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Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi | प्राकृतिक संसाधन एवं पर्यावरण (Natural Resources and Environment) Free PDF Download

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By Neeraj Kumar
Published On: May 28, 2026
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Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi – प्राकृतिक संसाधन एवं पर्यावरण (Natural Resources and Environment) के इस पोस्ट में हम आपको NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित, सरल, स्पष्ट और परीक्षा-उपयोगी संपूर्ण नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। यह नोट्स विशेष रूप से CBSE, Bihar Board, UP Board तथा अन्य राज्य बोर्डों के हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि वे इस अध्याय के प्रत्येक विषय को आसानी से समझ सकें और परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त कर सकें।

इस अध्याय में हमने प्राकृतिक संसाधनों, वायुमंडल की परतों, ओजोन परत, जल चक्र, जैव-भूरासायनिक चक्र, हरित गृह प्रभाव, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण तथा पर्यावरण संतुलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को विस्तारपूर्वक और सरल भाषा में समझाया है।

साथ ही, इस अध्याय में ओजोन परत के क्षय के कारण, पराबैंगनी किरणों के दुष्प्रभाव, अम्लीय वर्षा, नाइट्रोजन स्थिरीकरण, ह्यूमस तथा विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों की उपयोगिता को भी बोर्ड परीक्षा के अनुसार व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया है।

हर टॉपिक को परिभाषाओं, मुख्य बिंदुओं, उदाहरणों तथा महत्वपूर्ण तथ्यों के माध्यम से इस प्रकार समझाया गया है कि विद्यार्थी इसे आसानी से याद रख सकें और परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

अगर आप Class 9 Chemistry Chapter 5 – प्राकृतिक संसाधन एवं पर्यावरण (Natural Resources and Environment) को आसान भाषा में समझना चाहते हैं और बोर्ड परीक्षा की तैयारी मजबूत करना चाहते हैं,  तो यह Free Hindi Notes और PDF Download आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।

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Table of Contents

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi
Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi
CategoryDetails
BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT
ClassClass 9th
SubjectChemistry (Science)
Chapter No.Chapter 5
Chapter Nameप्राकृतिक संसाधन एवं पर्यावरण (Natural Resources and Environment)
CategoryClass 9th Chemistry Notes in Hindi
MediumHindi Medium

प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources)

वे सभी साधन जिनका उपयोग मनुष्य अपने भोजन, आवास, जीवन-यापन तथा विकास के लिए करता है, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं। ये संसाधन हमें सीधे प्रकृति से प्राप्त होते हैं और मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। यदि प्राकृतिक संसाधन न हों तो पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं हो सकता।

मनुष्य अपने दैनिक जीवन में अनेक प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करता है, जैसे — वायु, जल, मिट्टी, सूर्य का प्रकाश, वन, खनिज, पेट्रोलियम आदि। इन संसाधनों का उपयोग उद्योगों, कृषि, परिवहन तथा ऊर्जा उत्पादन में भी किया जाता है।

संसाधनों के प्रकार

नवीकरणीय संसाधन (Renewable Resources)

वे संसाधन जो प्रकृति में बार-बार उत्पन्न हो जाते हैं तथा जिनकी पूर्ति प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा होती रहती है, नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं।
इन संसाधनों का उचित उपयोग करने पर ये लंबे समय तक उपलब्ध रहते हैं।

जैसे — वायु, सूर्य का प्रकाश, जल, वन आदि।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

अनवीकरणीय संसाधन (Non-renewable Resources)

वे संसाधन जो एक बार उपयोग होने के बाद जल्दी पुनः प्राप्त नहीं होते, अनवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं। इन संसाधनों के बनने में लाखों वर्ष लगते हैं, इसलिए इनका अत्यधिक उपयोग भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

जैसे — कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, खनिज पदार्थ आदि।

ओजोन (Ozone)

ओजोन ऑक्सीजन का एक विशेष रूप है जो ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनती है। इसका रासायनिक सूत्र O₃ होता है। यह गैस वायुमंडल के समतापमंडल (Stratosphere) में पाई जाती है।

ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet Rays) को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकती है। इसी कारण इसे पृथ्वी की सुरक्षात्मक ढाल भी कहा जाता है।

ओजोन का महत्व

ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि यह परत न हो तो सूर्य की हानिकारक किरणें सीधे पृथ्वी की सतह पर पहुँच जाएँगी, जिससे मनुष्य, जीव-जंतु तथा पेड़-पौधों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

ओजोन परत के कारण ही पृथ्वी का तापमान संतुलित बना रहता है और जीवधारियों का जीवन सुरक्षित रहता है।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC)

क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) ऐसे रासायनिक यौगिक हैं जो ओजोन परत को नष्ट करने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। इनका उपयोग मुख्यतः —

  • रेफ्रिजरेटर
  • एयर कंडीशनर
  • स्प्रे
  • फोम निर्माण
  • विभिन्न रासायनिक उत्पादों में किया जाता है।

जब ये गैसें वायुमंडल में पहुँचती हैं, तब समतापमंडल में जाकर ओजोन गैस से अभिक्रिया करती हैं और धीरे-धीरे ओजोन परत को क्षति पहुँचाती हैं।

ओजोन परत के क्षय के कारण

ओजोन परत के क्षय का सबसे बड़ा कारण मानव गतिविधियाँ हैं। मनुष्य द्वारा उपयोग किए जाने वाले रासायनिक पदार्थ, धुआँ, स्प्रे, पेंट तथा CFC गैसें वातावरण को प्रदूषित करती हैं।

ये हानिकारक गैसें वायुमंडल में ऊपर जाकर ओजोन परत से अभिक्रिया करती हैं, जिसके कारण ओजोन परत में धीरे-धीरे छिद्र (Ozone Hole) बनने लगते हैं। ओजोन परत का क्षय वर्तमान समय में एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या बन चुका है।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

वायुमंडल की परतें

पृथ्वी के चारों ओर गैसों का जो आवरण पाया जाता है, उसे वायुमंडल कहते हैं। वायुमंडल कई परतों में विभाजित होता है।

क्षोभमंडल (Troposphere)

पृथ्वी की सतह से लगभग 10 से 12 किलोमीटर तक की ऊँचाई वाले भाग को क्षोभमंडल कहते हैं। यह वायुमंडल की सबसे निचली परत है।

वर्षा, आँधी, बादल, तूफान तथा मौसम संबंधी सभी घटनाएँ इसी मंडल में होती हैं। मनुष्य तथा अन्य जीवधारी इसी परत में जीवन व्यतीत करते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • ऊँचाई बढ़ने पर तापमान कम होता जाता है।
  • प्रत्येक 165 मीटर की ऊँचाई पर तापमान लगभग 1°C कम हो जाता है।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

समतापमंडल (Stratosphere)

क्षोभमंडल के ऊपर लगभग 50 किलोमीटर तक फैले क्षेत्र को समतापमंडल कहते हैं।

इसी मंडल में ओजोन परत पाई जाती है, जो पृथ्वी को हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। इस मंडल में मौसम संबंधी परिवर्तन बहुत कम होते हैं, इसलिए हवाई जहाज प्रायः इसी मंडल में उड़ान भरते हैं।

वाह्यमंडल (Exosphere)

पृथ्वी की सतह से लगभग 640 किलोमीटर से 2700 किलोमीटर तक की ऊँचाई वाले भाग को वाह्यमंडल कहा जाता है। यह वायुमंडल की सबसे बाहरी परत होती है। इसके ऊपर का क्षेत्र अंतरिक्ष कहलाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

एक सामान्य मनुष्य को प्रतिदिन लगभग 250 से 265 किलोग्राम वायु की आवश्यकता होती है।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet Rays)

पराबैंगनी किरणों की खोज सर्वप्रथम वैज्ञानिक रीटर (Ritter) ने की थी। ये सूर्य से निकलने वाली अत्यंत हानिकारक किरणें हैं। सामान्य रूप से ओजोन परत इन किरणों को पृथ्वी तक पहुँचने से रोकती है।

यदि ये किरणें सीधे पृथ्वी तक पहुँच जाएँ, तो जीवधारियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

पराबैंगनी किरणों से होने वाली हानियाँ

  • मोतियाबिंद जैसी आँखों की बीमारी होना
  • त्वचा कैंसर होने का खतरा बढ़ना
  • जीवों के DNA में परिवर्तन होना
  • समुद्री जीवों को नुकसान पहुँचना
  • पेड़-पौधों की वृद्धि प्रभावित होना

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

पवन (Wind)

गतिशील वायु को पवन कहा जाता है। जब वायु उच्च दाब वाले क्षेत्र से निम्न दाब वाले क्षेत्र की ओर गति करती है, तब पवन उत्पन्न होती है।

पवन का उपयोग आज ऊर्जा उत्पादन, मौसम परिवर्तन तथा जलवायु संतुलन में महत्वपूर्ण रूप से किया जाता है।

स्थल एवं जल का गर्म होना

स्थल सूर्य की ऊष्मा को जल्दी ग्रहण कर लेता है, इसलिए यह जल्दी गर्म हो जाता है। इसके विपरीत जल धीरे-धीरे गर्म होता है क्योंकि जल की ऊष्मा धारण क्षमता अधिक होती है।

इसी कारण दिन और रात में स्थल तथा जल के तापमान में अंतर पाया जाता है। यही प्रक्रिया समुद्री और स्थलीय हवाओं के बनने का कारण भी बनती है।

अम्लीय वर्षा (Acid Rain)

जब वायुमंडल में उपस्थित सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) तथा नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) जलवाष्प के साथ मिलकर वर्षा की बूंदों के रूप में पृथ्वी पर गिरते हैं, तो उसे अम्लीय वर्षा कहते हैं।

यह वर्षा उद्योगों तथा वाहनों से निकलने वाली हानिकारक गैसों के कारण होती है।

अम्लीय वर्षा के दुष्प्रभाव

  • मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है।
  • जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं।
  • भवनों एवं ऐतिहासिक स्मारकों को नुकसान पहुँचता है।
  • पेड़-पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।
  • जलीय जीवों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

वर्षा के आधार पर क्षेत्रों का वर्गीकरण

नम क्षेत्र

जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेंटीमीटर से अधिक होती है, उसे नम क्षेत्र कहते हैं। ऐसे क्षेत्रों में हरियाली अधिक पाई जाती है।

मध्यम वर्षा क्षेत्र

जहाँ वार्षिक वर्षा 100 सेंटीमीटर से 200 सेंटीमीटर के बीच होती है, वह मध्यम वर्षा क्षेत्र कहलाता है। इन क्षेत्रों में कृषि अच्छी होती है।

अर्द्धशुष्क क्षेत्र

जहाँ वार्षिक वर्षा 50 सेंटीमीटर से 100 सेंटीमीटर के बीच होती है, उसे अर्द्धशुष्क क्षेत्र कहते हैं। यहाँ जल की उपलब्धता सीमित होती है।

शुष्क क्षेत्र

जहाँ वार्षिक वर्षा 20 सेंटीमीटर से 50 सेंटीमीटर के बीच होती है, वह शुष्क क्षेत्र कहलाता है। इन क्षेत्रों में पानी की कमी अधिक होती है और वनस्पति कम पाई जाती है।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

जल चक्र (Water Cycle)

जल प्रकृति में निरंतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमता रहता है। इस निरंतर होने वाली प्रक्रिया को जल चक्र कहा जाता है।
हम जानते हैं कि जल की तीन अवस्थाएँ होती हैं —

  • ठोस (Solid)
  • द्रव (Liquid)
  • गैस (Gas)

पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड के कारण जल जमकर बर्फ बन जाता है। जब सूर्य की गर्मी बर्फ पर पड़ती है, तब वह पिघलकर पानी में बदल जाती है और नदियों, तालाबों तथा समुद्रों में पहुँच जाती है।

समुद्र, नदी तथा तालाबों का जल सूर्य की ऊष्मा के कारण वाष्पीकृत होकर जलवाष्प में बदल जाता है। यह जलवाष्प ऊपर उठकर ठंडी हवा के संपर्क में आती है और संघनित होकर बादलों का निर्माण करती है। बादल जब अधिक भारी हो जाते हैं, तब वर्षा के रूप में जल पुनः पृथ्वी की सतह पर गिरता है।

जीवधारियों, पौधों, तालाबों तथा अन्य जल स्रोतों से भी जल वाष्प बनकर वातावरण में जाता रहता है। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है, इसलिए इसे जल चक्र कहा जाता है।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

आयनमंडल (Ionosphere)

समतापमंडल के ऊपर पृथ्वी की सतह से लगभग 80 किलोमीटर से 640 किलोमीटर तक फैले क्षेत्र को आयनमंडल कहते हैं।

इस मंडल में गैसों के कण आयनों के रूप में पाए जाते हैं। यह परत रेडियो तरंगों के प्रसारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रेडियो संचार तथा दूरसंचार प्रणाली में आयनमंडल का विशेष महत्व है।

हरित गृह प्रभाव (Greenhouse Effect)

पृथ्वी के चारों ओर कुछ गैसों की एक परत पाई जाती है, जिसमें मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन तथा जलवाष्प शामिल हैं। ये गैसें सूर्य से आने वाली ऊष्मा को पृथ्वी तक आने देती हैं, लेकिन पृथ्वी से वापस जाने वाली ऊष्मा के एक भाग को रोक लेती हैं।

इस कारण पृथ्वी का वायुमंडल गर्म होने लगता है। पृथ्वी के तापमान में होने वाली इस वृद्धि को हरित गृह प्रभाव (Greenhouse Effect) कहते हैं।

हरित गृह प्रभाव के दुष्प्रभाव

  • पृथ्वी के तापमान में वृद्धि
  • हिमखंडों का पिघलना
  • समुद्र तल का बढ़ना
  • जलवायु परिवर्तन
  • सूखा एवं बाढ़ जैसी प्राकृतिक समस्याएँ

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

वायु प्रदूषण (Air Pollution)

वायु में ऐसे अवांछित तथा हानिकारक पदार्थों की मिलावट जिससे वायु के प्राकृतिक गुण बदल जाएँ और वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाए, वायु प्रदूषण कहलाता है।

वाहनों का धुआँ, कारखानों से निकलने वाली गैसें, धूल तथा जलते हुए ईंधन वायु प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।

वायु प्रदूषण से होने वाली हानियाँ

  • श्वसन संबंधी रोग
  • आँखों में जलन
  • पर्यावरण असंतुलन
  • अम्लीय वर्षा की समस्या

पृथ्वी एक अद्वितीय ग्रह है क्यों?

पृथ्वी को अद्वितीय ग्रह कहा जाता है क्योंकि यहाँ जीवन के लिए आवश्यक सभी परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं।

पृथ्वी पर —

  • वायुमंडल उपस्थित है
  • पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध है
  • जीवन के लिए उपयुक्त तापमान पाया जाता है
  • ऑक्सीजन तथा अन्य आवश्यक गैसें मौजूद हैं

इन्हीं कारणों से पृथ्वी पर जीव-जंतुओं तथा पेड़-पौधों का जीवन संभव हो पाया है।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

जल प्रदूषण (Water Pollution)

जल में अवांछनीय तथा हानिकारक पदार्थों की मिलावट जिससे जल की प्राकृतिक गुणवत्ता घट जाए और वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बन जाए, जल प्रदूषण कहलाता है।

कारखानों का अपशिष्ट, घरेलू गंदगी, कीटनाशक तथा सीवेज जल जल प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।

जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव

  • पीने योग्य जल की कमी
  • जलजनित रोगों का फैलना
  • जलीय जीवों को नुकसान
  • जल की गुणवत्ता में गिरावट

जैव-भूरासायनिक चक्र (Biogeochemical Cycle)

जैवमंडल में मिट्टी, जल, वायु तथा जीवधारियों के माध्यम से रासायनिक पदार्थों जैसे —
कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा गंधक आदि का चक्रीय मार्ग में लगातार घूमना जैव-भूरासायनिक चक्र कहलाता है।

यह चक्र प्रकृति में पदार्थों के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

ह्यूमस (Humus)

जीव-जंतुओं तथा पौधों के मृत अवशेषों के सड़ने-गलने एवं जैविक अपघटन से बनने वाला काले-भूरे रंग का पदार्थ ह्यूमस कहलाता है।

ह्यूमस मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी होता है। यह पौधों की वृद्धि और विकास में सहायता करता है तथा मिट्टी में जल धारण क्षमता को भी बढ़ाता है।

नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation)

वह प्रक्रिया जिसके द्वारा वायुमंडल की मुक्त नाइट्रोजन गैस को ऐसे यौगिकों में बदला जाता है जिन्हें पेड़-पौधे आसानी से उपयोग कर सकें, नाइट्रोजन स्थिरीकरण कहलाती है।

यह कार्य कुछ विशेष प्रकार के जीवाणुओं द्वारा किया जाता है।

Class 9 Chemistry Chapter 5 Notes in Hindi

नाइट्रोजन चक्र में जीवाणुओं का कार्य

जीवाणुकार्य
राइजोबियम (Rhizobium)नाइट्रोजन स्थिरीकरण करना
नाइट्रोसोमोनास (Nitrosomonas)अमोनिया को नाइट्राइट में बदलना
नाइट्रोबैक्टर (Nitrobacter)नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदलना
सुडोमोनास (Pseudomonas)नाइट्रेट से नाइट्रोजन मुक्त करना

निष्कर्ष (Conclusion)

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