Class 10th Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi | कार्बन तथा उसके यौगिक (Carbon and its Compounds) Free PDF Notes Download

Join WhatsApp
Join Now
Join Telegram
Join Now
By Neeraj Kumar
Published On: June 17, 2026
Follow Us

इस पोस्ट में हम आपको Class 10th Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार सरल, स्पष्ट और परीक्षा-उपयोगी भाषा में उपलब्ध करा रहे हैं। ये नोट्स विशेष रूप से CBSE, Bihar Board, UP Board तथा अन्य राज्य बोर्डों के हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि वे अध्याय की प्रत्येक अवधारणा को आसानी से समझ सकें और बोर्ड परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त कर सकें।

इन नोट्स में कार्बन के गुण, कार्बन के अपररूप, सहसंयोजक बंध, श्रृंखलन (Catenation), कार्बन यौगिकों के सूत्र, हाइड्रोकार्बन, समावयवता (Isomerism), प्रकार्यात्मक समूह (Functional Groups), समजातीय श्रेणी (Homologous Series) तथा कार्बनिक यौगिकों की प्रमुख अभिक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया है।

साथ ही, संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन, एल्केन, एल्कीन, एल्काइन, ऐलिसाइक्लिक तथा एरोमैटिक यौगिकों के नामकरण (IUPAC Nomenclature), सामान्य सूत्र, गुण, उपयोग और उनके बीच के अंतर को भी आसान उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है।

प्रत्येक विषय को परिभाषा, रासायनिक सूत्र, उदाहरण, सारणी और मुख्य बिंदुओं के माध्यम से इस प्रकार तैयार किया गया है कि विद्यार्थी इसे आसानी से समझ सकें और परीक्षा में आत्मविश्वास के साथ उत्तर लिख सकें।

यदि आप Class 10th Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi की सहायता से कार्बन तथा उसके यौगिक (Carbon and its Compounds) अध्याय की प्रभावी तैयारी करना चाहते हैं, तो ये नोट्स आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

अभी PDF डाउनलोड करें और अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को और मजबूत बनाएं।

Table of Contents

Class 10th Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi

Class 10th Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi
Class 10th Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi

कार्बन (Carbon)

कार्बन एक महत्वपूर्ण अधातु तत्व (Non-Metal) है, जिसका रासायनिक संकेत C तथा परमाणु संख्या 6 है। यह प्रकृति में स्वतंत्र तथा संयुक्त दोनों अवस्थाओं में पाया जाता है। कार्बन की विशेषता यह है कि यह अन्य तत्वों तथा अपने ही परमाणुओं के साथ मिलकर लाखों प्रकार के यौगिक बना सकता है। इसी कारण कार्बनिक रसायन (Organic Chemistry) का आधार कार्बन को माना जाता है।

प्राकृतिक रूप से कार्बन के तीन समस्थानिक (Isotopes) पाए जाते हैं—

  • कार्बन-12 (¹²C)
  • कार्बन-13 (¹³C)
  • कार्बन-14 (¹⁴C)

इनमें कार्बन-12 सर्वाधिक मात्रा में पाया जाता है, जबकि कार्बन-14 का उपयोग रेडियोकार्बन डेटिंग (Carbon Dating) में किया जाता है।

पृथ्वी की पपड़ी में कार्बन लगभग 0.02% तथा वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के रूप में लगभग 0.03–0.04% पाया जाता है।

प्रकृति में कार्बन की अवस्थाएँ

1. स्वतंत्र अवस्था (Free State)

कार्बन निम्न रूपों में स्वतंत्र अवस्था में पाया जाता है—

  • हीरा (Diamond)
  • ग्रेफाइट (Graphite)
  • कोयला (Coal)

2. संयुक्त अवस्था (Combined State)

संयुक्त अवस्था में कार्बन निम्न यौगिकों के रूप में पाया जाता है—

  • कार्बोनेट एवं बाइकार्बोनेट
  • पेट्रोलियम
  • प्राकृतिक गैस
  • हाइड्रोकार्बन
  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)

चूँकि सभी जीवित प्राणियों के शरीर में उपस्थित प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा न्यूक्लिक अम्ल कार्बन युक्त यौगिक हैं, इसलिए कार्बन को जीवन का आधारभूत तत्व माना जाता है।

जैव शक्ति का सिद्धांत (Vital Force Theory)

स्वीडिश वैज्ञानिक जे. जे. बेर्ज़िलियस (J. J. Berzelius) ने यह मत दिया था कि कार्बनिक यौगिक केवल जीवित प्राणियों के शरीर में उपस्थित किसी विशेष शक्ति (Vital Force) के कारण ही बन सकते हैं और इन्हें प्रयोगशाला में तैयार नहीं किया जा सकता।

लेकिन 1828 ई. में वैज्ञानिक फ्रेडरिक वोहलर (Friedrich Wöhler) ने अमोनियम सायनेट (NH₄OCN) से यूरिया [CO(NH₂)₂] का संश्लेषण करके इस सिद्धांत को गलत सिद्ध कर दिया। इसके बाद यह सिद्ध हो गया कि कार्बनिक यौगिक प्रयोगशाला में भी बनाए जा सकते हैं।

रासायनिक बंध (Chemical Bond)

वह आकर्षण बल जो दो या दो से अधिक परमाणुओं को आपस में जोड़कर अणु का निर्माण करता है, रासायनिक बंध (Chemical Bond) कहलाता है।

रासायनिक बंध के प्रकार

1. आयनिक या वैद्युत संयोजक बंध (Ionic or Electrovalent Bond)

जब एक परमाणु अपने एक या अधिक इलेक्ट्रॉन दूसरे परमाणु को स्थानांतरित करता है, तब धनायन (Cation) और ऋणायन (Anion) बनते हैं। इन आयनों के बीच बनने वाला आकर्षण बल आयनिक या वैद्युत संयोजक बंध कहलाता है।

उदाहरण: NaCl (सोडियम क्लोराइड)

2. सहसंयोजक बंध (Covalent Bond)

जब दो परमाणु अपने बाहरी इलेक्ट्रॉनों का साझाकरण (Sharing) करके स्थिर संरचना प्राप्त करते हैं, तब उनके बीच बनने वाला बंध सहसंयोजक बंध कहलाता है।

सहसंयोजक बंध के प्रकार

(i) एकल सहसंयोजक बंध (Single Covalent Bond)

जब दो परमाणु एक इलेक्ट्रॉन युग्म का साझाकरण करते हैं, तब एकल सहसंयोजक बंध बनता है।

उदाहरण: H₂

(ii) द्वि सहसंयोजक बंध (Double Covalent Bond)

जब दो परमाणु दो इलेक्ट्रॉन युग्मों का साझाकरण करते हैं, तब द्वि सहसंयोजक बंध बनता है।

उदाहरण: O₂

(iii) त्रि सहसंयोजक बंध (Triple Covalent Bond)

जब दो परमाणु तीन इलेक्ट्रॉन युग्मों का साझाकरण करते हैं, तब त्रि सहसंयोजक बंध बनता है।

उदाहरण: N₂

श्रृंखलन (Catenation)

कार्बन की वह विशेष क्षमता, जिसके कारण वह अपने ही अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ मजबूत सहसंयोजक बंध बनाकर लंबी श्रृंखलाएँ तथा वलय (Ring) बनाता है, श्रृंखलन (Catenation) कहलाती है।

इसी गुण के कारण कार्बन लाखों प्रकार के कार्बनिक यौगिक बनाता है।

कार्बन निम्न प्रकार की श्रृंखलाएँ बना सकता है—

  • सीधी श्रृंखला (Straight Chain)
  • शाखायुक्त श्रृंखला (Branched Chain)
  • वलयाकार श्रृंखला (Cyclic Chain)

कार्बन यौगिकों के सूत्र (Formulae of Carbon Compounds)

1. आणविक सूत्र (Molecular Formula)

किसी यौगिक के एक अणु में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की वास्तविक संख्या को दर्शाने वाला सूत्र आणविक सूत्र कहलाता है।

उदाहरण: CH₄, C₂H₆, C₂H₅OH

2. इलेक्ट्रॉनिक सूत्र (Electron Dot Formula)

जिस सूत्र में सहसंयोजक बंध बनाने वाले इलेक्ट्रॉनों को बिंदुओं (•) द्वारा दर्शाया जाता है, उसे इलेक्ट्रॉनिक सूत्र कहते हैं।

3. संरचना सूत्र (Structural Formula)

जिस सूत्र में परमाणुओं के बीच बने सहसंयोजक बंधों को रेखाओं (—) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, उसे संरचना सूत्र कहते हैं।

उदाहरण: मीथेन (CH₄)

4. संघनित या युक्ति सूत्र (Condensed Formula)

संरचना सूत्र को संक्षिप्त रूप में लिखने वाले सूत्र को संघनित (Condensed) या युक्ति सूत्र कहते हैं।

उदाहरण: CH₃–CH₂–OH

5. त्रिविमीय सूत्र (Three-Dimensional Formula)

जब किसी यौगिक की वास्तविक त्रिविमीय (3D) संरचना को प्रदर्शित किया जाता है, तो उसे त्रिविमीय सूत्र कहा जाता है।

कार्बन यौगिकों का नामकरण (IUPAC Nomenclature)

कार्बनिक यौगिकों के नामकरण के लिए IUPAC (International Union of Pure and Applied Chemistry) द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जाता है। इन नियमों के अनुसार प्रत्येक कार्बनिक यौगिक का एक वैज्ञानिक (मानक) नाम होता है, जिससे उसकी संरचना को आसानी से समझा जा सकता है।

हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbon)

वे कार्बनिक यौगिक जो केवल कार्बन (C) और हाइड्रोजन (H) तत्वों से मिलकर बने होते हैं, हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbon) कहलाते हैं।

हाइड्रोकार्बनों का अध्ययन पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, ईंधन तथा अनेक कार्बनिक पदार्थों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हाइड्रोकार्बन के प्रकार (Types of Hydrocarbons)

हाइड्रोकार्बनों को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है—

  1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Alkanes)
  2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Alkenes एवं Alkynes)
  3. ऐलिसाइक्लिक एवं एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन

1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbon / Alkane)

वे हाइड्रोकार्बन जिनमें सभी कार्बन परमाणुओं के बीच केवल एकल सहसंयोजक बंध (Single Bond) होते हैं, संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ₊₂

प्रथम सदस्य: मीथेन (CH₄)

नामकरण में प्रत्यय (Suffix): –एन (–ane)

उदाहरण:

  • CH₄ → मीथेन (Methane)
  • C₂H₆ → एथेन (Ethane)
  • C₃H₈ → प्रोपेन (Propane)
  • C₄H₁₀ → ब्यूटेन (Butane)

मूल शब्द (Root Words)

कार्बन परमाणुओं की संख्यामूल शब्द
1मेथ (Meth)
2एथ (Eth)
3प्रोप (Prop)
4ब्यूट (But)
5पेंट (Pent)
6हेक्स (Hex)
7हेप्ट (Hept)
8ऑक्ट (Oct)
9नॉन (Non)
10डेक (Dec)

2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated Hydrocarbon)

वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि बंध (Double Bond) अथवा त्रि बंध (Triple Bond) उपस्थित होता है, असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।

ये संतृप्त हाइड्रोकार्बनों की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होते हैं।

असंतृप्त हाइड्रोकार्बन दो प्रकार के होते हैं—

(A) एल्कीन (Alkene)

वे हाइड्रोकार्बन जिनमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच एक द्वि बंध (C=C) होता है, एल्कीन कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ

प्रथम सदस्य: एथीन (C₂H₄)

नामकरण में प्रत्यय: –इन (–ene)

उपयोग:

  • कच्चे फलों को पकाने में।
  • रिपनिंग गैस (Ripening Agent) के रूप में।
  • रासायनिक उद्योगों में विभिन्न यौगिकों के निर्माण में।

विशेषता: एथीन रंगहीन गैस है तथा अधिक मात्रा में श्वसन द्वारा ग्रहण करने पर हानिकारक हो सकती है।

(B) एल्काइन (Alkyne)

वे हाइड्रोकार्बन जिनमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच एक त्रि बंध (C≡C) होता है, एल्काइन कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ₋₂

प्रथम सदस्य: एथाइन (C₂H₂)

नामकरण में प्रत्यय: –आइन (–yne)

उपयोग:

एथाइन (एसीटिलीन) ऑक्सीजन के साथ जलकर अत्यधिक ताप वाली ऑक्सी-एसीटिलीन ज्वाला (Oxy-acetylene Flame) उत्पन्न करता है, जिसका उपयोग धातुओं की वेल्डिंग एवं कटिंग में किया जाता है।

संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में अंतर

आधारसंतृप्त हाइड्रोकार्बनअसंतृप्त हाइड्रोकार्बन
बंधकेवल एकल बंधद्वि या त्रि बंध
सामान्य सूत्रCₙH₂ₙ₊₂CₙH₂ₙ / CₙH₂ₙ₋₂
अभिक्रियाशीलताकमअधिक
उदाहरणमीथेन, एथेनएथीन, एथाइन
नामकरण–एन (–ane)–इन (–ene), –आइन (–yne)

3. ऐलिसाइक्लिक हाइड्रोकार्बन (Alicyclic Hydrocarbon)

वे कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बन परमाणु वलयाकार (Ring) संरचना में जुड़े होते हैं, परंतु उनमें एरोमैटिक गुण नहीं पाए जाते, ऐलिसाइक्लिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र:

  • संतृप्त ऐलिसाइक्लिक: CₙH₂ₙ
  • असंतृप्त ऐलिसाइक्लिक: CₙH₂ₙ₋₂

नामकरण नियम: मूल शब्द से पहले साइक्लो (Cyclo) लगाया जाता है।

उदाहरण:

  • साइक्लोप्रोपेन (C₃H₆)
  • साइक्लोप्रोपीन (C₃H₄)

4. एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (Aromatic Hydrocarbon)

वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कम-से-कम छह कार्बन परमाणुओं का एक बंद वलय होता है तथा उसमें एकांतर (Alternate) एकल एवं द्वि बंध उपस्थित रहते हैं, एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ₋₆

प्रथम सदस्य: बेंजीन (C₆H₆)

बेंजीन के गुण

  • रंगहीन द्रव होता है।
  • सुगंधित गंध वाला होता है।
  • अत्यंत ज्वलनशील होता है।
  • रासायनिक दृष्टि से अपेक्षाकृत स्थिर होता है।

बेंजीन के उपयोग

  • रंग (Dyes) बनाने में।
  • औषधियों के निर्माण में।
  • डिटर्जेंट उद्योग में।
  • प्लास्टिक एवं रबर उद्योग में।

समावयवता (Isomerism)

वे कार्बनिक यौगिक जिनका आणविक सूत्र (Molecular Formula) समान होता है, लेकिन उनके संरचना सूत्र (Structural Formula) भिन्न होते हैं, समावयव (Isomers) कहलाते हैं। इस गुण को समावयवता (Isomerism) कहते हैं।

उदाहरण:

C₂H₆O आणविक सूत्र वाले दो यौगिक—

  • एथेनॉल (CH₃CH₂OH) – एल्कोहल
  • डाइमिथाइल ईथर (CH₃OCH₃) – ईथर

दोनों का आणविक सूत्र समान है, लेकिन संरचना भिन्न है। इसलिए ये एक-दूसरे के समावयव हैं।

प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group)

किसी कार्बनिक यौगिक में उपस्थित वह विशिष्ट परमाणु अथवा परमाणुओं का समूह, जो उसके रासायनिक एवं भौतिक गुणों का निर्धारण करता है, प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group) कहलाता है।

प्रकार्यात्मक समूहसूत्रयौगिक का प्रकार
हाइड्रॉक्सिल–OHएल्कोहल
एल्डिहाइड–CHOएल्डिहाइड
कार्बोनिल>C=Oकिटोन
कार्बोक्सिल–COOHकार्बोक्सिलिक अम्ल
अमीनो–NH₂अमीन
नाइट्रो–NO₂नाइट्रो यौगिक

एल्कोहल (Alcohol)

जिन कार्बनिक यौगिकों में –OH (हाइड्रॉक्सिल समूह) उपस्थित होता है, वे एल्कोहल कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ₊₁OH

नामकरण: मूल शब्द के अंत में –एनॉल (–anol) जोड़ा जाता है।

प्रथम सदस्य: मेथेनॉल (CH₃OH)

एल्कोहल के उपयोग

  • बियर, वाइन एवं व्हिस्की जैसे पेयों में।
  • औद्योगिक विलायक (Solvent) के रूप में।
  • रोगाणुनाशक (Disinfectant) के रूप में।
  • ईंधन (Fuel) के रूप में।
  • स्पिरिट लैम्प एवं थर्मामीटर में।
  • जैविक नमूनों के संरक्षण में।

एल्डिहाइड (Aldehyde)

जिन यौगिकों में –CHO प्रकार्यात्मक समूह उपस्थित होता है, वे एल्डिहाइड कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ₊₁CHO

नामकरण: मूल शब्द के अंत में –एनल (–anal) लगाया जाता है।

प्रथम सदस्य: मेथेनल (HCHO), जिसे फॉर्मेल्डिहाइड (Formaldehyde) भी कहते हैं।

उपयोग

  • कृत्रिम रेज़िन के निर्माण में।
  • प्लास्टिक उद्योग में।
  • औषधियों के निर्माण में।

किटोन (Ketone)

जिन यौगिकों में >C=O (कार्बोनिल समूह) कार्बन श्रृंखला के मध्य में उपस्थित होता है, वे किटोन कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ₊₁CO

नामकरण: मूल शब्द के अंत में –एनोन (–anone) लगाया जाता है।

प्रथम सदस्य: प्रोपेनोन (CH₃COCH₃), जिसे एसीटोन (Acetone) भी कहा जाता है।

उपयोग

  • नेल पॉलिश रिमूवर बनाने में।
  • पेंट उद्योग में।
  • औद्योगिक विलायक (Industrial Solvent) के रूप में।

कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acid)

जिन यौगिकों में –COOH (कार्बोक्सिल समूह) उपस्थित होता है, वे कार्बोक्सिलिक अम्ल कहलाते हैं।

सामान्य सूत्र: CₙH₂ₙ₊₁COOH

नामकरण: मूल शब्द के अंत में –एनॉइक अम्ल (–anoic acid) लगाया जाता है।

प्रथम सदस्य: मेथेनॉइक अम्ल (HCOOH), जिसे फॉर्मिक अम्ल (Formic Acid) भी कहते हैं।

उदाहरण:

  • एथेनॉइक अम्ल (CH₃COOH) – सिरके का मुख्य घटक।

समजातीय श्रेणी (Homologous Series)

ऐसी कार्बनिक श्रृंखला जिसके सभी सदस्यों में—

  • एक ही प्रकार का प्रकार्यात्मक समूह उपस्थित हो।
  • दो क्रमागत सदस्यों के आणविक सूत्रों में –CH₂ का अंतर हो।

उसे समजातीय श्रेणी (Homologous Series) कहते हैं।

उदाहरण (एल्केन श्रेणी):

CH₄ → C₂H₆ → C₃H₈ → C₄H₁₀

प्रत्येक क्रमागत सदस्य में –CH₂ का अंतर होता है।

संकलन अभिक्रिया (Addition Reaction)

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी असंतृप्त कार्बन यौगिक (जिसमें द्वि या त्रि बंध उपस्थित हो) में किसी अन्य तत्व या यौगिक का योग होता है, संकलन अभिक्रिया (Addition Reaction) कहलाती है।

हाइड्रोजनीकरण अभिक्रिया (Hydrogenation Reaction)

जब किसी असंतृप्त हाइड्रोकार्बन या वनस्पति तेल में हाइड्रोजन (H₂) का योग निकेल (Ni), पैलेडियम (Pd) या प्लेटिनम (Pt) जैसे उत्प्रेरक की उपस्थिति में कराया जाता है, तो इस प्रक्रिया को हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) कहते हैं।

उदाहरण:

वनस्पति तेल + H₂ → वनस्पति घी

यह अभिक्रिया वनस्पति तेलों को घी में परिवर्तित करने के लिए प्रयोग की जाती है।

एस्टरीकरण अभिक्रिया (Esterification Reaction)

जब कोई कार्बोक्सिलिक अम्ल किसी एल्कोहल के साथ सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (Conc. H₂SO₄) की उपस्थिति में अभिक्रिया करता है, तो एस्टर (Ester) तथा जल (H₂O) का निर्माण होता है। इस अभिक्रिया को एस्टरीकरण अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण:

CH₃COOH + C₂H₅OH → CH₃COOC₂H₅ + H₂O

(एथेनॉइक अम्ल + एथेनॉल → एथाइल एथेनोएट + जल)

एस्टर के उपयोग

  • फलों एवं फूलों की सुगंध का कारण।
  • कृत्रिम इत्र (Perfume) बनाने में।
  • फ्लेवरिंग एजेंट के रूप में।
  • सौंदर्य प्रसाधनों एवं कुछ औषधियों के निर्माण में।

साबुनीकरण अभिक्रिया (Saponification Reaction)

जब कोई एस्टर किसी क्षार (NaOH या KOH) के साथ अभिक्रिया करता है, तो कार्बोक्सिलिक अम्ल का लवण (साबुन) तथा एल्कोहल प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया को साबुनीकरण अभिक्रिया (Saponification) कहते हैं।

उदाहरण:

Ester + NaOH → Sodium Salt of Carboxylic Acid (Soap) + Alcohol

साबुन (Soap)

उच्च वसा अम्लों (Higher Fatty Acids) के सोडियम (Na) अथवा पोटैशियम (K) लवणों को साबुन (Soap) कहते हैं।

उदाहरण:

  • सोडियम स्टीयरेट (C₁₇H₃₅COONa)
  • सोडियम पामिटेट (C₁₅H₃₁COONa)

अच्छे साबुन के गुण

  • अल्कोहल में घुलनशील होता है।
  • इसमें नमी की मात्रा लगभग 10% से अधिक नहीं होती।
  • उपयोग के समय आसानी से नहीं टूटता।
  • सूखने पर भी अपना आकार बनाए रखता है।

ध्यान दें:

  • NaOH से बना साबुन कठोर साबुन (Hard Soap) कहलाता है।
  • KOH से बना साबुन मुलायम साबुन (Soft Soap) कहलाता है।

अपमार्जक (Detergent)

लंबी कार्बन श्रृंखला वाले सल्फोनेट (–SO₃Na) अथवा सल्फेट यौगिकों के सोडियम या अमोनियम लवणों को अपमार्जक (Detergent) कहते हैं।

ये जल में अच्छी तरह घुलते हैं तथा कठोर जल में भी प्रभावी सफाई करते हैं।

उदाहरण:

सोडियम सिटाइल सल्फेट (C₁₆H₃₃OSO₃Na)

अपमार्जकों के उपयोग

अपमार्जकों का उपयोग निम्नलिखित उत्पादों के निर्माण में किया जाता है—

  • शैंपू
  • वाशिंग पाउडर
  • डिशवॉशिंग उत्पाद
  • कपड़े एवं अन्य सतहों की सफाई करने वाले पदार्थ

अपमार्जकों ने साबुन का स्थान क्यों लिया?

आधारअपमार्जक (Detergent)साबुन (Soap)
कठोर जल में झागपर्याप्त झाग बनाता हैझाग नहीं बनाता
सफाई क्षमताअधिकअपेक्षाकृत कम
जल में घुलनशीलताअधिककम
निर्माणपेट्रोलियम आधारितवनस्पति तेल एवं जंतु वसा आधारित
जलीय घोललगभग उदासीनक्षारीय
कठोर जल में प्रभावप्रभावीकम प्रभावी

निष्कर्ष (Conclusion)

अगर आपको कक्षा 10वीं रसायन विज्ञान – अध्याय: कार्बन तथा उसके यौगिक (Carbon and its Compounds) के ये नोट्स उपयोगी और समझने में आसान लगे हों, तो ऐसे ही सरल, स्पष्ट और परीक्षा-उपयोगी नोट्स के लिए हमारी वेबसाइट StudyNumberOne.co को अवश्य विज़िट करें।

यहाँ आपको कक्षा 9वीं एवं 10वीं के सभी विषयों के NCERT आधारित, बोर्ड परीक्षा उपयोगी तथा निःशुल्क हिंदी माध्यम नोट्स उपलब्ध हैं।

Study Number One – जहाँ पढ़ाई आसान होती है।

Also Read

Join WhatsApp
Join Now
Join Telegram
Join Now

Leave a Comment

WhatsApp Follow WhatsApp Channel