Class 9 Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi – परमाणु की संरचना (Structure of Atom) के इस पोस्ट में हम आपको NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित, सरल, स्पष्ट और परीक्षा-उपयोगी संपूर्ण नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। यह नोट्स विशेष रूप से CBSE, Bihar Board, UP Board तथा अन्य राज्य बोर्डों के हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि वे इस अध्याय के प्रत्येक महत्वपूर्ण सिद्धांत को आसानी से समझ सकें और परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त कर सकें।
इस अध्याय में हमने परमाणु की संरचना, मौलिक कण (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन), कैथोड किरणें, एनोड किरणें, थॉमसन का परमाणु मॉडल, रदरफोर्ड का नाभिकीय सिद्धांत, ऊर्जा स्तर, कोर इलेक्ट्रॉन, परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या, समस्थानिक तथा समभारिक जैसे महत्वपूर्ण विषयों को विस्तारपूर्वक और आसान भाषा में समझाया है।
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Class 9 Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi

| Details | Information |
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 9th |
| Subject | Science (Chemistry) |
| Chapter No. | Chapter 4 |
| Chapter Name | Structure of Atom (परमाणु की संरचना) |
| Category | Class 9th Chemistry Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
मौलिक कण (Fundamental Particles)
परमाणु पदार्थ का सबसे सूक्ष्म कण होता है, लेकिन परमाणु भी कुछ अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है। परमाणु के अंदर उपस्थित इन सूक्ष्म कणों को मौलिक कण कहा जाता है। ये कण परमाणु की संरचना, द्रव्यमान, आवेश तथा उसके रासायनिक गुणों को निर्धारित करते हैं। मुख्य रूप से परमाणु में तीन प्रकार के मौलिक कण पाए जाते हैं — इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन।
इलेक्ट्रॉन (Electron)
किसी परमाणु का वह सूक्ष्म कण जो उसके नाभिक के चारों ओर लगातार परिक्रमा करता रहता है तथा जिस पर ऋणात्मक आवेश पाया जाता है, उसे इलेक्ट्रॉन कहते हैं। इसे e⁻ द्वारा सूचित किया जाता है। इलेक्ट्रॉन का आविष्कार जे. जे. थॉमसन ने 1897 ईस्वी में कैथोड किरण प्रयोग के द्वारा किया था। इलेक्ट्रॉन की खोज के बाद यह स्पष्ट हो गया कि परमाणु अविभाज्य नहीं है, बल्कि इसके अंदर भी छोटे-छोटे कण उपस्थित होते हैं।
इलेक्ट्रॉन के गुण
- इलेक्ट्रॉन पर एक इकाई ऋण आवेश पाया जाता है।
- इसके आवेश का मान 1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम होता है।
- इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान लगभग 9.1 × 10⁻²⁸ ग्राम होता है।
- यह परमाणु के नाभिक के चारों ओर विभिन्न ऊर्जा स्तरों में गति करता रहता है।
- इलेक्ट्रॉन सभी प्रकार के परमाणुओं में पाए जाते हैं।
- इलेक्ट्रॉनों की संख्या में परिवर्तन होने पर आयन का निर्माण होता है।
Class 9 Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi
कैथोड किरणें (Cathode Rays)
निर्वात नली में उच्च विभवांतर प्रवाहित करने पर उत्पन्न होने वाली ऋण आवेशित किरणों को कैथोड किरणें कहा जाता है। ये किरणें कैथोड से निकलती हैं, इसलिए इन्हें कैथोड किरण कहा जाता है। वास्तव में ये इलेक्ट्रॉनों की धारा होती हैं। कैथोड किरणों के अध्ययन से ही इलेक्ट्रॉन की खोज संभव हो सकी थी।
कैथोड किरणों के गुण
- कैथोड किरणें सीधी रेखा में गमन करती हैं।
- इनमें पर्याप्त गतिज ऊर्जा पाई जाती है।
- ये फोटोग्राफिक प्लेट को प्रभावित करती हैं।
- ये हल्का यांत्रिक प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
- विद्युत तथा चुंबकीय क्षेत्र में ये धनात्मक प्लेट की ओर आकर्षित होती हैं।
- ये ऋणात्मक आवेशित कणों से बनी होती हैं।
प्रोटॉन (Proton)
किसी परमाणु का वह सूक्ष्म कण जो परमाणु के नाभिक में उपस्थित रहता है तथा जिस पर धनात्मक आवेश पाया जाता है, उसे प्रोटॉन कहते हैं। इसे p⁺ द्वारा सूचित किया जाता है। प्रोटॉन की खोज गोल्डस्टीन ने 1886 ईस्वी में एनोड किरणों के अध्ययन के दौरान की थी। प्रोटॉन परमाणु के नाभिक का महत्वपूर्ण भाग होता है और किसी तत्व की पहचान निर्धारित करने में इसकी मुख्य भूमिका होती है।
प्रोटॉन के गुण
- प्रोटॉन पर एक इकाई धन आवेश पाया जाता है।
- इसके आवेश का मान 1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम होता है।
- प्रोटॉन का द्रव्यमान लगभग 1.67 × 10⁻²⁴ ग्राम होता है।
- यह परमाणु के नाभिक में स्थित रहता है।
- किसी तत्व का परमाणु क्रमांक प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होता है।
- प्रोटॉन परमाणु के द्रव्यमान में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
Class 9 Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi
एनोड किरणें (Anode Rays)
धन आवेशित कणों से बनी किरणों को एनोड किरणें या धन किरणें कहा जाता है। इनकी खोज गोल्डस्टीन ने गैस डिस्चार्ज नली के प्रयोग द्वारा की थी। ये किरणें कैथोड किरणों के विपरीत गुण प्रदर्शित करती हैं।
एनोड किरणों के गुण
- ये धनात्मक आवेशित होती हैं।
- ये सीधी रेखा में गमन करती हैं।
- विद्युत क्षेत्र में ये ऋणात्मक प्लेट की ओर आकर्षित होती हैं।
- इनका द्रव्यमान कैथोड किरणों की तुलना में अधिक होता है।
- ये गैस की प्रकृति पर निर्भर करती हैं।
न्यूट्रॉन (Neutron)
किसी परमाणु का वह सूक्ष्म कण जो नाभिक में प्रोटॉन के साथ उपस्थित रहता है तथा जिस पर कोई विद्युत आवेश नहीं पाया जाता, उसे न्यूट्रॉन कहते हैं। इसे n⁰ द्वारा सूचित किया जाता है। न्यूट्रॉन का आविष्कार जेम्स चैडविक ने 1932 ईस्वी में किया था। न्यूट्रॉन परमाणु को स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
न्यूट्रॉन के गुण
- न्यूट्रॉन एक उदासीन कण है।
- इस पर न तो धन आवेश होता है और न ही ऋण आवेश।
- इसका द्रव्यमान लगभग 1.675 × 10⁻²⁴ ग्राम होता है।
- न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक में पाया जाता है।
- यह नाभिक को स्थिर बनाए रखने में सहायता करता है।
- न्यूट्रॉन की संख्या बदलने पर समस्थानिक बनते हैं।
Class 9 Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi
थॉमसन का परमाणु मॉडल (Thomson Atomic Model)
इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन की खोज के बाद जे. जे. थॉमसन ने 1904 ईस्वी में परमाणु की संरचना को समझाने के लिए एक मॉडल प्रस्तुत किया, जिसे थॉमसन का परमाणु मॉडल कहा जाता है। इस मॉडल को प्लम पुडिंग मॉडल या तरबूज मॉडल भी कहा जाता है।
थॉमसन ने परमाणु की तुलना ऐसे तरबूज से की जिसमें लाल भाग धनात्मक आवेश को तथा बीज इलेक्ट्रॉनों को प्रदर्शित करते हैं। उनके अनुसार परमाणु एक समान गोलाकार संरचना वाला होता है।
थॉमसन मॉडल के मुख्य बिंदु
- परमाणु एक गोलाकार संरचना वाला होता है।
- परमाणु में धनात्मक आवेश समान रूप से फैला रहता है।
- इलेक्ट्रॉन इस धनात्मक भाग में धँसे रहते हैं।
- धनात्मक तथा ऋणात्मक आवेश की मात्रा समान होने के कारण परमाणु विद्युत रूप से उदासीन होता है।
थॉमसन मॉडल की सीमाएँ
थॉमसन का मॉडल परमाणु की पूरी संरचना को स्पष्ट नहीं कर सका। यह मॉडल यह नहीं बता पाया कि इलेक्ट्रॉन परमाणु में स्थिर क्यों रहते हैं। बाद में रदरफोर्ड के प्रयोगों द्वारा इस मॉडल की कमियाँ स्पष्ट हो गईं।
Class 9 Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi
रदरफोर्ड का नाभिकीय सिद्धांत (Rutherford Nuclear Theory)
वैज्ञानिक अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के आधार पर परमाणु की संरचना के बारे में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसे रदरफोर्ड का नाभिकीय सिद्धांत कहा जाता है। उन्होंने सोने की अत्यंत पतली पन्नी पर तेज गति वाले अल्फा कणों की बौछार की तथा उनके व्यवहार का अध्ययन किया।
रदरफोर्ड के प्रयोग से प्राप्त निष्कर्ष
परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है
अधिकांश अल्फा कण बिना किसी विचलन के सीधे निकल गए। इससे यह सिद्ध हुआ कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त या खाली होता है।
परमाणु में धन आवेशित भाग बहुत छोटा होता है
कुछ अल्फा कण अपने मार्ग से थोड़ा विचलित हुए। इससे यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु में धन आवेशित भाग बहुत छोटा होता है।
नाभिक अत्यंत छोटा एवं घना होता है
बहुत कम अल्फा कण वापस लौट आए। इससे सिद्ध हुआ कि परमाणु के केंद्र में अत्यंत छोटा, भारी तथा धन आवेशित भाग उपस्थित होता है, जिसे नाभिक कहा जाता है।
Class 9 Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi
रदरफोर्ड के नाभिकीय सिद्धांत के मुख्य बिंदु
- परमाणु के केंद्र में एक छोटा तथा घना नाभिक होता है।
- नाभिक में धन आवेशित प्रोटॉन उपस्थित रहते हैं।
- परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित रहता है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते रहते हैं।
- परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है।
थॉमसन के परमाणु मॉडल के दोष
थॉमसन का परमाणु मॉडल परमाणु की संरचना को समझाने का पहला महत्वपूर्ण प्रयास था। इस मॉडल द्वारा यह समझाया गया कि परमाणु विद्युत रूप से उदासीन होता है, क्योंकि इसमें धनात्मक तथा ऋणात्मक आवेश की मात्रा समान होती है। लेकिन बाद में वैज्ञानिकों द्वारा किए गए कई प्रयोगों के परिणामों को यह मॉडल स्पष्ट नहीं कर सका।
थॉमसन मॉडल की प्रमुख कमियाँ
- यह मॉडल परमाणु के अंदर इलेक्ट्रॉनों की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट नहीं कर पाया।
- यह नहीं बताया जा सका कि इलेक्ट्रॉन परमाणु के अंदर स्थिर कैसे रहते हैं।
- रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणाम इस मॉडल से मेल नहीं खाते थे।
- इस मॉडल में नाभिक की उपस्थिति का कोई उल्लेख नहीं था।
- परमाणु के द्रव्यमान के केंद्रित होने की सही व्याख्या इसमें नहीं की गई थी।
इन्हीं कमियों के कारण बाद में रदरफोर्ड ने नया परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया।
ऊर्जा स्तर (Energy Level)
परमाणु में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित पथों में चक्कर लगाते रहते हैं। इलेक्ट्रॉनों के इन निश्चित पथों या कक्षाओं को ऊर्जा स्तर अथवा कक्षा कहा जाता है। प्रत्येक कक्षा की अपनी निश्चित ऊर्जा होती है।
इन कक्षाओं को क्रमशः K, L, M, N आदि अक्षरों द्वारा दर्शाया जाता है।
ऊर्जा स्तरों की विशेषताएँ
- K कक्षा नाभिक के सबसे निकट होती है।
- जैसे-जैसे कक्षा नाभिक से दूर जाती है, उसकी ऊर्जा बढ़ती जाती है।
- प्रत्येक कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की संख्या सीमित होती है।
- इलेक्ट्रॉन सामान्यतः कम ऊर्जा वाली कक्षा में रहना पसंद करते हैं।
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कोर इलेक्ट्रॉन (Core Electron)
किसी परमाणु की सबसे बाहरी कक्षा को छोड़कर शेष सभी भीतरी कक्षाओं में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को कोर इलेक्ट्रॉन कहा जाता है। ये इलेक्ट्रॉन सामान्यतः रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग नहीं लेते हैं।
उदाहरण के लिए —
क्लोरीन (Cl) का परमाणु क्रमांक 17 है।
इसका इलेक्ट्रॉन विन्यास = 2, 8, 7
यहाँ अंतिम कक्षा में उपस्थित 7 इलेक्ट्रॉन संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं, जबकि भीतरी कक्षाओं के इलेक्ट्रॉन —
2 + 8 = 10
अतः क्लोरीन में कोर इलेक्ट्रॉनों की संख्या 10 होगी।
कोर इलेक्ट्रॉन का महत्व
- ये परमाणु के आंतरिक भाग को स्थिरता प्रदान करते हैं।
- ये नाभिक तथा संयोजी इलेक्ट्रॉनों के बीच आकर्षण बल बनाए रखते हैं।
- सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं में ये भाग नहीं लेते।
Class 9 Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi
परमाणु संख्या (Atomic Number)
किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की कुल संख्या को परमाणु संख्या कहते हैं। इसे Z द्वारा सूचित किया जाता है।
चूँकि एक उदासीन परमाणु में प्रोटॉन तथा इलेक्ट्रॉन की संख्या समान होती है, इसलिए परमाणु संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या को भी दर्शाती है।
परमाणु संख्या का महत्व
- परमाणु संख्या किसी तत्व की पहचान बताती है।
- आवर्त सारणी में तत्वों की व्यवस्था परमाणु संख्या के आधार पर की जाती है।
- विभिन्न तत्वों की रासायनिक प्रकृति परमाणु संख्या पर निर्भर करती है।
उदाहरण —
- हाइड्रोजन की परमाणु संख्या = 1
- ऑक्सीजन की परमाणु संख्या = 8
- सोडियम की परमाणु संख्या = 11
परमाणु द्रव्यमान या द्रव्यमान संख्या (Atomic Mass / Mass Number)
परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की कुल संख्या को द्रव्यमान संख्या कहते हैं। इसे A द्वारा सूचित किया जाता है।
द्रव्यमान संख्या ज्ञात करने का सूत्र —
A=p+n
यहाँ —
- A = द्रव्यमान संख्या
- p = प्रोटॉनों की संख्या
- n = न्यूट्रॉनों की संख्या
द्रव्यमान संख्या का महत्व
- यह परमाणु के कुल द्रव्यमान का संकेत देती है।
- इससे परमाणु में उपस्थित न्यूट्रॉनों की संख्या ज्ञात की जा सकती है।
- समस्थानिकों तथा समभारिकों को समझने में यह उपयोगी होती है।
Class 9 Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi
समस्थानिक (Isotopes)
एक ही तत्व के ऐसे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती है लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न-भिन्न होती है, उन्हें समस्थानिक कहते हैं।
समस्थानिकों में प्रोटॉनों की संख्या समान होती है, लेकिन न्यूट्रॉनों की संख्या अलग-अलग होती है।
हाइड्रोजन के समस्थानिक
हाइड्रोजन के मुख्यतः तीन समस्थानिक होते हैं —
- प्रोटियम (¹H) — साधारण हाइड्रोजन
- ड्यूटेरियम (²H) — भारी हाइड्रोजन
- ट्रिटियम (³H) — सबसे भारी हाइड्रोजन
इन तीनों की परमाणु संख्या समान होती है, लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग-अलग होती है।
समस्थानिकों के उपयोग
- कैंसर के उपचार में कोबाल्ट के समस्थानिक का उपयोग किया जाता है।
- परमाणु भट्टियों में ईंधन के रूप में यूरेनियम के समस्थानिकों का प्रयोग होता है।
- घेंघा रोग के उपचार में आयोडीन के समस्थानिक उपयोगी होते हैं।
- अस्थि रोगों के उपचार में फॉस्फोरस के समस्थानिकों का उपयोग किया जाता है।
- चिकित्सा तथा वैज्ञानिक अनुसंधान में समस्थानिक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
समभारिक (Isobars)
ऐसे तत्व जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है लेकिन परमाणु संख्या भिन्न-भिन्न होती है, उन्हें समभारिक कहते हैं।
अर्थात समभारिकों में कुल द्रव्यमान समान रहता है, लेकिन प्रोटॉनों तथा इलेक्ट्रॉनों की संख्या अलग-अलग होती है।
उदाहरण —
- आर्गन (₁₈Ar⁴⁰)
- कैल्शियम (₂₀Ca⁴⁰)
दोनों की द्रव्यमान संख्या 40 है, लेकिन परमाणु संख्या अलग-अलग है।
समस्थानिक तथा समभारिक में अंतर
समस्थानिक (Isotopes)
- इनमें परमाणु संख्या समान होती है।
- इनकी द्रव्यमान संख्या भिन्न-भिन्न होती है।
- ये एक ही तत्व के परमाणु होते हैं।
- इनमें संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
- इनके रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं।
- आवर्त सारणी में इन्हें एक ही स्थान दिया जाता है।
समभारिक (Isobars)
- इनमें परमाणु संख्या भिन्न-भिन्न होती है।
- इनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है।
- ये अलग-अलग तत्वों के परमाणु होते हैं।
- इनमें संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है।
- इनके रासायनिक गुण अलग-अलग होते हैं।
- आवर्त सारणी में इन्हें अलग-अलग स्थान दिया जाता है।
Class 9 Chemistry Chapter 4 Notes in Hindi
निष्कर्ष (Conclusion)
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