Class 10th Chemistry Chapter 1 Notes in Hindi | रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरण (Chemical Reactions and Equations) Free PDF Notes Download

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By Neeraj Kumar
Published On: June 17, 2026
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Class 10th Chemistry Chapter 1 Notes in Hindi : दोस्तों, Class 10th Chemistry Chapter 1 – रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions and Equations) बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। इसी अध्याय से विद्यार्थियों को Chemical Reactions, Chemical Equations, विभिन्न प्रकार की अभिक्रियाएँ तथा उनके वास्तविक जीवन में होने वाले उपयोगों की जानकारी मिलती है। यदि इस अध्याय की मूल अवधारणाएँ अच्छी तरह समझ में आ जाएँ, तो आगे आने वाले कई अध्याय भी आसानी से समझे जा सकते हैं। यही कारण है कि CBSE, Bihar Board, UP Board तथा अन्य राज्य बोर्डों की परीक्षाओं में इस अध्याय से हर वर्ष महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं।

इस पोस्ट में आपको NCERT पर आधारित, सरल भाषा में तैयार किए गए सम्पूर्ण नोट्स दिए गए हैं। प्रत्येक विषय को आसान उदाहरणों, संतुलित रासायनिक समीकरणों तथा स्पष्ट व्याख्या के साथ समझाया गया है ताकि विद्यार्थी केवल रटने के बजाय प्रत्येक अवधारणा को अच्छी तरह समझ सकें। साथ ही, जहाँ आवश्यक है वहाँ रासायनिक सूत्रों और समीकरणों को सही प्रारूप में प्रस्तुत किया गया है ताकि परीक्षा में उत्तर लिखने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।

अगर आप Class 10th Chemistry Chapter 1 Notes in Hindi की सहायता से बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह नोट्स आपके लिए काफी उपयोगी साबित होंगे। इन्हें पढ़ने के बाद आप रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार, रासायनिक समीकरणों का संतुलन, अभिकारक एवं उत्पाद, ऑक्सीकरण–अपचयन, उष्माक्षेपी अभिक्रिया तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों को आसानी से समझ पाएँगे।

Table of Contents

Class 10th Chemistry Chapter 1 Notes in Hindi

Class 10th Chemistry Chapter 1 Notes in Hindi
Class 10th Chemistry Chapter 1 Notes in Hindi

रसायन शास्त्र (Chemistry)

रसायन शास्त्र (Chemistry) विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत पदार्थों की संरचना, संघटन, गुण, रासायनिक परिवर्तन तथा उन परिवर्तनों के दौरान होने वाली अभिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। दूसरे शब्दों में, जब हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि कोई पदार्थ किन तत्वों से मिलकर बना है, उसके गुण क्या हैं तथा वह किन परिस्थितियों में दूसरे पदार्थों में परिवर्तित होता है, तो उसका अध्ययन रसायन शास्त्र के अंतर्गत किया जाता है।

आधुनिक रसायन शास्त्र के जनक Antoine Lavoisier को माना जाता है। उन्होंने Law of Conservation of Mass (द्रव्यमान संरक्षण का नियम) प्रस्तुत किया, जिसके अनुसार किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में न तो द्रव्यमान का निर्माण होता है और न ही उसका विनाश होता है। अभिक्रिया के दौरान केवल पदार्थों का रूप और गुण बदलते हैं।

रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction)

जब एक या एक से अधिक पदार्थ आपस में अभिक्रिया करके एक या एक से अधिक नए पदार्थों का निर्माण करते हैं, तो इस प्रक्रिया को रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction) कहा जाता है। अभिक्रिया के बाद बनने वाले पदार्थों के गुण पहले वाले पदार्थों से पूरी तरह भिन्न हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए, जब Magnesium Ribbon (Mg) को वायु में जलाया जाता है, तो यह वायु में उपस्थित Oxygen (O₂) के साथ अभिक्रिया करके सफेद रंग का Magnesium Oxide (MgO) बनाती है।

संतुलित रासायनिक समीकरण:

2Mg + O₂ → 2MgO

इसी प्रकार दूध का दही बनना, लोहे में जंग लगना, भोजन का पचना, फलों का पकना तथा मोमबत्ती का जलना भी रासायनिक अभिक्रियाओं के सामान्य उदाहरण हैं।

रासायनिक समीकरण (Chemical Equation)

जब किसी रासायनिक अभिक्रिया को रासायनिक संकेतों एवं सूत्रों की सहायता से संक्षिप्त रूप में लिखा जाता है, तो उसे रासायनिक समीकरण (Chemical Equation) कहा जाता है।

उदाहरण:

2Mg + O₂ → 2MgO

इस समीकरण में बाईं ओर अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थ लिखे जाते हैं, जबकि दाईं ओर बनने वाले नए पदार्थ दर्शाए जाते हैं।

रासायनिक समीकरण लिखने से अभिक्रिया को समझना, याद रखना और वैज्ञानिक रूप से प्रस्तुत करना आसान हो जाता है।

अभिकारक (Reactants)

वे पदार्थ जो किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं और जिनसे नए पदार्थ बनते हैं, उन्हें अभिकारक (Reactants) कहा जाता है।

उदाहरण:

2Mg + O₂ → 2MgO

इस अभिक्रिया में Magnesium (Mg) तथा Oxygen (O₂) अभिकारक हैं क्योंकि यही दोनों पदार्थ अभिक्रिया में भाग ले रहे हैं।

उत्पाद (Products)

रासायनिक अभिक्रिया पूरी होने के बाद जो नए पदार्थ बनते हैं, उन्हें उत्पाद (Products) कहा जाता है।

उदाहरण:

2Mg + O₂ → 2MgO

यहाँ Magnesium Oxide (MgO) उत्पाद है क्योंकि यह अभिक्रिया के बाद बनता है।

रासायनिक समीकरण के प्रकार

रासायनिक समीकरण मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—

1. संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation)

2. असंतुलित रासायनिक समीकरण (Unbalanced Chemical Equation)

संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation)

जिस रासायनिक समीकरण में अभिकारकों तथा उत्पादों दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है, उसे संतुलित रासायनिक समीकरण कहते हैं।

उदाहरण:

2Mg + O₂ → 2MgO

तत्वअभिकारक (LHS)उत्पाद (RHS)
Mg22
O22

इस प्रकार यह एक संतुलित रासायनिक समीकरण है।

असंतुलित रासायनिक समीकरण (Unbalanced Chemical Equation)

जिस रासायनिक समीकरण में अभिकारकों और उत्पादों के दोनों ओर परमाणुओं की संख्या समान नहीं होती, उसे असंतुलित रासायनिक समीकरण कहते हैं।

उदाहरण:

Mg + O₂ → MgO

तत्वअभिकारक (LHS)उत्पाद (RHS)
Mg11
O21

यह असंतुलित समीकरण है क्योंकि ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या दोनों ओर समान नहीं है।

रासायनिक समीकरण से प्राप्त होने वाली जानकारी

किसी भी Chemical Equation से हमें कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त होती हैं।

  • यह बताता है कि अभिक्रिया में कौन-कौन से Reactants भाग ले रहे हैं।
  • यह स्पष्ट करता है कि अभिक्रिया के बाद कौन-कौन से Products बन रहे हैं।
  • इससे प्रत्येक पदार्थ का रासायनिक सूत्र ज्ञात होता है।
  • यह अभिकारकों और उत्पादों के बीच मात्रात्मक अनुपात (Mole Ratio) को दर्शाता है।
  • इससे यह भी पता चलता है कि किसी अभिक्रिया में कौन-सा पदार्थ कितना आवश्यक है।

रासायनिक समीकरण के लाभ (Advantages of Chemical Equation)

रासायनिक समीकरण किसी भी रासायनिक अभिक्रिया को कम शब्दों में स्पष्ट रूप से व्यक्त करने का सबसे वैज्ञानिक तरीका है। इससे पूरी अभिक्रिया आसानी से समझी जा सकती है और विभिन्न देशों के वैज्ञानिक भी एक ही प्रकार के संकेतों एवं सूत्रों के माध्यम से अभिक्रिया को समझ सकते हैं।

इसके अलावा रासायनिक समीकरण समय की बचत करते हैं, कम स्थान घेरते हैं तथा रासायनिक अभिक्रियाओं को याद रखना भी आसान बना देते हैं। यही कारण है कि विद्यालयों से लेकर वैज्ञानिक अनुसंधानों तक हर जगह इन्हीं का उपयोग किया जाता है।

रासायनिक समीकरण की सीमाएँ (Limitations of Chemical Equation)

हालाँकि रासायनिक समीकरण किसी अभिक्रिया की मूल जानकारी देता है, लेकिन केवल समीकरण देखकर अभिक्रिया की पूरी जानकारी प्राप्त नहीं की जा सकती।

उदाहरण के लिए, केवल समीकरण से यह पता नहीं चलता कि अभिक्रिया किस तापमान पर होगी, किस दाब की आवश्यकता होगी, उत्प्रेरक (Catalyst) की जरूरत है या नहीं, अभिक्रिया के दौरान रंग परिवर्तन हुआ या गैस निकली। इसी प्रकार अभिकारकों एवं उत्पादों की भौतिक अवस्था, गंध अथवा अभिक्रिया की गति का भी पता केवल साधारण समीकरण से नहीं चलता।

इसी कारण रासायनिक समीकरण के साथ आवश्यक परिस्थितियाँ और संकेत भी लिखे जाते हैं, जिससे अभिक्रिया को पूरी तरह समझा जा सके।

रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार (Types of Chemical Reactions)

रासायनिक अभिक्रियाएँ कई प्रकार की होती हैं। किसी अभिक्रिया में पदार्थों के जुड़ने, टूटने, स्थान परिवर्तन करने या आयनों के आदान-प्रदान के आधार पर इन्हें अलग-अलग वर्गों में बाँटा जाता है। Class 10 Chemistry के इस अध्याय में मुख्य रूप से पाँच प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। बोर्ड परीक्षा में इन सभी अभिक्रियाओं की परिभाषा, उदाहरण तथा रासायनिक समीकरण अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें अच्छी तरह समझना आवश्यक है।

1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)

जब दो या दो से अधिक पदार्थ आपस में मिलकर केवल एक नया पदार्थ बनाते हैं, तब ऐसी अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction) कहते हैं। इस प्रकार की अभिक्रिया में कई अभिकारक मिलकर केवल एक उत्पाद का निर्माण करते हैं।

उदाहरण 1

2Mg + O₂ → 2MgO

जब मैग्नीशियम रिबन को वायु में जलाया जाता है, तो वह ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है। जलने पर तेज़ सफेद प्रकाश उत्पन्न होता है और सफेद रंग का चूर्ण प्राप्त होता है।

उदाहरण 2

C + O₂ → CO₂

जब कार्बन को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाया जाता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह भी एक संयोजन अभिक्रिया है क्योंकि दो पदार्थ मिलकर एक ही उत्पाद बनाते हैं।

2. वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)

जब कोई एक यौगिक किसी विशेष कारण जैसे ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत के प्रभाव से टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में बदल जाता है, तो उसे वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) कहते हैं।

इस प्रकार की अभिक्रिया संयोजन अभिक्रिया के ठीक विपरीत होती है। यहाँ एक अभिकारक टूटकर अनेक उत्पादों का निर्माण करता है।

उदाहरण

2H₂O → 2H₂ + O₂

इस अभिक्रिया में जल का अणु टूटकर हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन गैसों का निर्माण करता है।

वियोजन अभिक्रिया के प्रकार

(i) उष्मीय वियोजन अभिक्रिया (Thermal Decomposition Reaction)

जब किसी यौगिक का अपघटन ऊष्मा देने पर होता है, तो उसे उष्मीय वियोजन अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण

CaCO₃ → CaO + CO₂

जब कैल्शियम कार्बोनेट को गर्म किया जाता है, तो वह कैल्शियम ऑक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड में टूट जाता है।

(ii) प्रकाशीय वियोजन अभिक्रिया (Photolytic Decomposition Reaction)

जब सूर्य के प्रकाश या किसी अन्य प्रकाश स्रोत की सहायता से कोई यौगिक टूटता है, तो उसे प्रकाशीय वियोजन अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण

2AgCl → 2Ag + Cl₂

सिल्वर क्लोराइड सूर्य के प्रकाश में धीरे-धीरे विघटित होकर सिल्वर तथा क्लोरीन गैस बनाता है। इसी कारण इसका रंग सफेद से धूसर हो जाता है। यही सिद्धांत फोटोग्राफी में भी उपयोग किया जाता था।

(iii) वैद्युत वियोजन अभिक्रिया (Electrolytic Decomposition Reaction)

जब किसी यौगिक का विघटन विद्युत धारा प्रवाहित करके कराया जाता है, तो उसे वैद्युत वियोजन अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण

2H₂O → 2H₂ + O₂

इस अभिक्रिया में विद्युत धारा की सहायता से जल का अपघटन होकर हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन गैसें प्राप्त होती हैं।

बुझे हुए चूने का उपयोग दीवारों की सफेदी में क्यों किया जाता है?

बोर्ड परीक्षाओं में यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है।

दीवारों की सफेदी के लिए बुझा हुआ चूना [Ca(OH)₂] उपयोग किया जाता है। इसे दीवार पर लगाने के बाद यह धीरे-धीरे वायु में उपस्थित Carbon Dioxide (CO₂) के साथ अभिक्रिया करता है और Calcium Carbonate (CaCO₃) बनाता है।

Ca(OH)₂ + CO₂ → CaCO₃ + H₂O

बनने वाला Calcium Carbonate दीवार को कठोर, चमकदार तथा संगमरमर जैसी सफेद परत प्रदान करता है। यही कारण है कि सफेदी करने के लगभग दो से तीन दिन बाद दीवार अधिक चमकदार दिखाई देती है।

ध्यान रखें—

CaO → बिना बुझा हुआ चूना (Quick Lime)

Ca(OH)₂ → बुझा हुआ चूना (Slaked Lime)

CaCO₃ → चूना पत्थर / संगमरमर (Limestone / Marble)

3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)

जब कोई अधिक अभिक्रियाशील तत्व किसी कम अभिक्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से हटाकर स्वयं उसका स्थान ग्रहण कर लेता है, तो ऐसी अभिक्रिया को विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) कहते हैं।

इस प्रकार की अभिक्रिया में केवल एक तत्व का स्थान परिवर्तन होता है।

उदाहरण

Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu

इस अभिक्रिया में लोहा, ताँबे से अधिक अभिक्रियाशील होता है। इसलिए लोहा, कॉपर सल्फेट के विलयन से ताँबे को विस्थापित करके आयरन सल्फेट बना देता है।

इस अभिक्रिया के दौरान नीले रंग का कॉपर सल्फेट विलयन हल्के हरे रंग में बदल जाता है तथा लोहे की कील पर ताँबे की लाल-भूरी परत दिखाई देती है।

4. द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)

जब दो यौगिक अपने-अपने आयनों का आदान-प्रदान करके दो नए यौगिकों का निर्माण करते हैं, तो ऐसी अभिक्रिया को द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction) कहा जाता है।

उदाहरण

Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSO₄ + 2NaCl

इस अभिक्रिया में सोडियम सल्फेट तथा बेरियम क्लोराइड अपने आयनों का परस्पर आदान-प्रदान करते हैं। परिणामस्वरूप बेरियम सल्फेट तथा सोडियम क्लोराइड का निर्माण होता है।

इस अभिक्रिया में बनने वाला Barium Sulphate (BaSO₄) सफेद रंग का अघुलनशील ठोस पदार्थ होता है।

अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction)

जब किसी रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अघुलनशील ठोस पदार्थ (अवक्षेप) बनता है, तो उसे अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction) कहते हैं। अधिकांश अवक्षेपण अभिक्रियाएँ द्विविस्थापन अभिक्रियाएँ भी होती हैं।

उदाहरण

Pb(NO₃)₂ + 2KI → PbI₂ + 2KNO₃

इस अभिक्रिया में लेड नाइट्रेट तथा पोटैशियम आयोडाइड अभिक्रिया करके पीले रंग का Lead Iodide (PbI₂) अवक्षेप बनाते हैं। यही पीला अवक्षेप इस अभिक्रिया की पहचान है।

उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction)

जब कोई Acid और Base आपस में अभिक्रिया करके Salt तथा Water बनाते हैं, तो उसे उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction) कहते हैं।

उदाहरण

HCl + NaOH → NaCl + H₂O

इस अभिक्रिया में Hydrochloric Acid (HCl) तथा Sodium Hydroxide (NaOH) मिलकर Sodium Chloride (NaCl) तथा जल बनाते हैं।

उदासीनीकरण अभिक्रिया सामान्यतः Exothermic Reaction होती है क्योंकि इसमें ऊष्मा भी उत्पन्न होती है। यही कारण है कि अम्ल और क्षार को मिलाने पर विलयन हल्का गर्म महसूस होता है।

ऑक्सीकरण अभिक्रिया (Oxidation Reaction)

जब किसी पदार्थ में Oxygen की मात्रा बढ़ जाती है अथवा Hydrogen की मात्रा कम हो जाती है, तब उस अभिक्रिया को ऑक्सीकरण अभिक्रिया (Oxidation Reaction) कहते हैं। सरल शब्दों में कहें तो जिस पदार्थ में ऑक्सीजन जुड़ती है या हाइड्रोजन निकलती है, उसका ऑक्सीकरण होता है।

बोर्ड परीक्षाओं में ऑक्सीकरण की परिभाषा और उदाहरण अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इसे अच्छी तरह समझना आवश्यक है।

उदाहरण 1

2Mg + O₂ → 2MgO

इस अभिक्रिया में मैग्नीशियम ऑक्सीजन ग्रहण करके मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है। इसलिए मैग्नीशियम का Oxidation होता है।

उदाहरण 2

2Cu + O₂ → 2CuO

यहाँ ताँबा ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके कॉपर ऑक्साइड बनाता है। इसलिए यह भी ऑक्सीकरण अभिक्रिया का उदाहरण है।

हाइड्रोजन की कमी का उदाहरण

H₂S + Cl₂ → 2HCl + S

इस अभिक्रिया में Hydrogen Sulphide (H₂S) से हाइड्रोजन अलग हो जाती है, इसलिए इसका ऑक्सीकरण होता है।

अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction)

जब किसी पदार्थ में Hydrogen की मात्रा बढ़ जाती है अथवा Oxygen की मात्रा कम हो जाती है, तो ऐसी अभिक्रिया को अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction) कहते हैं।

ऑक्सीकरण और अपचयन एक-दूसरे की विपरीत प्रक्रियाएँ हैं। जहाँ ऑक्सीकरण में ऑक्सीजन बढ़ती है, वहीं अपचयन में ऑक्सीजन कम होती है।

उदाहरण 1

CuO + H₂ → Cu + H₂O

इस अभिक्रिया में Copper Oxide (CuO) से ऑक्सीजन निकल जाती है, इसलिए CuO का अपचयन होता है।

उदाहरण 2

H₂ + Cl₂ → 2HCl

यहाँ क्लोरीन हाइड्रोजन ग्रहण करती है, इसलिए क्लोरीन का अपचयन होता है।

रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox Reaction)

जब किसी एक ही रासायनिक अभिक्रिया में Oxidation और Reduction दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ होती हैं, तो उसे रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox Reaction) कहते हैं।

अधिकांश रासायनिक अभिक्रियाओं में दोनों प्रक्रियाएँ साथ-साथ होती हैं क्योंकि एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन खोता है तो दूसरा उन्हें ग्रहण करता है।

उदाहरण

CuO + H₂ → Cu + H₂O

इस अभिक्रिया में—

  • Hydrogen (H₂) ऑक्सीजन ग्रहण करके जल बनाता है, इसलिए इसका Oxidation होता है।
  • Copper Oxide (CuO) ऑक्सीजन खोकर कॉपर में बदल जाता है, इसलिए इसका Reduction होता है।

इसी कारण यह एक Redox Reaction कहलाती है।

उपचायक (Oxidizing Agent)

जो पदार्थ किसी दूसरे पदार्थ का Oxidation कराता है और स्वयं Reduction प्राप्त करता है, उसे उपचायक (Oxidizing Agent) कहते हैं।

उदाहरण

CuO + H₂ → Cu + H₂O

इस अभिक्रिया में Copper Oxide (CuO), हाइड्रोजन को ऑक्सीकरण कराता है। इसलिए CuO उपचायक (Oxidizing Agent) है।

अपचायक (Reducing Agent)

जो पदार्थ किसी दूसरे पदार्थ का Reduction कराता है और स्वयं Oxidation प्राप्त करता है, उसे अपचायक (Reducing Agent) कहते हैं।

उसी अभिक्रिया में—

CuO + H₂ → Cu + H₂O

यहाँ Hydrogen (H₂), Copper Oxide का अपचयन कराता है। इसलिए Hydrogen अपचायक (Reducing Agent) कहलाता है।

यह प्रश्न बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है, इसलिए Oxidizing Agent और Reducing Agent का अंतर अच्छी तरह याद रखें।

उष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction)

जिस रासायनिक अभिक्रिया में उत्पाद बनने के साथ-साथ ऊष्मा (Heat) भी निकलती है, उसे उष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction) कहते हैं।

ऐसी अभिक्रियाओं में आसपास का तापमान बढ़ जाता है क्योंकि अभिक्रिया के दौरान ऊर्जा बाहर निकलती है।

उदाहरण

CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O + Heat

जब मीथेन गैस जलती है, तब कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा पर्याप्त मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है।

एक अन्य महत्वपूर्ण उदाहरण

CaO + H₂O → Ca(OH)₂ + Heat

जब बिना बुझे चूने (Quick Lime) में जल मिलाया जाता है, तो बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है। इसलिए यह भी एक Exothermic Reaction है।

संक्षारण (Corrosion)

जब धातुएँ वायु, नमी या अन्य रासायनिक पदार्थों के संपर्क में आकर धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, तो इस प्रक्रिया को संक्षारण (Corrosion) कहते हैं।

संक्षारण के कारण धातुओं की चमक समाप्त हो जाती है तथा उनकी मजबूती भी कम हो जाती है। यदि समय रहते उचित सुरक्षा न की जाए, तो धातु पूरी तरह खराब हो सकती है।

लोहे में जंग लगना, चाँदी का काला पड़ना तथा ताँबे पर हरी परत बनना संक्षारण के सामान्य उदाहरण हैं।

लोहे में जंग लगना (Rusting of Iron)

जब लोहा वायु में उपस्थित Oxygen तथा नमी (Moisture) के संपर्क में लंबे समय तक रहता है, तब उसकी सतह पर लाल-भूरे रंग की एक परत बन जाती है, जिसे जंग (Rust) कहते हैं।

जंग का रासायनिक सूत्र—

Fe₂O₃·xH₂O

जंग लगने से लोहे की वस्तुएँ कमजोर हो जाती हैं और धीरे-धीरे उपयोग के योग्य नहीं रहतीं।

लोहे को जंग से बचाने के लिए—

  • पेंट किया जाता है।
  • ग्रीस या तेल लगाया जाता है।
  • जस्ता की परत चढ़ाई जाती है (Galvanization)।
  • क्रोमियम या निकेल की प्लेटिंग की जाती है।

विकृतगंधिता (Rancidity)

जब तेल और वसा (Fats And Oils) युक्त खाद्य पदार्थ लंबे समय तक वायु के संपर्क में रहते हैं, तो उनमें उपस्थित वसा का Oxidation होने लगता है। इसके कारण भोजन का स्वाद और गंध खराब हो जाती है। इस प्रक्रिया को विकृतगंधिता (Rancidity) कहते हैं।

आपने देखा होगा कि यदि चिप्स, नमकीन या बिस्कुट का पैकेट लंबे समय तक खुला छोड़ दिया जाए, तो उसका स्वाद बदल जाता है। इसका मुख्य कारण वसा का ऑक्सीकरण है।

विकृतगंधिता को रोकने के लिए खाद्य पदार्थों में Antioxidants मिलाए जाते हैं तथा पैकेट में Nitrogen Gas भरी जाती है ताकि ऑक्सीजन के संपर्क को कम किया जा सके।

कुछ सामान्य Antioxidants हैं—

  • BHA (Butylated Hydroxyanisole)
  • BHT (Butylated Hydroxytoluene)

इनका उपयोग खाद्य पदार्थों की Shelf Life बढ़ाने के लिए किया जाता है।

दहन (Combustion)

जब कोई पदार्थ Oxygen की उपस्थिति में जलता है और उसके साथ ऊष्मा तथा प्रायः प्रकाश भी उत्पन्न होता है, तो इस प्रक्रिया को दहन (Combustion) कहते हैं। दहन एक उष्माक्षेपी (Exothermic) रासायनिक अभिक्रिया है क्योंकि इसमें ऊर्जा ऊष्मा के रूप में बाहर निकलती है। हमारे दैनिक जीवन में लकड़ी, कोयला, एलपीजी गैस, पेट्रोल और डीज़ल का जलना दहन के सामान्य उदाहरण हैं।

दहन की प्रक्रिया तभी संभव होती है जब आवश्यक परिस्थितियाँ पूरी हों। यदि इनमें से किसी एक शर्त की भी कमी हो जाए, तो पदार्थ नहीं जलता।

दहन के लिए आवश्यक शर्तें

किसी भी पदार्थ के जलने के लिए निम्नलिखित तीन शर्तों का पूरा होना आवश्यक है—

  • Combustible Substance अर्थात दहनशील पदार्थ उपस्थित होना चाहिए।
  • पर्याप्त मात्रा में Oxygen या दहन में सहायता करने वाला माध्यम उपस्थित होना चाहिए।
  • पदार्थ का तापमान उसके Ignition Temperature (ज्वलन ताप) तक पहुँच जाना चाहिए।

इन तीनों में से यदि किसी एक शर्त का अभाव हो, तो दहन संभव नहीं होगा।

दहनशील पदार्थ (Combustible Substances)

वे पदार्थ जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में आसानी से जल जाते हैं, उन्हें दहनशील पदार्थ (Combustible Substances) कहते हैं।

उदाहरण—

  • लकड़ी
  • कोयला
  • कागज
  • एलपीजी गैस
  • पेट्रोल
  • डीज़ल
  • मिट्टी का तेल

ये सभी पदार्थ जलने पर ऊष्मा उत्पन्न करते हैं और ईंधन के रूप में उपयोग किए जाते हैं।

अदहनशील पदार्थ (Non-Combustible Substances)

वे पदार्थ जो सामान्य परिस्थितियों में नहीं जलते, उन्हें अदहनशील पदार्थ (Non-Combustible Substances) कहा जाता है।

उदाहरण—

  • पत्थर
  • ईंट
  • बालू
  • काँच
  • मिट्टी

इन पदार्थों का उपयोग भवन निर्माण तथा अन्य कार्यों में किया जाता है क्योंकि ये आसानी से आग नहीं पकड़ते।

ज्वलन ताप (Ignition Temperature)

किसी पदार्थ के जलना प्रारंभ करने के लिए जिस न्यूनतम तापमान की आवश्यकता होती है, उसे ज्वलन ताप (Ignition Temperature) कहते हैं।

प्रत्येक पदार्थ का ज्वलन ताप अलग-अलग होता है। कुछ पदार्थ बहुत कम ताप पर जल जाते हैं, जबकि कुछ पदार्थों को जलाने के लिए अधिक तापमान की आवश्यकता होती है।

उदाहरण के लिए, कागज का ज्वलन ताप लकड़ी की तुलना में कम होता है। इसलिए कागज पहले जलना शुरू कर देता है।

महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions)

श्वसन एक उष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों है?

हमारे शरीर में भोजन के रूप में प्राप्त Glucose ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके ऊर्जा उत्पन्न करता है। इस प्रक्रिया में ऊष्मा भी निकलती है, इसलिए Respiration एक Exothermic Reaction है।

रासायनिक समीकरण

C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + Energy

तेल एवं वसा युक्त खाद्य पदार्थों के पैकेट में नाइट्रोजन गैस क्यों भरी जाती है?

तेल तथा वसा वाले पदार्थ वायु की ऑक्सीजन के संपर्क में आकर Oxidation की प्रक्रिया से खराब होने लगते हैं। इस प्रक्रिया को Rancidity कहते हैं।

इसी कारण चिप्स, नमकीन तथा अन्य खाद्य पदार्थों के पैकेट में Nitrogen Gas भरी जाती है। नाइट्रोजन एक कम अभिक्रियाशील गैस है, इसलिए यह ऑक्सीकरण की गति को कम करती है और खाद्य पदार्थ लंबे समय तक ताज़ा बने रहते हैं।

वायु में जलाने से पहले मैग्नीशियम रिबन को साफ़ क्यों किया जाता है?

मैग्नीशियम रिबन की सतह पर वायु के संपर्क में आने से Magnesium Oxide (MgO) की पतली परत बन जाती है। यह परत मैग्नीशियम को आसानी से जलने नहीं देती।

इसीलिए प्रयोग से पहले मैग्नीशियम रिबन को Sandpaper से रगड़कर साफ़ किया जाता है, जिससे ऑक्साइड की परत हट जाती है और रिबन आसानी से जलने लगता है।

लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डालने पर विलयन का रंग क्यों बदल जाता है?

जब लोहे की कील को Copper Sulphate (CuSO₄) के विलयन में डाला जाता है, तो लोहा ताँबे से अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण उसे विस्थापित कर देता है। परिणामस्वरूप Iron Sulphate (FeSO₄) बनता है।

रासायनिक समीकरण

Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu

इस अभिक्रिया में नीले रंग का Copper Sulphate Solution हल्के हरे रंग के Iron Sulphate Solution में बदल जाता है तथा लोहे की कील पर ताँबे की लाल-भूरी परत जम जाती है।

FAQs – Class 10th Chemistry Chapter 1 Notes in Hindi

रासायनिक अभिक्रिया क्या होती है?

जब एक या एक से अधिक पदार्थ आपस में अभिक्रिया करके नए पदार्थों का निर्माण करते हैं, तो उसे Chemical Reaction कहते हैं। बनने वाले पदार्थों के गुण मूल पदार्थों से अलग होते हैं।

संतुलित रासायनिक समीकरण क्या है?

जिस रासायनिक समीकरण में अभिकारकों और उत्पादों के दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है, उसे Balanced Chemical Equation कहा जाता है।

रेडॉक्स अभिक्रिया किसे कहते हैं?

जिस अभिक्रिया में Oxidation और Reduction दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ होती हैं, उसे Redox Reaction कहते हैं। ऐसी अभिक्रियाओं में एक पदार्थ का ऑक्सीकरण और दूसरे का अपचयन होता है।

संक्षारण क्या है?

जब धातुएँ वायु, नमी या अन्य रासायनिक पदार्थों के प्रभाव से धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, तो इस प्रक्रिया को Corrosion कहा जाता है। लोहे में जंग लगना इसका सबसे सामान्य उदाहरण है।

विकृतगंधिता क्या है?

तेल एवं वसा युक्त पदार्थों का ऑक्सीकरण होने पर उनके स्वाद और गंध में परिवर्तन आ जाता है। इस प्रक्रिया को Rancidity कहा जाता है।

निष्कर्ष

दोस्तों, अब आपने Class 10th Chemistry Chapter 1 Notes in Hindi – रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions and Equations) को सरल भाषा में विस्तार से पढ़ लिया है। इस अध्याय में आपने Chemical Reaction, Chemical Equation, विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाएँ, Oxidation, Reduction, Redox Reaction, Corrosion, Rancidity तथा Combustion जैसी सभी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझा।

यदि आप इन नोट्स का नियमित रूप से अध्ययन करते हैं और सभी रासायनिक समीकरणों का अभ्यास करते हैं, तो बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से पूछे जाने वाले अधिकांश प्रश्नों का उत्तर आसानी से दे पाएँगे।

अगर आपको ये नोट्स उपयोगी लगे हों, तो इन्हें अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें। साथ ही StudyNumberOne.co पर कक्षा 9वीं और 10वीं के सभी विषयों के NCERT Based, Board Exam Oriented और सरल हिंदी नोट्स भी पढ़ सकते हैं।

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