वनस्पति घी (Vanaspati Ghee) बनाने में।
  • अनेक रासायनिक उद्योगों में।

ब्लीचिंग पाउडर (Bleaching Powder)

Bleaching Powder का रासायनिक नाम Calcium Oxychloride (CaOCl₂) है।

इसे तैयार करने के लिए बुझे हुए चूने [Ca(OH)₂] पर लगभग 313 K तापमान पर Chlorine Gas प्रवाहित की जाती है।

रासायनिक अभिक्रिया

Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O

ब्लीचिंग पाउडर के गुण (Properties Of Bleaching Powder)

  • यह हल्के पीले-सफेद रंग का चूर्ण होता है।
  • यह एक अस्थिर (Unstable) यौगिक है।
  • वायु के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे क्लोरीन गैस छोड़ता है।

ब्लीचिंग पाउडर के उपयोग (Uses Of Bleaching Powder)

  • पेयजल को रोगाणुरहित बनाने में।
  • कागज़ एवं वस्त्र उद्योग में ब्लीचिंग के लिए।
  • कीटाणुनाशक (Disinfectant) के रूप में।
  • विभिन्न रासायनिक पदार्थों के निर्माण में।

बेकिंग सोडा (Baking Soda)

Baking Soda का रासायनिक नाम Sodium Bicarbonate (NaHCO₃) है।

इसे Solvay Process द्वारा तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में Sodium Chloride, Ammonia तथा Carbon Dioxide की सहायता से Sodium Bicarbonate प्राप्त किया जाता है।

बेकिंग सोडा के गुण (Properties Of Baking Soda)

  • यह सफेद रंग का महीन ठोस पदार्थ होता है।
  • यह जल में थोड़ा घुलनशील होता है।
  • इसका जलीय विलयन क्षारीय होता है।
  • इसका pH Value सात से अधिक होता है।

बेकिंग सोडा के उपयोग (Uses Of Baking Soda)

  • अम्लता (Acidity) दूर करने वाली औषधियों में।
  • Baking Powder के निर्माण में।
  • प्रयोगशालाओं में Neutralizing Agent के रूप में।
  • शीतल पेय तथा अन्य खाद्य पदार्थों में Carbon Dioxide उत्पन्न करने के लिए।

धोने का सोडा (Washing Soda)

Washing Soda का रासायनिक नाम Sodium Carbonate Decahydrate (Na₂CO₃·10H₂O) है। यह एक महत्वपूर्ण क्षारीय यौगिक है जिसका उपयोग घरेलू कार्यों से लेकर बड़े-बड़े उद्योगों तक किया जाता है।

इसे बनाने के लिए सबसे पहले Baking Soda (NaHCO₃) को गर्म किया जाता है, जिससे Sodium Carbonate (Na₂CO₃) प्राप्त होता है। इसके बाद इसमें जल के अणुओं को मिलाकर स्फटिकीकृत किया जाता है, जिससे Washing Soda तैयार होता है।

धोने के सोडे के गुण (Properties Of Washing Soda)

  • यह सफेद रंग का पारदर्शी रवादार ठोस पदार्थ होता है।
  • यह जल में आसानी से घुल जाता है।
  • इसका जलीय विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है।
  • इसमें क्रिस्टलन का जल (Water Of Crystallization) उपस्थित होता है।

धोने के सोडे के उपयोग (Uses Of Washing Soda)

Washing Soda का उपयोग अनेक कार्यों में किया जाता है—

  • कठोर जल को मृदु (Soft) बनाने में।
  • घरों की सफाई में।
  • काँच, साबुन तथा कागज़ उद्योगों में।
  • पेट्रोलियम शोधन (Petroleum Refining) में।

क्रिस्टलन का जल (Water Of Crystallization)

किसी लवण की एक सूत्र इकाई (Formula Unit) में उपस्थित जल के निश्चित अणुओं की संख्या को Water Of Crystallization कहा जाता है।

यह जल केवल लवण के साथ जुड़ा रहता है और उसके क्रिस्टलीय स्वरूप को बनाए रखने में सहायता करता है।

उदाहरण

CuSO₄·5H₂O

कॉपर सल्फेट (Copper Sulphate) के एक अणु के साथ पाँच जल अणु जुड़े रहते हैं। यही पाँच जल अणु इसका Water Of Crystallization कहलाते हैं।

इसी प्रकार—

Na₂CO₃·10H₂O

में दस जल अणु उपस्थित रहते हैं।

प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster Of Paris)

Plaster Of Paris का रासायनिक नाम Calcium Sulphate Hemihydrate (CaSO₄·½H₂O) है।

इसे जिप्सम (Gypsum) को लगभग 373 K तापमान पर गर्म करके बनाया जाता है। गर्म करने पर जिप्सम अपने जल का एक भाग छोड़ देता है और Plaster Of Paris में परिवर्तित हो जाता है।

रासायनिक अभिक्रिया

CaSO₄·2H₂O → CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O

प्लास्टर ऑफ पेरिस के गुण (Properties Of Plaster Of Paris)

  • यह सफेद रंग का महीन चूर्ण होता है।
  • जल के संपर्क में आने पर शीघ्र ही पुनः जिप्सम में परिवर्तित हो जाता है।
  • यह जल्दी कठोर हो जाता है, इसलिए ढलाई के कार्यों में उपयोगी होता है।

प्लास्टर ऑफ पेरिस के उपयोग (Uses Of Plaster Of Paris)

Plaster Of Paris का उपयोग अनेक महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है—

  • टूटी हुई हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने में।
  • मूर्तियाँ, खिलौने तथा सजावटी वस्तुएँ बनाने में।
  • दरवाजों एवं खिड़कियों के छेद भरने में।
  • अग्निरोधी सामग्री तथा चिकनी दीवारें तैयार करने में।

महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions)

पीतल तथा ताँबे के बर्तनों में दही या खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए?

दही तथा अन्य खट्टे पदार्थों में विभिन्न प्रकार के Acids उपस्थित होते हैं। ये अम्ल ताँबे अथवा पीतल के साथ अभिक्रिया करके हानिकारक लवण बना देते हैं।

इस कारण भोजन दूषित हो सकता है तथा बर्तन भी संक्षारित (Corroded) होने लगते हैं। इसलिए ऐसे बर्तनों में खट्टे पदार्थ नहीं रखने चाहिए।

शुष्क Hydrochloric Acid गैस Litmus Paper का रंग क्यों नहीं बदलती?

शुष्क Hydrochloric Acid (HCl) गैस में Hydrogen Ion (H⁺) मुक्त अवस्था में उपस्थित नहीं होते।

चूँकि अम्लीय गुण केवल जलीय विलयन में उत्पन्न Hydrogen Ion के कारण दिखाई देते हैं, इसलिए शुष्क HCl गैस Litmus Paper का रंग नहीं बदलती।

साधारण नमक खुला छोड़ने पर पसीज क्यों जाता है?

साधारण नमक में थोड़ी मात्रा में Magnesium Chloride (MgCl₂) अशुद्धि के रूप में उपस्थित रहता है।

Magnesium Chloride वायु से नमी को अवशोषित कर लेता है। इसी कारण खुला छोड़ा गया नमक धीरे-धीरे गीला या पसीजा हुआ दिखाई देने लगता है।

FAQs – Class 10th Chemistry Chapter 2 Notes in Hindi

Acid क्या होता है?

जो पदार्थ जल में घुलकर Hydrogen Ion (H⁺) उत्पन्न करते हैं, उन्हें Acid कहा जाता है।

Base किसे कहते हैं?

जो पदार्थ जल में घुलने पर Hydroxide Ion (OH⁻) प्रदान करते हैं, उन्हें Base कहते हैं।

pH Scale का सामान्य मान कितना होता है?

pH Scale का मान 0 से 14 तक होता है। 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय तथा 7 से अधिक क्षारीय विलयन को दर्शाता है।

Plaster Of Paris का रासायनिक नाम क्या है?

Plaster Of Paris का रासायनिक नाम Calcium Sulphate Hemihydrate (CaSO₄·½H₂O) है।

Baking Soda का रासायनिक नाम क्या है?

Baking Soda का रासायनिक नाम Sodium Bicarbonate (NaHCO₃) है।

निष्कर्ष (Conclusion)

दोस्तों, इस अध्याय में आपने Class 10th Chemistry Chapter 2 – Acid, Base And Salt के सभी महत्वपूर्ण विषयों का सरल भाषा में अध्ययन किया। आपने Acid, Base, Salt, Indicators, pH Scale, Acid Rain, Chlor-Alkali Process, Bleaching Powder, Baking Soda, Washing Soda, Water Of Crystallization तथा Plaster Of Paris जैसे सभी महत्वपूर्ण टॉपिक विस्तार से समझे।

यदि आप इन नोट्स का नियमित अभ्यास करते हैं तथा सभी रासायनिक समीकरणों और महत्वपूर्ण तथ्यों को अच्छी तरह याद रखते हैं, तो बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से पूछे जाने वाले अधिकांश प्रश्नों का उत्तर आसानी से दे पाएँगे।

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