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Class 9 Physics Chapter 2 Notes in Hindi | गति (Motion) सम्पूर्ण नोट्स एवं Free PDF Download 

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By Neeraj Kumar
Published On: June 8, 2026
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Class 9 Physics Chapter 2 Notes in Hindi – गति (Motion) के इस पोस्ट में हम आपको NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित, सरल, स्पष्ट और परीक्षा-उपयोगी संपूर्ण नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं।

यह नोट्स विशेष रूप से CBSE, Bihar Board, UP Board तथा अन्य राज्य बोर्डों के हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि वे इस अध्याय के प्रत्येक सिद्धांत को आसानी से समझ सकें और बोर्ड परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त कर सकें।

इस अध्याय में हमने गति (Motion) से संबंधित सभी महत्वपूर्ण विषयों जैसे – विराम (Rest), गति (Motion), दूरी (Distance), विस्थापन (Displacement), चाल (Speed), वेग (Velocity), त्वरण (Acceleration), एक समान एवं असमान गति, दूरी-समय ग्राफ, चाल-समय ग्राफ, वेग-समय ग्राफ, गति के समीकरण (Equations of Motion), गुरुत्व के अधीन गति (Motion Under Gravity), वृत्तीय गति (Circular Motion) तथा कोणीय विस्थापन (Angular Displacement) को विस्तारपूर्वक और बोर्ड परीक्षा के अनुसार समझाया है।

साथ ही, इस अध्याय में प्रत्येक अवधारणा की परिभाषा, विशेषताएँ, सूत्र (Formula), मात्रक (Unit), अंतर (Difference) तथा उनके व्यावहारिक उदाहरणों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को कठिन विषय भी आसानी से समझ में आ सकें।

हर विषय को महत्वपूर्ण बिंदुओं, सारणी (Table), ग्राफ संबंधी जानकारी, सूत्रों, परिभाषाओं तथा परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रमुख तथ्यों के साथ इस प्रकार समझाया गया है कि विद्यार्थी उन्हें आसानी से याद रख सकें और उत्तर लेखन में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

अगर आप Class 9th Physics Chapter 2 – गति (Motion) को एकदम आसान भाषा में समझना चाहते हैं और बोर्ड परीक्षा की तैयारी को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो यह फ्री हिंदी नोट्स और PDF Download आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।

अभी पढ़ें, नोट्स डाउनलोड करें और अपनी परीक्षा तैयारी को और अधिक प्रभावी एवं सफल बनाएं।

Table of Contents

Class 9 Physics Chapter 2 Notes in Hindi Overview

Class 9 Physics Chapter 2 Notes in Hindi
Class 9 Physics Chapter 2 Notes in Hindi
विवरण (Details)जानकारी (Information)
BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT
ClassClass 9th
SubjectScience (Physics)
Chapter No.Chapter 2
Chapter NameMotion (गति)
CategoryClass 9th Science Notes in Hindi
MediumHindi
Topics CoveredRest, Motion, Distance, Displacement, Speed, Velocity, Acceleration, Graphs, Equations of Motion, Motion Under Gravity, Circular Motion, Angular Displacement
Study MaterialDetailed Notes, Important Formulas, Tables, Graphs, Exam-Oriented Explanation
PDF AvailabilityFree PDF Download Available

विराम (Rest)

जब कोई वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं करती है, तब वह वस्तु विराम (Rest) की अवस्था में कही जाती है। दूसरे शब्दों में, यदि किसी निश्चित संदर्भ बिंदु (Reference Point) के सापेक्ष किसी वस्तु का स्थान स्थिर रहता है, तो वह वस्तु विराम में मानी जाती है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि विराम एक सापेक्ष (Relative) अवधारणा है, अर्थात् कोई वस्तु एक पर्यवेक्षक के लिए विराम में हो सकती है जबकि दूसरे के लिए गति में दिखाई दे सकती है।

उदाहरण : मेज पर रखी पुस्तक, पेड़ पर बैठी चिड़िया, गोलघर पर बैठा बालक, कमरे में रखा फर्नीचर आदि।

गति (Motion)

जब कोई वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति में परिवर्तन करती है, तब वह वस्तु गति (Motion) की अवस्था में कही जाती है। अर्थात यदि किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष वस्तु का स्थान बदलता है, तो वह गति कर रही होती है। हमारे दैनिक जीवन में दिखाई देने वाली अधिकांश गतिविधियाँ गति के उदाहरण हैं।

उदाहरण : दौड़ता हुआ बालक, उड़ती हुई चिड़िया, सड़क पर चलती कार, नदी में तैरता हुआ मनुष्य आदि।

दूरी (Distance)

किसी वस्तु द्वारा अपनी प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति तक पहुँचने में तय किए गए वास्तविक पथ (Actual Path) की कुल लंबाई को दूरी (Distance) कहते हैं। दूरी केवल यह बताती है कि वस्तु ने कुल कितना रास्ता तय किया है, इसमें दिशा का कोई महत्व नहीं होता।

दूरी की विशेषताएँ

  • दूरी एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है।
  • दूरी का मान सदैव धनात्मक होता है।
  • दूरी का SI मात्रक मीटर (m) तथा C.G.S. मात्रक सेंटीमीटर (cm) होता है।
  • दूरी का मान कभी भी विस्थापन से कम नहीं होता।

विस्थापन (Displacement)

किसी वस्तु की प्रारंभिक स्थिति तथा अंतिम स्थिति के बीच की अल्पतम दूरी, जो दिशा सहित व्यक्त की जाती है, विस्थापन (Displacement) कहलाती है। दूसरे शब्दों में, प्रारंभिक और अंतिम बिंदु को जोड़ने वाली सीधी रेखा की दूरी विस्थापन कहलाती है।

दूरी तथा विस्थापन को सामान्यतः s या d द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

विस्थापन की विशेषताएँ

  • विस्थापन एक सदिश राशि (Vector Quantity) है।
  • इसमें परिमाण के साथ-साथ दिशा का भी महत्व होता है।
  • विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है।
  • विस्थापन का SI मात्रक मीटर (m) तथा C.G.S. मात्रक सेंटीमीटर (cm) होता है।
  • किसी वस्तु के पुनः अपने प्रारंभिक बिंदु पर लौट आने पर उसका विस्थापन शून्य हो जाता है।

दूरी तथा विस्थापन में अंतर

दूरी (Distance)विस्थापन (Displacement)
वस्तु द्वारा तय किए गए वास्तविक मार्ग की कुल लंबाई को दूरी कहते हैं।वस्तु की प्रारंभिक तथा अंतिम स्थिति के बीच की अल्पतम दूरी को विस्थापन कहते हैं।
यह एक अदिश राशि है।यह एक सदिश राशि है।
इसमें केवल परिमाण का महत्व होता है।इसमें परिमाण के साथ-साथ दिशा का भी महत्व होता है।
दूरी सदैव धनात्मक होती है।विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है।
दूरी का मान विस्थापन के बराबर या उससे अधिक होता है।विस्थापन का मान दूरी के बराबर या उससे कम होता है।
दूरी वास्तविक पथ पर निर्भर करती है।विस्थापन केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थिति पर निर्भर करता है।

भौतिक राशि (Physical Quantity)

ऐसी राशियाँ जिन्हें मापा जा सकता है तथा जिनका मान किसी संख्या और मात्रक (Unit) द्वारा व्यक्त किया जा सकता है, भौतिक राशि (Physical Quantity) कहलाती हैं। भौतिकी में विभिन्न घटनाओं का अध्ययन भौतिक राशियों के माध्यम से किया जाता है।

उदाहरण : लंबाई, क्षेत्रफल, आयतन, दूरी, विस्थापन, समय, तापमान, द्रव्यमान, बल, कार्य, शक्ति, ऊर्जा आदि।

भौतिक राशियों के प्रकार

भौतिक राशियाँ मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं—

अदिश राशि (Scalar Quantity)

ऐसी भौतिक राशि जिसमें केवल परिमाण (Magnitude) होता है तथा दिशा की आवश्यकता नहीं होती, अदिश राशि कहलाती है।

उदाहरण : लंबाई, द्रव्यमान, समय, तापमान, दूरी, कार्य, ऊर्जा, शक्ति, आयतन आदि।

अदिश राशि की विशेषताएँ

  • इनमें केवल परिमाण होता है।
  • दिशा का कोई महत्व नहीं होता।
  • इनका जोड़ एवं घटाव सामान्य बीजगणितीय नियमों के अनुसार किया जाता है।
  • इन्हें व्यक्त करने के लिए किसी विशेष संकेत की आवश्यकता नहीं होती।

सदिश राशि (Vector Quantity)

ऐसी भौतिक राशि जिसमें परिमाण के साथ-साथ दिशा का भी ज्ञान होता है, सदिश राशि कहलाती है। किसी सदिश राशि को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए उसका परिमाण और दिशा दोनों बताना आवश्यक होता है।

उदाहरण : विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग, आवेग, भार आदि।

सदिश राशि की विशेषताएँ

  • इनमें परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं।
  • दिशा बदलने पर राशि का प्रभाव भी बदल सकता है।
  • इनका जोड़ एवं घटाव सदिश योग (Vector Addition) के नियमों के अनुसार किया जाता है।
  • सदिश राशियों को प्रदर्शित करने के लिए अक्षर के ऊपर तीर (→) का चिन्ह लगाया जाता है।

अदिश राशि तथा सदिश राशि में अंतर

अदिश राशि (Scalar Quantity)सदिश राशि (Vector Quantity)
इसमें केवल परिमाण होता है।इसमें परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है।
दिशा का कोई महत्व नहीं होता।दिशा का विशेष महत्व होता है।
इसका जोड़ एवं घटाव सामान्य बीजगणितीय नियमों से किया जाता है।इसका जोड़ एवं घटाव सदिश योग के नियमों से किया जाता है।
इसे प्रदर्शित करने के लिए किसी विशेष चिन्ह की आवश्यकता नहीं होती।इसे प्रदर्शित करने के लिए अक्षर के ऊपर तीर (→) का चिन्ह लगाया जाता है।
यह अपेक्षाकृत सरल भौतिक राशि होती है।यह दिशा सहित व्यक्त की जाने वाली भौतिक राशि होती है।
उदाहरण : लंबाई, द्रव्यमान, समय, कार्य, ऊर्जा, शक्ति आदि।उदाहरण : विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग, भार आदि।

चाल (Speed)

किसी वस्तु द्वारा इकाई समय (Unit Time) में तय की गई दूरी को चाल (Speed) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, किसी वस्तु के दूरी तय करने की दर को चाल कहा जाता है। चाल यह बताती है कि कोई वस्तु कितनी तेजी से चल रही है, लेकिन इसमें दिशा का कोई महत्व नहीं होता।

चाल का सूत्र

चाल = दूरी / समय

ext{Speed}=rac{ext{Distance}}{ext{Time}}

चाल को सामान्यतः v द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

मात्रक

  • SI मात्रक : मीटर प्रति सेकंड (m/s)
  • C.G.S. मात्रक : सेंटीमीटर प्रति सेकंड (cm/s)

चाल की विशेषताएँ

  • चाल एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है।
  • इसमें केवल परिमाण का महत्व होता है।
  • दिशा बदलने से चाल प्रभावित नहीं होती।
  • किसी वस्तु की चाल सदैव धनात्मक या शून्य होती है।

चाल के प्रकार

एक समान चाल (Uniform Speed)

जब कोई वस्तु समान समय अंतरालों में समान दूरी तय करती है, चाहे समय अंतराल कितना भी छोटा क्यों न हो, तब वस्तु की चाल एक समान चाल कहलाती है।

उदाहरण : सीधी सड़क पर 40 km/h की स्थिर चाल से चलती हुई कार।

असमान चाल (Non-uniform Speed)

जब कोई वस्तु समान समय अंतरालों में असमान दूरी या असमान समय अंतरालों में समान दूरी तय करती है, तब उसकी चाल असमान चाल कहलाती है।

उदाहरण : शहर के ट्रैफिक में चलती हुई कार, दौड़ता हुआ खिलाड़ी।

तात्क्षणिक चाल (Instantaneous Speed)

किसी वस्तु की किसी विशेष क्षण या किसी विशेष बिंदु पर प्राप्त चाल को तात्क्षणिक चाल कहते हैं।

उदाहरण : किसी वाहन के स्पीडोमीटर द्वारा किसी क्षण प्रदर्शित चाल।

औसत चाल (Average Speed)

भिन्न-भिन्न समय अंतरालों में तय की गई कुल दूरी तथा उसे तय करने में लगे कुल समय के अनुपात को औसत चाल कहते हैं।

औसत चाल का सूत्र

औसत चाल = कुल दूरी / कुल समय

ext{Average Speed}=rac{ext{Total Distance}}{ext{Total Time}}

वेग (Velocity)

किसी वस्तु द्वारा इकाई समय में तय किए गए विस्थापन को वेग (Velocity) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, दिशायुक्त चाल (Speed with Direction) को वेग कहा जाता है।

वेग केवल यह नहीं बताता कि वस्तु कितनी तेजी से चल रही है, बल्कि यह भी बताता है कि वह किस दिशा में चल रही है।

वेग का सूत्र

वेग = विस्थापन / समय

ext{Velocity}=rac{ ext{Displacement}}{ ext{Time}}

वेग को सामान्यतः v अथवा u द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

मात्रक

  • SI मात्रक : मीटर प्रति सेकंड (m/s)
  • C.G.S. मात्रक : सेंटीमीटर प्रति सेकंड (cm/s)

वेग की विशेषताएँ

  • वेग एक सदिश राशि (Vector Quantity) है।
  • इसमें परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है।
  • दिशा बदलने पर वेग भी बदल जाता है।
  • वेग धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है।

वेग के प्रकार

एक समान वेग (Uniform Velocity)

जब कोई वस्तु समान समय अंतरालों में समान विस्थापन तय करती है तथा उसकी गति की दिशा भी स्थिर रहती है, तब उसका वेग एक समान वेग कहलाता है।

उदाहरण : सीधी सड़क पर समान चाल और समान दिशा में चलती हुई कार।

असमान वेग (Non-uniform Velocity)

जब किसी वस्तु का विस्थापन समान समय अंतरालों में समान नहीं होता अथवा उसकी दिशा बदलती रहती है, तब उसका वेग असमान वेग कहलाता है।

उदाहरण : मोड़दार सड़क पर चलती हुई कार, वृत्तीय पथ पर गति करती वस्तु।

तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Velocity)

किसी विशेष समय पर किसी वस्तु का वेग तात्क्षणिक वेग कहलाता है। यह उस क्षण वस्तु की वास्तविक गति और दिशा को दर्शाता है।

औसत वेग (Average Velocity)

कुल विस्थापन तथा कुल समय के अनुपात को औसत वेग कहते हैं।

औसत वेग का सूत्र

औसत वेग = कुल विस्थापन / कुल समय

ext{Average Velocity}=rac{ext{Total Displacement}}{ ext{Total Time}

एक समान त्वरण की स्थिति में—

औसत वेग = (प्रारंभिक वेग + अंतिम वेग) / 2

जहाँ,

u = प्रारंभिक वेग (Initial Velocity)

v = अंतिम वेग (Final Velocity)

ar{v}=rac{u+v}{2}

चाल तथा वेग में अंतर

चाल (Speed)वेग (Velocity)
इकाई समय में तय की गई दूरी को चाल कहते हैं।इकाई समय में तय किए गए विस्थापन को वेग कहते हैं।
यह एक अदिश राशि है।यह एक सदिश राशि है।
इसमें केवल परिमाण का महत्व होता है।इसमें परिमाण के साथ-साथ दिशा का भी महत्व होता है।
चाल सदैव धनात्मक होती है।वेग धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है।
दिशा बदलने पर चाल आवश्यक नहीं कि बदले।दिशा बदलने पर वेग अवश्य बदलता है।
एक समान वृत्तीय गति में चाल स्थिर रह सकती है।एक समान वृत्तीय गति में वेग निरंतर बदलता रहता है।

त्वरण (Acceleration)

किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण (Acceleration) कहते हैं। अर्थात किसी वस्तु का वेग जितनी तेजी से बदलता है, उसी दर को त्वरण कहा जाता है।

त्वरण को सामान्यतः a द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

त्वरण का सूत्र

त्वरण = वेग में परिवर्तन / लगा समय

या,

a = (v – u) / t

जहाँ,

u = प्रारंभिक वेग

v = अंतिम वेग

t = लगा हुआ समय

a=rac{v-u}{t}

मात्रक

  • SI मात्रक : मीटर प्रति सेकंड² (m/s²)
  • C.G.S. मात्रक : सेंटीमीटर प्रति सेकंड² (cm/s²)

त्वरण की विशेषताएँ

  • त्वरण एक सदिश राशि (Vector Quantity) है।
  • इसमें परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं।
  • वेग में परिवर्तन पर ही त्वरण उत्पन्न होता है।
  • यदि वेग स्थिर हो तो त्वरण शून्य होता है।

त्वरण के प्रकार

एक समान त्वरण (Uniform Acceleration)

यदि किसी वस्तु के वेग में समान समय अंतरालों में समान परिवर्तन होता है, अर्थात वेग समान दर से बढ़ता या घटता है, तो उस वस्तु के त्वरण को एक समान त्वरण (Uniform Acceleration) कहते हैं।

इस स्थिति में प्रत्येक समान समय अंतराल में वेग में होने वाला परिवर्तन बराबर होता है, इसलिए त्वरण का मान स्थिर रहता है।

उदाहरण : स्वतंत्र रूप से गिरती हुई वस्तु, सीधी सड़क पर समान रूप से गति बढ़ाती हुई कार।

असमान त्वरण (Non-uniform Acceleration)

यदि किसी वस्तु के वेग में समान समय अंतरालों में असमान परिवर्तन होता है, तो उस वस्तु के त्वरण को असमान त्वरण (Non-uniform Acceleration) कहते हैं।

इस स्थिति में वेग परिवर्तन की दर लगातार बदलती रहती है, इसलिए त्वरण का मान भी स्थिर नहीं रहता।

उदाहरण : भीड़भाड़ वाले मार्ग पर चलती कार, ब्रेक और एक्सीलेटर का बार-बार उपयोग करती हुई मोटरसाइकिल।

ग्राफ (Graph)

दो परिवर्तनशील राशियों (Variables) के बीच संबंध को चित्रात्मक रूप में प्रदर्शित करने की विधि को ग्राफ (Graph) कहते हैं। ग्राफ के माध्यम से विभिन्न राशियों के बीच संबंध को आसानी से समझा और विश्लेषित किया जा सकता है।

ग्राफ में सामान्यतः एक राशि को X-अक्ष (X-axis) तथा दूसरी राशि को Y-अक्ष (Y-axis) पर प्रदर्शित किया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • स्वतंत्र राशि (Independent Variable) को X-अक्ष पर दर्शाया जाता है।
  • आश्रित राशि (Dependent Variable) को Y-अक्ष पर दर्शाया जाता है।
  • ग्राफ किसी भौतिक राशि में होने वाले परिवर्तन को सरलता से समझने में सहायता करता है।

दूरी-समय ग्राफ (Distance-Time Graph)

किसी वस्तु द्वारा तय की गई दूरी तथा उस दूरी को तय करने में लगे समय के बीच खींचे गए ग्राफ को दूरी-समय ग्राफ (Distance-Time Graph) कहते हैं।

इस ग्राफ में—

  • समय (Time) को X-अक्ष पर प्रदर्शित किया जाता है।
  • दूरी (Distance) को Y-अक्ष पर प्रदर्शित किया जाता है।

दूरी-समय ग्राफ की विशेषताएँ

एक समान चाल के लिए – यदि कोई वस्तु एक समान चाल से चल रही हो, तो दूरी-समय ग्राफ एक सरल रेखा (Straight Line) प्राप्त होती है।

असमान चाल के लिए – यदि वस्तु की चाल बदलती रहती है, तो दूरी-समय ग्राफ वक्र रेखा (Curved Line) प्राप्त होती है।

ढाल (Slope) – दूरी-समय ग्राफ की ढाल (Slope) वस्तु की चाल (Speed) का मान देती है।

चाल का सूत्र

चाल = दूरी-समय ग्राफ की ढाल

महत्वपूर्ण तथ्य

  • ग्राफ जितना अधिक तीव्र (Steep) होगा, चाल का मान उतना अधिक होगा।
  • समय अक्ष के साथ बड़ा कोण बनाने वाला ग्राफ अधिक चाल को दर्शाता है।
  • क्षैतिज (Horizontal) रेखा यह दर्शाती है कि वस्तु विराम अवस्था में है।

चाल-समय ग्राफ (Speed-Time Graph)

किसी वस्तु की चाल में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को दर्शाने वाला ग्राफ चाल-समय ग्राफ (Speed-Time Graph) कहलाता है।

इस ग्राफ में—

  • समय (Time) को X-अक्ष पर रखा जाता है।
  • चाल (Speed) को Y-अक्ष पर रखा जाता है।

चाल-समय ग्राफ से वस्तु की गति की स्थिति को आसानी से समझा जा सकता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • चाल-समय ग्राफ की ढाल त्वरण को प्रदर्शित करती है।
  • समय अक्ष के समानांतर रेखा एक समान चाल को दर्शाती है।
  • ऊपर की ओर जाती रेखा बढ़ती हुई चाल को दर्शाती है।

वेग-समय ग्राफ (Velocity-Time Graph)

किसी वस्तु के वेग में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को प्रदर्शित करने वाला ग्राफ वेग-समय ग्राफ (Velocity-Time Graph) कहलाता है।

इस ग्राफ में—

  • समय (Time) को X-अक्ष पर रखा जाता है।
  • वेग (Velocity) को Y-अक्ष पर रखा जाता है।

वेग-समय ग्राफ की विशेषताएँ

  • वेग-समय ग्राफ की ढाल वस्तु का त्वरण देती है।
  • यदि ग्राफ की ढाल धनात्मक हो, तो वस्तु त्वरित गति में होती है।
  • यदि ढाल ऋणात्मक हो, तो वस्तु मंदित गति में होती है।
  • यदि रेखा X-अक्ष के समानांतर हो, तो त्वरण शून्य होता है।

त्वरण का सूत्र

त्वरण = वेग-समय ग्राफ की ढाल

गति के समीकरण (Equations of Motion)

जब कोई वस्तु एक समान त्वरण से गति करती है, तब उसके लिए निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण समीकरण लागू होते हैं।

प्रथम समीकरण

v = u + at

द्वितीय समीकरण

s = ut + ½at²

s=ut+rac{1}{2}at^{2}

तृतीय समीकरण

v² = u² + 2as

जहाँ,

u = प्रारंभिक वेग

v = अंतिम वेग

a = त्वरण

t = समय

s = विस्थापन

गुरुत्व के अधीन गति (Motion Under Gravity)

जब किसी वस्तु को किसी निश्चित ऊँचाई से नीचे गिराया जाता है अथवा ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर फेंका जाता है, तब पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वस्तु में एक विशेष त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity) कहते हैं।

इसे सामान्यतः g द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

गुरुत्वीय त्वरण का मान

g = 9.8 m/s²

पृथ्वी की सतह के निकट इसका औसत मान लगभग 9.8 m/s² माना जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • वस्तु को नीचे गिराने पर g धनात्मक (+) माना जाता है।
  • वस्तु को ऊपर फेंकने पर g ऋणात्मक (-) माना जाता है।
  • गुरुत्वीय त्वरण का मान सभी वस्तुओं के लिए समान होता है (वायु प्रतिरोध की उपेक्षा करने पर)।

गुरुत्व के अधीन गति के समीकरण

वस्तु को ऊपर फेंकने पर

v = u − gt

h = ut − ½gt²

v² = u² − 2gh

वस्तु को नीचे गिराने पर

v = u + gt

h = ut + ½gt²

v² = u² + 2gh

वृत्तीय गति (Circular Motion)

जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार पथ (Circular Path) पर समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है, तो उस गति को वृत्तीय गति (Circular Motion) कहते हैं।

इस प्रकार की गति में वस्तु लगातार दिशा बदलती रहती है, इसलिए उसका वेग भी निरंतर बदलता रहता है।

उदाहरण : पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की गति, सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति, धागे से बंधे पत्थर को वृत्ताकार घुमाना, घड़ी की सुई की गति।

कोणीय विस्थापन (Angular Displacement)

जब कोई वस्तु वृत्तीय पथ पर घूमती है, तब उसकी प्रारंभिक तथा अंतिम स्थिति के कारण वृत्त के केंद्र पर जो कोण बनता है, उसे कोणीय विस्थापन (Angular Displacement) कहते हैं।

कोणीय विस्थापन को सामान्यतः θ (थीटा) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

कोणीय विस्थापन का सूत्र

θ = l / r

जहाँ,

l = चाप (Arc) की लंबाई

r = वृत्त की त्रिज्या

मात्रक – कोणीय विस्थापन का SI मात्रक रेडियन (Radian) होता है।

1 रेडियन (1 Radian)

वृत्त की त्रिज्या के बराबर लंबाई वाले चाप द्वारा वृत्त के केंद्र पर बनाए गए कोण को एक रेडियन (1 Radian) कहते हैं।

महत्वपूर्ण संबंध

1 रेडियन = 57.3°

π रेडियन = 180°

2π रेडियन = 360°

विशेष तथ्य

रेडियन कोण मापने की SI इकाई है तथा उच्च स्तर की भौतिकी और गणित में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है। वृत्तीय गति, कोणीय वेग तथा कोणीय त्वरण से संबंधित गणनाओं में रेडियन का विशेष महत्व होता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

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Also Read : Class 9 Physics Chapter 1 Notes in Hindi | भौतिक विज्ञान, भौतिक राशि एवं मात्रक (Units and Measurements) Free PDF Download 

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